पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Friday, June 12, 2009

हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

यतीम बालिका अगवा प्रकरण में दौसा पुलिस के नकारापन पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए पुलिस के उच्चाधिकारियों से पूछा है कि 'पता-ठिकाना होने के बावजूद आखिर क्यों नहीं मिल रही पुलिस को बालिका!' घटना के दो सप्ताह बाद भी अगवा कर बंधक बनाकर रखी गई बालिका को बरामद कर पाने में पुलिस के विफल रहने कर पर बालिका के चाचा ने राजस्थान उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पेश की। इस पर न्यायाधीश महेश भगवती ने प्रमुख शासन सचिव पुलिस अधीक्षक और कोतवाली थाना प्रभारी सहित सात लोगों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। इस घटना के बाद से जाति विशेष के खिलाफ लामबंद सर्वसमाज धरना, प्रदर्शन, दौसा बंद के बावजूद स्थानीय पुलिस की उदासीनता के कारण आक्रोशित है। उधर, मुसलिम समाज का एक प्रतिनिधिमंडल राजस्थान मुसलिम फोरम के बैनर तले पुलिस महानिदेशक और अन्य उच्चाधिकारियों से मिला। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में प्रार्थी पक्ष ने अदालत को अवगत करवाया कि स्थानीय थाना पुलिस को बालिका अपहरण हो जाने के बाद अपहर्ताओं द्वारा पीडि़ता को बंदी बनाकर कहां गया है? इसकी जानकारी मिल गई, कोतवाली ने पीडि़ता और नामजद आरोपियों से मोबाइल पर बातचीत की और परिजनों से भी उनकी बातचीत करवाई। इस दौरान आरोपियों के छुपे होने का स्थान भी पुलिस को पता चल गया लेकिन इसके बावजूद बालिका को बरामद कर आरोपियों को पकड़ने की कोई कार्रवाई नहीं की गई। 27 मई को हुई इस घटना के बाद तीन दिन तक पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और नामजद आरोपियों की शर्ते मानने का दबाव डालती रही। नामजद आरोपियों के सवाई माधोपुर जिले में छुपे होने की पुष्टि हो जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस और संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक से इस बाबत संपर्क नहीं साधना पुलिस की कारगुजारी को पूरी तरह संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

रिश्वतखोर इंस्पेक्टर को जेल भेजा

जयपुर-लुहारू मार्ग पर वाहनों से अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर राकेश विजयवर्गीय व गार्ड राजेंद्र को जेल भेज दिया गया है। 
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बीती रात राकेश के दस्ते को साढ़े तीन हजार रुपए वसूली करते रंगे हाथों पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को दोनों आरोपियों को न्यायाधीश न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण के समक्ष पेश किया। वहां न्यायाधीश ने जमानत आवेदन खारिज करते हुए दोनों को जेल भेजने के आदेश दिए। 
जयपुर से आई एसीबी टीम के डीएसपी जेके व्यास के मुताबिक ट्रांसपोर्टर राजकुमार व कृष्णकुमार ने इंस्पेक्टर राकेश के खिलाफ मासिक बंधी मांगने की शिकायत की। इसका सत्यापन कराने के बाद मामला साढ़े तीन हजार रुपए में तय हुआ। 
बुधवार रात अग्रसेन सर्किल पर रुपए लेते समय टीम ने इंस्पेक्टर राकेश व गार्ड राजेंद्र को रंगे हाथों दबोच लिया। दस्ते के पास दो लाख रुपए नकदी बरामद हुई, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। ब्यूरो टीम इसकी जांच कर रही है। कार्रवाई के समय इंस्पेक्टर ने एसीबी टीम के साथ हाथापाई भी की बताई, जिसकी सूचना पर कंट्रोल रूप ने पुलिस की मोबाइल टीम को भेजा। 
आरोपी इंस्पेक्टर राकेश लुहारू मार्ग पर ही अधिकांश समय गुजरता। सुबह 10 बजे के करीब आफिस आने के बाद वह बीहड़ चैक पोस्ट के निकट बड़ के नीचे गाड़ी लगा लेता। रात को फिर इसी रोड पर अग्रसेन सर्किल के आगे खड़ा हो जाता। 
जिला परिवहन कार्यालय में तैनात इंस्पेक्टर राकेश को अधिकृत रूप से अलसीसर, मलसीसर, बिसाऊ, मंडावा व झुंझुनूं का एरिया दिया हुआ था। लुहारू रोड पर वाहनों का आना-जाना अधिक है। ऐसे में अपने एरिया की बजाए इंस्पेक्टर अधिकांश समय पर यहीं पर खड़ा रहता। 
गार्ड करते थे लेन-देन का काम
रिश्वतखोर इंस्पेक्टर राकेश विजयवर्गीय ने वाहन चालकों से रकम वसूलने के लिए भाड़े के गार्ड रखता था। खाखी ड्रेस पहनकर गार्ड सड़कों पर आने-जाने वाले वाहनों को रोकते और चालक को साहब के पास भेज देते। वहां से फटकार लगने के बाद गार्ड ले-देकर मामला निबटा देते।

जैनों को अल्पसंख्यक का दर्जा किस लिए?

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक सुनवाई में स्पष्ट किया है कि जैन धार्मिक अल्पसंख्यक नही है वह तो हिंदू धर्म का ही एक भाग है महाराष्ट्र में जैनों को दिये गये अल्पसंख्यक का दर्जा विरोधाभासी है। यह मुंबई हाई कोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका में बताया गया है।
फुले आंबेडक र शाहु टीचर्स एसोशिएशन और अन्य द्वारा दायर की गई जनहित याचिका एक शैक्षाणिक संस्था को दिये गये अल्पसंख्यक दर्जे के लिए है। इस शैक्षणिक संस्था ने जैन संस्था के रुप में मान्यता देकर अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। जस्टिस जे एन पटेल और मृदुला भारकर की खंडपीठ के सामने यह पिटिशन सुनवाई के लिए आई तभी केन्द्र सरकार ने अपना सौगंधनामा पेश किया था, लेकिन उसे रेकार्ड में नही लिया गया दूसरी ओर राज्य सरकार ने प्रपत्र पेश करने के लिए समय मांगा था। 
इस पीटिशन में अन्य जो मुद्दे रखे गये है उन्हें मान्य रखा जाय तो राज्य की कई संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जे को रद्घ किया जा सकता है सुप्रीमकोर्ट ने एक सुनवाई में कहा कि अल्पसंख्यक संस्था दर्जा मांगने वाली संस्था की स्थापना अल्पसंख्यक संस्था के रुप में ही होनी चाहिए लठ् एज्युकेशन सोसायटी ट्रस्ट सांगली की स्थापना बिन सांप्रदादिक संस्था के रुप में की गई थी उसके सभी समाज के लोगों को शिक्षा दी जाती थी संस्था के प्रार्थना पण से ही इस संस्था को अल्पसंख्यक संस्था के रुप में दिये गये ५० प्रतिशत अल्पसंख्यक आरक्षणे रद्द करने की मांग की गयी थी।

बस का फर्श उखाड़कर दो कैदी फरार

लुधियाना में दो शातिर विचाराधीन कैदी फिल्मी अंदाज में ट्रैफिक जाम में फंसी सरकारी बस का खस्ताहाल फर्श उखाड़ कर फरार हो गए। यह घटना वीरवार सुबह जगराओं पुल पर हुई। कैदियों को बस में सेंट्रल जेल से नई कचहरी में पेशी के लिए लाया जा रहा था। पुलिस देर शाम तक आरोपियों की तलाश में यहां-वहां दबिश देती रही।

थाना डिवीजन नंबर दो पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अफसरों ने कैदियों के साथ बस में सवार पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच भी शुरू कर दी है। फरार विचाराधीन कैदियों की पहचान रूद्रपुर, उत्तर प्रदेश निवासी राजू गंजा और आजमगढ़ निवासी सुनील कुमार के तौर पर हुई है। घटना सुबह करीब ग्यारह बजे की है। 

लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद करीब 40 कैदियों को पेशी के लिए नई कचहरी लाया जा रहा था। एएसआई शीतल सिंह सहित अन्य चार कांस्टेबल बस में ड्यूटी पर थे। राज गंजा और सुनील कुमार बस की दाई तरफ पीछे की सीटों पर बैठे थे। यह सीट पिछले टायरों के ऊपर है। खस्ताहाल बस के फर्श की टीन कई जगह से उखड़ी हुई थी।

बस जगराओं पुल पर ट्रैफिक जाम में फंस गई। कैदियों के लिए यह अच्छा मौका था। दोनों ने टायर के ऊपर की खस्ताहाल टीन उखाड़ी और निकल कर फरार हो गए। पुलिस कुछ समझ पाते दोनों आरोपी अलग-अलग रास्तों से जेल रोड की तरफ फरार हो गए। बस में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने घटना की जानकारी अफसरों को दी। अन्य विचाराधीन कैदियों को अतिरिक्त सतर्कता से नई कचहरी ले जाया गया। सूचना मिलने पर पुलिस अफसरों ने भी आकर बसों की जांच की।

Thursday, June 11, 2009

कसाब को पहचानते ही फूट पड़ा घायल बच्ची का पिता

मुंबई हमले में सीएसटी रेलवे स्टेशन पर गोली लगने से घायल हुई एक दस साल की बच्ची ने अजमल कसाब को गोली चलाने वाले आतंकी के रूप में पहचाना है। वहीं उसके पिता अपनी बेटी को घायल करने वाले हमलावरों में से एक को सामने देख कर आपा खो बैठे और उन्होंने कसाब को फांसी पर चढ़ाने को कहा। मुंबई हमलों की सुनवाई कर रहे विशेष जज एमएल टाहिलियानी की कोर्ट में मामले की सबसे नन्ही चश्मदीद गवाह देविका रोतावन बुधवार को पेश हुई। पांव में गोली लगने से घायल हुई देविका बैसाखी के सहारे आई और पूरे धैर्य व विश्वास के साथ उसने सवालों के जवाब दिए। कोर्ट ने उससे कठघरे में खड़े तीन आरोपियों में से हमले के दौरान गोली चलाने वाले को पहचानने को कहा। इस पर उसने कसाब की ओर इशारा किया। हमलावरों में कसाब ही अब एकमात्र जीवित है। 

फूट पड़ा नटवरलाल: देविका के पिता नटवरलाल से जब कसाब को पहचानने को कहा गया तो वह आपा खो बैठे। उन्होंने कहा, ‘यही है हमलावर जो वहां बैठा है। उसने मेरी बेटी को गोली मार कर घायल कर दिया। उसे फांसी पर चढ़ा देना चाहिए।’ जज ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। नटवरलाल ने कहा कि जिसे चोट लगती है उसी को दर्द का एहसास होता है। उसने कहा, ‘मेरी बेटी की जिंदगी का सवाल था।’

तहसीलदार को कठोर कारावास

जयपुर : टोंक जिले की तहसील देवली के तत्कालीन तहसीलदार नारायण सिंह पटवारी रामप्रसाद शर्मा पर नागरिक श्योजीराम द्वारा आपस में मिलीभगत कर बीसलपुर बांध के डूब क्षेत्र में लगभग साढ़े छह हजार रुपये का मुआवजा दिलाकर राज्य सरकार को चपत लगाने के जुर्म में न्यायालय द्वारा प्रत्येक को एक-एक वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक को 20 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक ने बताया कि ब्यूरो को सूचना मिली थी कि टोंक जिले की देवली तहसील में तहसीलदार व पटवारी ने आपस में मिलीभगत कर डूब क्षेत्र का नाजायज मुआवजा दिलवाया है। इस पर ब्यूरो ने मुकदमा दर्ज कर जांच करने पर पापा कि तत्कालीन तहसीलदार नारायण सिंह व पटवारी ने लाभार्थी श्योजीराम ने नाम सरकारी भूमि का फर्जी आवंटन दर्शाकर, नामांतरण कर सत्यापन करके बीसलपुर बांध परियोजना में डूब क्षेत्र भूमि को तहत 63 हजार 500 रुपए का मुआवजा दिलवाकर राज्य सरकार को हानि पहुंचाई है। महानिदेशक ने बताया कि ब्यूरो ने इस बाबत मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश की तथा नारायण सिंह, रामप्रसाद शर्मा एवं श्योजीराम के खिलाफ फरवरी,1999 में न्यायालय, विशिष्ट न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जयपुर में चालान पेश किया था। न्यायाधीश ने ट्रायल के बाद नारायण सिंह, रामप्रसाद शर्मा एवं श्योजीराम को एक-एक वर्ष का कठोर कारावास व अर्थ दंड की सजा सुनाई है।

जूता बनाने वाले का बेटा बना टॉपर.

पाई-पाई की मोहताज मेहनतकश माता-पिता की होनहार संतान कमलेश कुमार ने 12वीं कला वर्ग में राजस्थान टॉप कर यह दिखा दिया है कि प्रतिभा अभावों के आगे नहीं झुकती। कमलेश के घर की हालत बेहद नाजुक हैं और उसके पिता जूते बनाकर जैसे-तैसे परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। स्थिति यह थी कि इस होनहार छात्र के पास आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए पैसे और संसाधन तक नहीं थे। ऐसे में उसकी मदद विद्यालय के निदेशक अमर सिंह ने की और इसे नि:शुल्क प्रवेश देने के साथ पुस्तकें भी मुहैया करवाई। अमर सिंह ने बताया कि कमलेश कुमार पुत्र बाबू लाल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से इसे पिछले साल 4 जुलाई को उन्होंने नि:शुल्क एडमीशन दिया। हॉस्टल में भी नि:शुल्क रखा। यहां तक कि एक साल में जब कमलेश विद्यालय घर जाने का किराया भी दिया। कमलेश के पिता चमड़े की जूती बनाने और उसकी मां उन पर कशीदा काढ़ने का काम कर परिवार का पेट पालते हैं। घर की बिगड़ी आर्थिक स्थिति के चलते कमलेश के बड़े भाई की 11वीं के बाद पढ़ाई छूट गई। स्कूल प्रशासन के अनुसार छात्र काफी प्रतिभाशाली है, लेकिन घर की आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई में बाधा बन सकती है। कमलेश को आर्थिक मदद की जरूरत है।

Wednesday, June 10, 2009

सर्वोच्च न्यायालय ने विवाहित महिला के प्रेमियों को सावधान किया

सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले में एक विवाहित महिला के प्रेमी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए ऐसे प्रेमियों को सावधान किया है। अदालत ने प्रेमी को विवाहित महिला के पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी ठहराया है। 
न्यायमूर्ति मुकुंदम शर्मा और न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान की अवकाशकालीन खंडपीठ ने आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गुंटूर निवासी दामू श्रीनू को सुनाई गई तीन साल के कारावास की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है।
28 मई को सुनाए गए और मंगलावार को जारी किए गए फैसले के अनुसार श्रीनू का अपने पड़ोसी बित्रा नागार्जुन राव की पत्नी के साथ प्रेम संबंध था। इसके कारण राव ने 8 जून 1996 को आत्महत्या कर ली थी। 
राव को अपनी पत्नी पर श्रीनू के साथ संबंध होने का शक हुआ तो उसने अपनी पत्नी से इस बारे में सवाल किया। इसे लेकर दोनों के बीच लड़ाई हुई। 
राव ने अपने ससुर को बुलाकर पत्नी को ले जाने के लिए कहा ताकि उसका मन बदल जाए। लेकिन श्रीनू 1 जनवरी 1996 को राव के घर आया और उसने राव की पत्नी के साथ अपने संबंधों की बात स्वीकार कर ली। उसने यह भी कहा कि जब तक वह महिला उसे नहीं छोड़ देती तब तक वह उसके साथ संबंध बनाए रखेगा। 
राव की आत्महत्या के बाद मामला पुलिस के पास पहुंचा तो उसने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया। एक दंडाधिकारी की अदालत ने दोनों को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। बाद में सत्र अदालत ने दोनों की सजा को घटा कर तीन-तीन साल कर दिया। 
उसके बाद आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने महिला की सजा को घटा कर एक साल कर दी लेकिन श्रीनू के तीन साल के कारावास की सजा को बरकरार रखा। 
अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी है।

शीतल मफतलाल को जमानत

अघोषित ५१ लाख के सोने और हीरो के आभूषणों के साथ यात्रा करने के आरोप में गिरफ्तार सोशलाईट और उद्योगपति अतुल्य मफतलाल की पत्नी शीतल मफतलाल को मुंबई की एक अदालत ने आज पांच लाख रूपये की जमानत दे दी।
३७वीं महानगरीय अदालत ने जमानत देते हुए शीतल को एक महीने तक हर सोमवार और गुरूवार को जांच एजेंसी के समक्ष पेशी देने और अदालत की अनुमति के बगैर देश न छोडऩे का आदेश दिया।
शीतल को रविवार को मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग ने गिरफ्तार किया था।
उनकी जमानत अर्जी पर कल सुनवाई नहीं हो सकी थी क्योंकि अभियोजन पक्ष ने अदालत से अर्जी पर अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। इसके बाद अदालत ने शीतल को न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था।

गवाहों को सुरक्षा देना बेहद जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा है कि आपराधिक न्याय प्रशासन को सच बनाने के लिए देश मे गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की अति आवश्यकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ अंबिकापुर में गवर्नमेंट ग‌र्ल्स कालेज की छात्रा को कैम्पस में जीप से कुचल कर मार डालने के मामले में घटना की चश्मदीद गवाह साथी छात्राओं के अदालत में बयान से मुकर जाने पर गवाहों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पीठ ने रिकार्ड पर आए चश्मदीद गवाहों के बयानों में झलकते भय का जिक्र किया है। एक छात्रा ने तो गवाही के बाद रोते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उसे दोबारा गवाही के लिए न बुलाया जाए क्योंकि वह पूरे साल परेशान रही है। कोर्ट ने कहा कि छात्रा का दर्द समझा जा सकता है। उसके बयानों को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि सच न बोलने के लिए उस पर कितना दबाव था। कोर्ट ने कहा कि अगर आपराधिक न्याय प्रशासन को सच्चाई बनाना है तो देश में गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की बहुत जरूरत है। पीठ ने कहा कि यह मामला गवाहों को अभियुक्त की धमकियों से सुरक्षित नहीं कर पाने के आपराधिक न्याय प्रशासन की खामी का एक बड़ा उदाहरण है। दुर्भाग्य की बात है जिन मामलें में प्रभावी लोग शामिल होते हैं उनमें सामान्यत: भय और दबाव के कारण गवाह सामने नहीं आते। 

कोर्ट ने इस मामले में जीप चालक समरविजय सिंह की सजा पर मुहर लगा दी है। लेकिन जीप में बैठे बाकी के तीन अन्य साथी अभियुक्तों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि यह सिद्ध नहीं होता है कि इन तीनों का समर विजय सिंह के साथ अपराध में शामिल होने का सामान्य आशय था। 

मामला वर्ष 1998 का है। बीए की छात्रा कुमारी प्रीती अपनी सहेलियों के साथ कैम्पस में बैठी थी। तभी एक जीप कैम्पस में घुसी जिसने प्रीती के बैग व टिफिन बाक्स को कुचल दिया। प्रीती ने बैग और टिफिन के टूटने पर जीप के सामने खडे़ होकर अभियुक्तों से नुकसान की भरपाई की मांग की। अभियुक्तों ने कहा कि अगर वह रास्ते से नहीं हटी तो वह उस पर जीप चढ़ा देंगे। प्रीती नहीं हटी, जिस पर समरविजय ने प्रीती पर जीप चढ़ाई और वह गिर गई। बाद में समर ने जीप को पीछे किया और फिर तेजी से आगे लाकर प्रीती के सिर पर से जीप गुजार दी। इसके बाद सभी अभियुक्त फरार हो गये। सत्र अदालत व हाईकोर्ट ने जीप पर सवार सभी अभियुक्तों को हत्या के जुर्म में दोषी ठहरा कर सजा सुनाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समरविजय को छोड़ कर बाकी को बरी कर दिया है।

लोकल चेक की राशि एक दिन में मिले

जोधपुर. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बार फिर देश की सभी कॉमर्शियल बैंकों को स्पीड क्लियरिंग के माध्यम से लोकल चेक एक ही दिन में क्लियर कर राशि खाते में जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि बैंक अधिकारियों को इसका सीधा और सरल तरीका समझ में नहीं आ रहा। 

वर्तमान में तीन से चार दिन बाद चेक क्लियरिंग हो पाते हैं। उधर, बैंकों की चिंता इस बात को लेकर है कि एक दिन में चेक की राशि ग्राहकों के खाते में डाल दे तो चेक रिटर्न होने की स्थिति में उनके सामने संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि तमाम कानूनी प्रावधानों के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में चेक बाउंस होते हैं। इसके बावजूद अधिकारी कोई रास्ता निकालने में जुटे हैं ताकि रिजर्व बैंक के निर्देशों की पालना भी हो जाए।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के समक्ष वर्ष 2006 में आए मामले में सुनवाई के बाद कमीशन ने 27 अगस्त, 2008 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को लोकल व बाहरी चेकों के तुरंत भुगतान से संबंधित निर्देश जारी किए थे। निर्देशों के बावजूद बड़े शहरों में लोकल क्लियरिंग की जमा में 4 से लेकर 10 दिन तक का समय लगता रहा है। जोधपुर में तीसरे दिन क्लियरिंग जमा हो पाती है। 

बैंकों में स्थानीय व बाहरी चेक दोपहर 3 बजे तक निकाल कर उनकी लिस्टिंग की जाती है। दूसरे दिन सुबह उन्हें स्टेट बैंक स्थित क्लियरिंग हाउस भेज दिया जाता है। जिन बैंकों की एक से अधिक शाखाएं हैं उनकी क्लियरिंग मुख्य शाखा अथवा सेवा शाखा के माध्यम से भेजी जाती है।

आठवीं बोर्ड में 11 शिक्षकों को जीरो

भीलवाड़ा. आठवीं बोर्ड में जिले के 11 शिक्षकों का परिणाम शून्य रहा है। इसमें छह प्रधानाध्यापक भी शामिल हैं। 33 शिक्षकों का परिणाम 21 से 30 प्रतिशत के बीच रहा है। स्कूलों में संविदा पर कार्यरत विद्यार्थी मित्र व कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को रिजल्ट कम रहने पर होने वाली कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा गया है। शिक्षा विभाग तीस प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर उपनिदेशक को भेजेगा। 

16 द्वितीय श्रेणी के अध्यापकों का परिणाम तीस प्रतिशत से कम रहा है। इन शिक्षकों के खिलाफ उपनिदेशक कार्यालय अजमेर द्वारा कार्रवाई की जाएगी। कम परिणाम देने वालों का तबादला, चार्जशीट, सर्विस बुक में एंट्री, नोटिस सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

शिक्षा विभाग प्रारंभिक के अनुसार सहाड़ा के मालीखेड़ा स्कूल में कार्यरत प्रधानाध्यापक अर्चना सोनगर, भैरूखेड़ा कोटड़ी के सीताराम कुम्हार, भभाणा मांडल के भगवतसिंह चुंडावत, बागजड़ा मांडल के रामप्रसाद, कायमपुरा शाहपुरा के जयदीपसिंह बड़गुर्जर व मंडोल रायपुर यूपीएस की सरोज यादव का परिणाम शून्य रहा है। भैरूखेड़ा कोटड़ी में कार्यरत कृष्णमुरारी वैष्णव, भभाणा मांडल के शिवदयाल ओझा, बागजड़ा के ओमप्रकाश, कायमपुरा शाहपुरा के रामसिंह मीणा व मंडोल रायपुर की विद्या टांक का परिणाम शून्य रहा है।

पन्नाधाय योजना पर स्टे

उदयपुर. शहर में चर्चा का विषय रही नगर विकास प्रन्यास की पन्नाधाय नगर आवासीय योजना में 800 भूखंडों के आबंटन पर अदालत ने मंगलवार को अस्थायी निषेधाज्ञा के आदेश जारी किए। सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ खंड शहर दक्षिण (ग्रीष्मकालीन विशेष न्यायालय) ने प्रन्यास प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 15 जुलाई को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखें। पत्रकार कोटे के आवेदक का प्लॉट निरस्त न करें। अदालत ने 800 भूखण्डों की आवासीय योजना पर यथास्थिति के आदेश दिए।

विवाद का कारण

यूआईटी की बलीचा में प्रस्तावित दक्षिण विस्तार योजना में पत्रकार वर्ग से भारत भूषण ओझा ने आवेदन किया था। प्रन्यास ने 12-13 जनवरी 2009 को निकाली गई लॉटरी में पत्रकार कोटे में 17 आवेदकों को चुना। उक्त स्कीम में 1000 वर्गफीट प्लॉट योजना में 11 पत्रकार, 1800 वर्गफीट प्लॉट में 4 पत्रकार तथा 2400 वर्गफीट प्लॉट में 2 पत्रकारों का चयन किया गया। 

परिवादी को प्लॉट नंबर आबंटित कर दिए गए। उसी दौरान कुछ लोगों ने प्रन्यास सचिव को आपत्ति दर्ज कराई की पत्रकार कोटे के प्लॉट अधिस्वीकृत पत्रकारों को ही दिए जाने चाहिए। प्रन्यास सचिव ने स्थानीय निकाय निदेशालय पत्र लिखकर इस संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा था। निदेशालय ने सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत पत्रकारों को ही प्लॉट आबंटन का पात्र माना। निदेशालय से मिले निर्देश की पालना में प्रन्यास कार्यालय ने 22 जून को पत्रकार कोटे में सभी भूखण्ड आबंटियों को नोटिस देकर अधिस्वीकरण प्रमाणपत्र पेश करने के आदेश दिए।

उक्त नोटिस को लेकर कथित पत्रकार ओझा ने नगर विकास प्रन्यास प्रशासन के खिलाफ 5 जून को अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थनापत्र पेश किया। प्रार्थनापत्र में बताया गया कि प्रन्यास ने भूखंड आबंटन के लिए जो फार्म बेचे थे उनमें अधिस्वीकृत पत्रकार की शर्त नहीं थी। परिवादी ने अतिरिक्त निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के 21 जून 2007 को जारी पत्र भी अदालत में पेश किया जिसमें पत्रकारों को आवास आबंटन के लिए अधिस्वीकृत होना जरूरी नहीं माना गया है।

Friday, June 5, 2009

राजस्थान उच्च न्यायालय में 28 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश

राजस्थान उच्च न्यायालय में एक जून से 28 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। इस अवधि के लिए जोधपुर एवं जयपुर पीठ के लिए अवकाशकालीन न्यायाधीशों का मनोनयन किया गया है। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रशासन) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्य पीठ जोधपुर में एक से 10 जून तक न्यायमूर्ति सी.एम. तोतला, 11 से 20 जून तक न्यायमूर्ति एस.आर. लोढ़ा तथा 21 से अवकाश समाप्ति तक न्यायमूर्ति डी.एन. थानवी अवकाशकालीन न्यायाधीश का कार्य देखेंगे। इसी प्रकार जयपुर पीठ में एक से 10 जून तक न्यायमूर्ति एम.सी. भगवती, 11 से 20 जून तक न्यायमूर्ति के.एस. चौधरी तथा 21 जून से अवकाश समाप्ति तक न्यायमूर्ति एम.एन.भण्डारी अवकाशकालीन न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे।

Monday, June 1, 2009

राजस्थान बार कौंसिल द्वारा हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव

राजस्थान बार कौंसिल ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर वरिष्ठतम न्यायाधीश को नियुक्त करने तथा उनकी नियुक्ति कम से कम एक वर्ष रखने का प्रस्ताव 31 मई को कौंसिल की साधारण सभा में पारित किया है। इस बारे में एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर प्रतिवेदन सौंपेगा। इस बारे में राष्ट्रपति को भी प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कौंसिल को इस बारे में पूर्व में सूचित किया जाए। इस साधारण सभा में बार कौंसिल ऑफ इंडिया के कार्यवाहक अध्यक्ष जयराम बेनीवाल तथा राजस्थान बार के उपाध्यक्ष मनीष सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लिया।

सभा में कौंसिल के इस वर्ष होने वाले चुनाव में धरोहर राशि 8 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने, अधीनस्थ न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए मुख्य न्यायाधीश से निवेदन करने का निर्णय भी हुआ। बैठक में इसके अलावा भी कई मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ।

राजस्थान अधिवक्ता कल्याण कोष की न्यासी समिति एवं बार कौंसिल ऑफ इंडिया एडवोकेट्स वेलफेयर फंड की बैठक भी 31 मई को हुई। इसमें अधिवक्ताओं के मृत्यु, बीमारी आदि दावों का निस्तारण कर करीब 4 लाख रुपए के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई। नासिर अली नकवी की अध्यक्षता में संपन्न सभा में बार एसोसिएशन किशनगढ़ (अजमेर) के अधिवक्ताओं द्वारा अधिवक्ता कल्याण कोष के टिकट लगाए बिना वकालतनामे पेश करने को गंभीरता से लेते हुए आगे से ऐसा न करने को कहा गया। किशनगढ़ से आए बार के प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन माजवी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में इसका ख्याल रखा जाएगा।