पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Saturday, December 12, 2009

पंचायतों में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा न हो-राजस्थान हाईकोर्ट


राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव के लिए समानान्तर (क्षितिज) आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय करते हुए राज्य सरकार, झुंझुनूं कलक्टर व जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से चार सप्ताह में जवाब-तलब किया है। साथ ही, कहा कि पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण प्रक्रिया भले ही जारी रहे, लेकिन उसे अदालत की मंजूरी बिना अंतिम रूप नहीं दिया जाए।  न्यायाधीश आर.सी. गांधी व महेश भगवती की खण्डपीठ ने झुंझुनूं जिले के सीताराम शर्मा की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। प्रार्थीपक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि सरकार ने पंचायत राज कानून में संशोधन कर महिला आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है और 21 से 35 वर्ष तक के युवाओं को भी सीट आरक्षित की हैं। झुंझुनूं जिला परिषद व कुछ पंचायत समितियों का हवाला देकर बताया कि इस बढ़ोतरी से कुल आरक्षण 77.14 फीसदी से अधिक हो गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय कर चुका है। आरक्षण में इस बढ़ोतरी का कोई तार्किक कारण भी नहीं बताया गया है। इस आरक्षण के बाद अधिकारी- कर्मचारी जनता पर हावी हो जाएंगे।
आरक्षण बढ़ोतरी के लिए संशोधन को असंवैधानिक करार दिया जाए। पंचायतों में जाति, लिंग व आयु के आधार पर कुल आरक्षण 50 फीसदी से अधिक करने व महिलाओं को श्रेणीवार 50 फीसदी आरक्षण पर पाबंदी लगाई जाए, याचिका पर निर्णय होने तक पंचायत चुनाव में नए पंचायत राज कानून पर अमल नहीं किया जाए।
शहरी निकाय आरक्षण के मामले से सम्बंघित 17 सितम्बर 09 का अंतरिम आदेश इस मामले में भी लागू किया जाए। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव, पंचायत राज सचिव, झुंझुनूं कलक्टर व झुंझुनूं जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चार सप्ताह में जवाब दें।


तेलंगाना मामले में वकील आपस में उलझे


आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के परिसर में शुक्रवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के मसले पर वकीलों के दो समूह उलझ गए। न्यायालय मे विवाद उस समय ख़डा हुआ जब वकीलों के दोनों समूहों में बहसबाजी तेज हो गई। एक समूह तेलंगाना के गठन के प्रस्ताव का विरोध कर रहा था और इसी समूह की झडप तेलंगाना समर्थक वकीलों से हुई।
आंध्र उच्च न्यायालय का परिसर "जय तेलंगाना" और "जय आंध्र" के नारों से गुंज उठा। इसके बाद दोनों समूहों में मारपीट शुरू हो गई। इस झ़डप में कुछ वकीलों को चोटे आई। पुलिस ने दखल देते हुए स्थिति पर काबू पाया। न्यायालय के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया ताकि कोई बाहरी दाखिल न हो सके। गौरतलब है कि तेलंगाना राज्य के गठन के समर्थन में चल 11 दिनों के विरोध प्रदर्शन में इस क्षेत्र के वकीलों ने भी भाग लिया था।

मंजूनाथ के हत्यारे को अब फांसी नहीं उम्रकैद की सजा


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चार साल पहले मारे गए इंडियन आयल कॉर्पोरेशन के अधिकारी मंजूनाथ की हत्या के लिए दोषी पाए गए मोनू मित्तल की फांसी की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया है और दो अन्य लोगों को रिहा करने के आदेश दिए हैं. कर्नाटक निवासी मंजूनाथ शणमुघम इंडियन आयल कॉर्पोरेशन के सेल्स मैनेजर थे. अब से चार साल पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुरखीरी में उनकी हत्या हो गई थी.

मंजूनाथ आईआईएम लखनऊ के छात्र रहे थे. आईआईएम के छात्रों और मीडिया ने मंजूनाथ की हत्या के मामले को तब काफी उछाला था और कहा गया था कि उनकी ईमानदारी के कारण उनकी जान गई थी. मंजुनाथ ने लखीमपुर खीरी में एक पेट्रोल पम्प पर मिलावटी तेल बेचे जाने का पर्दाफाश किया था.इस पेट्रोल पम्प के मालिक का नाम पवन कुमार मित्तल उर्फ़ मोनू मित्तल था. मंजूनाथ की हत्या 19 नवम्बर 2005 को गोली मारकर तब कर दी गयी थी जब वो मिलावटी पेट्रोल का नमूना लेने पेट्रोल पंप पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसे उदाहरण पहले से मौजूद हैं कि जिन्हें उम्रक़ैद की सज़ा मिली हो और अगर उसकी तामील न हुई हो और काफी वक़्त गुज़र गया हो तो उसे उम्र क़ैद की सज़ा में बदल दिया जाता है क्यूंकि तबतक दोषी व्यक्ति काफी मानसिक प्रताड़ना भुगत चुका होता है.

मंजूनाथ की हत्या के अभियुक्तों ने मंजुनाथ के शव को कार के पीछे की सीट पर रखा और अपने दो सहयोगियों से कहा कि वो इसे सीतापुर की नहर में ठिकाने लगा दें लेकिन इससे पहले कि वो ऐसा कर पाएं, उनके दुर्भाग्य से उधर से पुलिस की गाड़ी गुज़री जो उस वक़्त तड़के गश्त लगा रही थी. उसे देखकर अभियुक्तों के हाव भाव बदल गए और वो भागने की फ़िराक में लग गए जिसके बाद पुलिस की गाड़ी ने उनका पीछाकर उन्हें शव के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया.

इस मामले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ 15 फ़रवरी, 2009 को चार्जशीट दायर किया गया  अदालत ने तब अपने फैसले में मोनू मित्तल को फांसी की सज़ा सुनाई थी जबकि उनके दूसरे सहयोगियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

नियमानुसार फांसी की सज़ा की पुष्टि हाईकोर्ट द्वारा होती है. हाईकोर्ट ने अब मुख्य अभियुक्त मोनू मित्तल की फांसी की सज़ा को उम्रक़ैद में बदल दिया है. पीड़ित परिवार और मंजूनाथ ट्रस्ट के वकील आईबी सिंह का कहना है कि अदालत के फ़ैसले में यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के ऐसे दूसरे मामलों में फैसलों के अनुकूल है.

आई बी सिंह ने कहा कि " सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसे उदाहरण पहले से मौजूद हैं कि जिन्हें उम्र क़ैद की सज़ा मिली हो और अगर उसकी तामील न हुई हो और काफी वक़्त गुज़र गया हो तो उसे उम्रक़ैद की सज़ा में बदल दिया जाता है क्यूंकि तब तक दोषी व्यक्ति काफी मानसिक प्रताड़ना भुगत चुका होता है."

अदालत ने इस मामले में दो और अभियुक्तों को बरी कर दिया है. मंजुनाथ के परिवारवालों का कहना है कि वो इस फ़ैसले से संतुष्ट हैं.

Thursday, December 10, 2009

आसाराम बापू की प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज


गुजरात उच्च न्यायालय ने आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू की उस याचिका को आज खारिज कर दिया जिसमें उन पर हत्या के प्रयास के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी !
न्यायाधीश अकील कुरैशी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि गोलीबारी की घटना हुई थी जिसका मुकदमा बनता है और न्यायालय पुलिस को इसकी जांच से रोक नहीं सकता !
पुलिस ने आसाराम बापू के आश्रम के पूर्व सचिव राजू चांडक की शिकायत पर आसाराम बापू और दो अन्य लोगों के खिलाफ धारा 307. 120 बी. 154 और उपधारा 25.1. के तहत मामला दर्ज किया था1 चांडक को पांच दिसम्बर की रात साबरमती इलाके में गोली मारी गई थी1 उन्होंने अगले दिन आध्यात्मिक गुरु के खिलाफ मामला दर्ज कराया था !
चांडक ने आश्रम के दो छात्रों दीपक और अभिषेक की मौत के मामले में आसाराम बापू के खिलाफ बयान दिया था !  इन दोनों छात्रों के शव उनके लापता होने के एक दिन बाद आश्रम के नजदीक साबरमती नदी में मिले थे !  इसके बाद आश्रम में कथित तांत्रिक गतिविधियों की खबरें सामने आईं जिसके बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए !
आसाराम बापू के वकील बी एम गुप्ता ने प्राथमिकी रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि चांडक की ईमानदारी संदेहजनक है क्योंकि उनसे आश्रम की सम्पत्ति हड़पने की कोशिश की थी ! उन्होंने कहा कि चांडक की हत्या की साजिश रचने में आसाराम बापू की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं हैं !
सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चांडक की हत्या की साजिश रची गई थी और पुलिस को इसकी जांच करने से नहीं रोका जाना चाहिए ! उन्होंने कहा कि चांडक ने आश्रम में छात्रों की मौत के मामले की जांच कर रहे डी के त्रिवेदी आयोग के समक्ष आसाराम बापू और आश्रम के अन्य अधिकारियों के खिलाफ गवाही दी थी1 इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चांडक पर हमले की साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता और इसलिए प्राथमिकी रद्द करने की याचिका को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए !

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा वेश्यावृत्ति रोक नहीं सकते तो उसे मंजूरी क्यों नहीं देते?


वेश्यावृत्ति रोक नहीं सकते तो उसे कानूनी मंजूरी क्यों नहीं देते? सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम सवाल केंद्र सरकार से पूछा है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि तमाम बंदिशों के बाद भी वेश्यावृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही। चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का ये नजरिया सामने आया। हालांकि सुप्रीमकोर्ट की इस टिप्पणी पर दो अलग-अलग राय है। कुछ लोगों की राय में वैधानिक मान्यता इसका समाधान नहीं है।

अदालत ने कहा कि आप इसे दुनिया का सबसे पुराना पेशा मानते हैं। इसलिए अगर कानून के जरिए इसे रोकना संभव नहीं तो इसे कानूनी मंजूरी ही दे दो। इस तरह कम से कम इस धंधे पर निगरानी तो रखी जा सकेगी। सेक्स वर्कर्स को पुनर्वास और चिकित्सकीय सुविधा देना आसान होगा। अदालत की इस टिप्पणी पर सॉलिसीटर जनरल ने भरोस दिलाया कि इस पर गौर किया जाएगा।

अदालत में ये बहस बचपन बचाओ आंदोलन की याचिका पर चल रही थी। सुनवाई के दौरान चाइल्ड सेक्स वर्कर्स का जिक्र आया और बहस इस दिशा में मुड़ गई। हालांकि एक बड़ा तबका इस धंधे को कानूनी मंजूरी दिए जाने के खिलाफ है।

आपराधिक छवि वालों को पुलिस में नौकरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने अपराधिक मामलों में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों को राजस्थान पुलिस विभाग में कांस्टेबल सहित किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य करार दिया है और इस संबंध में राजस्थान सरकार द्वारा 1995 में जारी किए गए परिपत्र को वैध माना है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को यह महत्वपूर्ण फैसला राजस्थान राज्य बनाम मोहम्मद सलीम सिविल अपील मामले पर दिया। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने 24 अप्रेल, 1995 को एक परिपत्र जारी कर उपद्रव और अन्य आपराधिक मामलों में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में लिप्त व्यक्तियों को पुलिस विभाग में नियुक्ति के लिए अयोग्य करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को उपर्युक्त मामले में अंतिम सुनवाई कर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324, 325, 326, 302, 307 के अंतर्गत आपराधिक मामलों में लिप्त व्यक्तियों को पुलिस विभाग में कांस्टेबल सहित किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य ठहराने संबंधी राजस्थान सरकार के परिपत्र को वैध माना। इस मामले में राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी ने पैरवी की।

Monday, December 7, 2009

कॉजलिस्ट पर सीजे का ही नियंत्रण रहेगा-राजस्थान उच्च न्यायालय


राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला व न्यायाधीश प्रकाश टाटिया की खण्डपीठ ने निर्धारित किया है कि उच्च न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई के लिए बनने वाली कॉजलिस्ट पर मुख्य न्यायाधीश का ही नियंत्रण रहेगा। न्यायालय में मुकदमों को लिस्ट में लगाने सम्बंधी आदेश अन्य न्यायाधीश पारित नहीं कर सकता।

इसके साथ ही खण्डपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ बचाओ संघर्ष समिति व दोनों हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों की ओर से दायर विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए इस सम्बंध में एकलपीठ द्वारा 17 अगस्त 09 को पारित आदेश को अपास्त कर दिया। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने हर माह के अंतिम कार्य दिवस पर मुख्यपीठ में होने वाली हडताल के दिन मुख्यपीठ में मुकदमों की कॉजलिस्ट आम दिनों की तरह नहीं बनाए जाने को लेकर उच्च न्यायालय प्रशासन से जवाब तलब किया था। एकलपीठ के आदेश के विरूद्ध बार एसोसिएशनों की ओर से अलग-अलग विशेष अपीलें दायर की गई थी।

Sunday, November 29, 2009

हाईटेक होगा दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट हाईटेक होने वाला है। 8 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट देश का पहला ऐसा कोर्ट बन जाएगा, जहां कागज रहित [पेपरलेस] काम होता दिखेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जस्टिस रविंद्र भट्ट की अदालत देश की पहली ई-कोर्ट का रुतबा हासिल करेगी।

तीन चरणों में हाईकोर्ट के जज और वकील समेत बाबू-सहायक भी हाईटेक हो जाएंगे। ई-कोर्ट के साथ ई-फाइलिंग प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यहां तक कि आने वाले दिनों में देश-दुनिया में कहीं से भी कोर्ट की कार्यवाही को घर बैठे देख पाना भी मुमकिन हो जाएगा।

गुरुवार को हाईकोर्ट कंप्यूटर कमेटी के अगुवा जस्टिस बदर दुरेज अहमद ने खुलासा किया कि दिसंबर से पेपरलेस ई-कोर्ट की कार्यवाही शुरू होगी। यह पहला चरण होगा, जज के सामने मेज पर बड़े कंप्यूटर मानीटर पर सूचनाओं को टच-स्क्रीन के जरिए देखा सुना जाएगा। केस नंबर या नाम को स्क्रीन पर छूते ही पूरी फाइल खुल जाएगी। ऐसे में कागज की मोटी फाइल के पन्नों को बार-बार पलटने से छुटकारा मिलेगा। कोर्टरूम में बैठे लोगों को बड़े स्क्रीन पर सब दिखेगा। वकील अपने लैपटाप के जरिए केस पर लिखित दलील के साथ बहस कर सकेंगे। हालांकि कंप्यूटर का प्रयोग वकीलों की मर्जी पर निर्भर करेगा।

न्यायमूर्ति अहमद ने बताया कि दूसरे चरण में ई-फाइलिंग प्रक्रिया होगी। कोई भी कहीं से बैठकर ई-मेल के जरिए केस फाइल कर सकेगा। जरूरी यह होगा कि शिकायतकर्ता केस फाइल में दर्ज दस्तावेजों को स्वयं सत्यापित करे या ओथ कमिश्नर के सामने सत्यापित कराए। जस्टिस अहमद ने बताया कि ई-फाइलिंग के लिए शपथपत्र, वकालतनामा और कागजी दस्तावेजों पर स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षर करने की जरूरत पड़ेगी। कोर्ट फीस या प्रोसेस फीस के लिए आन लाइन भुगतान करना होगा। इसके लिए दिल्ली सरकार को ई-स्टैंप, आन लाइन स्क्रूटनी और सत्यापन का प्रावधान करना होगा, जिससे ई-केस फाइल हो सके। इसमें एक-दो साल लगेगा। तब तक कागजी प्रक्रिया के साथ ई-फाइलिंग में सीडी, डीवीडी या पीडीएफ में फाइलिंग संभव हुआ करेगी।

जस्टिस बदर दुरेज अहमद ने बताया है कि हाईकोर्ट परिसर में विभिन्न जगहों पर दिखने वाला फाइलों का अंबार ठिकाने लगाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में केस फाइलों से जुड़े पांच करोड़ 56 लाख पन्नों को कंप्यूटर की मदद से डिजिटलाइज किया जा चुका है। एक लाख पन्ना प्रतिदिन डिजिटल हो रहे हैं। अगले दो वर्षो में लगभग सारे काम कंप्यूटर पर हुआ करेंगे और कागज के रिकार्ड को सहेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

नाबालिग की शादी अमान्य करार


पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में 18 वर्ष से कम उम्र की एक लड़की की शादी को ‘अमान्य' करार दिया और लड़के को सुरक्षा देने से इंकार कर उसे ‘भगोड़ा' कहा।
न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन ने शुक्रवार को दिए अपने फैसले में उन लोगों के खिलाफ कानूनन ‘उपयुक्त कार्रवाई' करने को कहा जो ‘इस मामले में बाल विवाह कराने के जिम्मेदार हैं।' अदालत ने विवाह कराने वाले पुरोहित के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया।
पंजाब के पटियाला जिले के पातरां शहर की 16 वर्षीय लड़की और एक बालिग लड़के ने इस वर्ष 21 अक्तूबर को मोहाली के गुरु नानक गुरुद्वारे में शादी की थी। शादी के लिए लड़की के परिजन राजी नहीं थे और यह अंतरजातीय विवाह था।
लड़की के पिता ने 21 अक्तूबर को पातरां पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पड़ोस का एक लड़का ‘उनकी लड़की को शादी की नीयत से बहला फुसला कर ले गया है। इसमें लड़के की मां जसबीर कौर और पिता लक्खा सिंह की भी मिलीभगत है।' युगल ने शादी के छह दिन बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दी और लड़की के अभिभावकों की ओर से कथित तौर पर मिल रही धमकी के कारण सुरक्षा की मांग की।
न्यायमूर्ति जैन ने दोनों की शादी को बाल विवाह निरोधक अधिनियम 2006 के तहत ‘अमान्य' करार दिया।

गैर लाइसेंसी सूदखोर मामला दर्ज नहीं करा सकते : बम्बई हाईकोर्ट


बम्बई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि गैर लाइसेंसधारी सूदखोर कर्जदार से कर्ज की अदायगी के तौर पर मिला चेक बाउंस होने की स्थिति में फौजदारी अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। बम्बई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ में पिछले सप्ताह न्यायमूर्ति पी आर बोरकार ने कहा बिना लाइसेंस के सूद पर पैसा देने से संबंधी कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति कर्ज वसूली के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता ।
अहमदाबाद स्थित अनिल कटारिया ने परकाम्य लिखित अधिनियम :नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट: के तहत चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। कटारिया के अनुसार उन्होंने अक्तूबर 2004 में पुरूषोत्तम कावने को चार लाख रूपये का कर्ज दिया था। इसी के भुगतान के लिए कावरे ने मार्च 2005 में उन्हें :कटारिया को: चेक दिया लेकिन यह बाउंस कर गया।
कटारिया ने इस मामले में परकाम्य लिखित अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया लेकिन कावरे के वकील ने दलील दी कि कटारिया बिना लाइसेंस के यह कारोबार कर रहे हैं और दस अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करा चुके हैं।

धोखाधडी मामला : महिला सरपंच को जेल


राजस्थान में अलवर जिले के ब्यावरा के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कपिल सोनी ने धोखाधडी के आरोप में ग्राम पंचायत परसुलिया की महिला सरपंच को न्यायिक हिरायत में कल जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार ग्राम पंचायत परसुलिया की सरपंच गीताबाई दांगी ने ग्राम के किसानों की ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों के बदले में शासन से मिलने वाले मुआवजा राशि के 21 हजार रूपए के चार चेक फर्जी व्यक्तियों को दे दिए थे। इस मामलें में शिकायत व्यावरा के तत्कालीन तहसीलदार आर के श्रीवास्तव ने थाने में दर्ज कराई थी।

ग्राम पंचायत परसुलिया की महिला सरपंच को पुलिस ने धोखाधडी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भोपाल जेल दिया गया।

बोरवेलों पर ढक्कन लगाकर बच्चों को बचाओः सुप्रीम कोर्ट


हाल के वर्षों में बच्चों के लिए जानलेवा बन चुके बोरवेलों की हालत पर चिंतित उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों से उन पर ढक्कन लगाना सुनिश्चित करने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश के जी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति बीएस चौहान और केएस राधाकृष्णन की पीठ ने इन घटनाओं को रोकने के लिए राज्यों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों के बारे में भी जवाब दाखिल करने को कहा है। इस सिलसिले में 13 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने के कारण वरीष्ठ अधिवक्ता और न्यायालय मित्र परमजीत सिंह पटवालिया द्वारा अदालत को इसकी जानकारी देने पर पीठ ने आज यह निर्देश जारी किया गया।

न्यायालय ने केंद्र, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों से इस बारे में जवाब मांगा है। हाल के बरसों में इन्हीं राज्यों में यूं ही छोड़ दिए बोरवेलों में बच्चों के गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं और यहां तक कि बचाव कार्य में सेना तक की मदद लेनी पड़ी। हरियाणा के कुरूक्षेत्र में वर्ष 2006 में ऐसे ही एक बोरवेल में गिरने वाले प्रिंस को बचाने में सेना को दो दिन लग गए थे।

गुजरात हाईकोर्ट में टीवी पर दिखेगी कार्यवाही


गुजरात हाईकोर्ट सूचना क्रांति से कदम मिलाते हुए शीघ्र ही अपनी सभी 33 अदालतों की आंशिक कार्यवाही एलसीडी टीवी पर लाइव करने जा रहा है। मतलब अब अधिवक्ताओं व मुवक्किलों को यह पता लगाने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा कि उनका केस किस अदालत में चल रहा है अथवा चलेगा।

उच्च न्यायालय के कंप्यूटर विभाग सूत्रों के अनुसार के यह सब एलसीडी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके तहत अदालत परिसर में 32 इंच की एलसीडी लगाईं जानी हैं ताकि इसकी स्क्रीन पर डिस्प्ले होने वाली सूचना सभी आवश्यक लोग पढ़ सकें। एलसीडी के संभावित स्थानों में एडवोकेट-रूम, बार रूम, कैंटीन, लाइब्रेरी, सभी लॉबी एवं लेडीज रूम सहित 60 स्थानों को चिह्नित किया गया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट का ट्रायल हो चुका है जो सफल रहा है। सब कुछ योजनानुसार चला तो शीघ्र ही एलसीडी परियोजना साकार हो जाएगी।

विभाग सूत्रों के अनुसार एलसीडी पर विभिन्न अदालतों में बोर्ड पर चल रहे मामले, इनके वकील, बोर्ड पर आने वाले अगले केस का नंबर/ ब्योरा, इनके अधिवक्ता एवं कौन से न्यायाधीश किस मामले पर संज्ञान लेंगे आदि जानकारी बड़े-बड़े और रंगीन टेक्स्ट में प्रदर्शित की जाएगी ताकि आसानी से लोगों का ध्यान आकर्षित हो।

एलसीडी प्रोजेक्ट से उच्च न्यायालय में सेवारत छह हजार एडवोकेट, इनके सहायक स्टाफ के अलावा एक लाख से अधिक वादी-प्रतिवादी तथा इनके गवाह आदि को सहूलियत होगी। इतना ही नहीं बोर्ड पर चल रहे मामले में यदि कोई अधिवक्ता पेश नहीं हो सका है तो उसका नाम लाल रंग मे एलसीडी पर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि सूचना पाकर चिह्नित मामले का अधिवक्ता यथाशीघ्र अदालत में पहुंच सके।

बीमे की रकम के लिए कटवाया हाथ


इंश्योरेंस की रकम पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ताइवान में एक व्यक्ति ने इंश्योरेंस के 7,30,000 डॉलर हासिल करने के लिए अपना हाथ कटवा लिया। 38 साल के चियांग ची वी ने दो किराए के आदमियों से अपना हाथ कटवाया। इस व्यक्ति को शनिवार को अदालत में पेश किया गया।

38 वर्षीय चियांग ची वी ने आठ नवंबर को पुलिस को बताया था कि ताइपे के चुंघी में दो आदमियों ने उस पर हमला कर उसका बायां हाथ काट दिया था। पुलिस को चियांग द्वारा कही गई बात पर शक था क्योंकि चियांग के बाजू के घाव को देखकर ऐसा नहीं लगता था कि उस पर हमला हुआ है और जिस स्थान पर हमले की बात कही गई थी वहां एक ही जगह पर खून इकट्ठा था।

जांच के बाद पता चला कि चियांग कर्ज में डूबा हुआ था, जिसे चुकाने के लिए वह बीमा पॉलिसियों के तहत एक दर्जन कंपनियों से 2.4 लाख ताइवानी डॉलर की राशि प्राप्त करना चाहता था।  पिछले सप्ताह पुलिस ने दो आदमियों को गिरफ्तार किया था। इन दोनों का दावा था कि चियांग ने उन्हें पैसा देकर यह काम कराया था। चियांग ने कहा था कि पहले वह उसे अचेत कर दें और फिर उसका बायां हाथ काट दें। चियांग ने शुक्रवार को खुद ही पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसे शनिवार को अदालत में पेश किया गया।  सुनवाई के दौरान चियांग ने कहा कि उसकी कंपनी कर्ज से डूब रही थी, इसलिए उसने किराए के दो आदमियों से अपना हाथ काटने के लिए कहा, ताकि वह अपनी बीमा पॉलिसियों का पैसा प्राप्त करके कर्ज चुका सके।

Thursday, November 26, 2009

देश के पहले पंचायत केंद्र का दिल्ली में उद्धाटन


सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन ने बुधवार को देश के पहले पंचायत केंद्र का दिल्ली में उद्धाटन किया। इस केंद्र के जरिए मामलों को जल्द निपटाने में मदद मिलेगी।
केंद्र का उद्धाटन करने के बाद बालाकृष्णन ने कहा, ''पंचायत केंद्र की स्थापना के साथ ही मुकदमों पर आने वाली लागत बहुत कम हो जाएगी और इससे मामलों को तेजी के साथ निपटाने में मदद मिलेगी।''
पंचायत ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी विवाद पर बाध्यकारी निर्णय के लिए उसे एक या एक से अधिक पंच के यहां सौंपा जाता है।
अनुमान के अनुसार भारत में मध्यस्थता संबंधी 1500 मामले लंबित हैं।