पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Wednesday, September 16, 2009

गुजारा भत्ता:शादी के सबूत की आवश्यकता नहीं

बंबई उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि अपराध दंड संहिता की धारा 125 के तहत तिरस्कृत पत्नी को गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए किसी पुख्ता सबूत की आवश्यकता नहीं है। न्यायमूर्ति अभय ओका के इस फैसले से महाराष्ट्र सरकार के अभियान को बल मिल सकता है जिसने सीआरपीसी में संशोधन का प्रस्ताव किया है ताकि उन महिलाओं को गुजारा भत्ता मिल सके जो अपनी शादी की वैधता साबित करने में नाकाम रहती हैं।
न्यायामूर्ति ओका ने पिछले हफ्ते फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता सुमन को 1991 से बकाए के साथ 500 रुपए प्रति महीने गुजारा भत्ता दिए जाने का निर्देश दिया। सुमन ने अपनी याचिका में कहा था कि उसकी शादी 1981 में निवरूत्ति सातव के साथ हुयी थी। सुमन ने आरोप लगाया कि उसके पति ने एक साल बाद ही सुरेखा नाम की महिला से दूसरी शादी कर ली और उसके साथ खराब बर्ताव करने लगा। पति ने उसे 1991 में घर से निकाल दिया। एक बच्ची की मां सुमन ने मजिस्ट्रेट की अदालत में गुजारा भत्ता की मांग की लेकिन वह शादी का प्रमाण पेश करने में नाकाम रही। अदालत में सुनवाई के दौरान पति ने उसके साथ शादी की बात से इंकार कर दिया। सुमन ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

बुश पर जूता फेंकने वाला इराकी पत्रकार जेल से रिहा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश पर जूते फेंकने वाला इराकी टीवी पत्रकार मुंतजर अल जैदी नौ महीने जेल की सजा काटने के बाद मंगलवार को रिहा हो गया. गत वर्ष 14 दिसंबर को बुश पर अपना 10 नंबर का जूता फेंकने से पहले जैदी चिल्लाया था, ‘‘कुत्ते यह विदाई का चुंबन है.’’
उस घटना के बाद से वह जेल में बंद था. उल्लेखनीय है कि करीब 6 वर्ष पहले बुश के आदेश पर ही इराक पर हमला हुआ था, जिसका विरोध जैदी ने किया. जैदी का परिवार और उसके मित्र काफी प्रसन्न हैं और अपने गृह शहर बगदाद में पार्टी करने की तैयारी में है. जैदी के भाई उदय ने कहा, ‘‘उसे रिहा कर दिया गया है और वह अपने सामानों की वापसी का इंतजार कर रहा है.’’ जैदी को सोमवार को रिहा किया जाना था लेकिन कानून में लालफीताशाही के कारण विलंब हुआ तथा उसके भाइयों तथा बहनों को एक दिन और इंतजार करना पड़ा.
जैदी के वकील धिया अल सादी ने कहा, ‘‘इस निर्णय से इराक के न्यायिक अधिकारियों की ईमानदारी और न्याय प्रदर्शित होती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय बिना किसी प्रभाव तथा बाहरी दबाव के जारी हुआ.’’ हालांकि जैदी की जेल की सजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी लेकिन इराकी कैदियों को संबंधित जरूरी दस्तावेज पर हस्ताक्षर और उसकी पुष्टि होने तक अतिरिक्त दिनों तक कैद में रहना पड़ता है. एक विदेशी शासनाध्यक्ष पर हमला करने के आरोप में जैदी को शुरुआत में तीन वर्ष जेल की सजा दी गयी थी लेकिन अपील के बाद उसे कम करके एक वर्ष कर दिया गया.
अच्छे आचरण के आधार पर उसकी सजा में फिर कमी कर दी गयी. उदय ने कहा कि परिवार से मिलने से पहले उसका भाई ‘अल बगदादिया’ चैनल के कार्यालय जायेगा जिसके लिए काम करते हुए उसने बुश का अपमान किया. जैदी के परिवार ने उनकी रिहाई की खुशी में एक भेड़ की बलि देने की तैयारी कर रखी है. हालांकि जूते फेंके जाने की घटना में बुश बाल बाल बच गये थे, लेकिन इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी को बहुत शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ा था.

आमेर महल में लाइट एवं साउंड शो एवं ऑडियो गाइड सिस्टम को हरी झंडी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने आमेर महल में लाइट एवं साउंड शो एवं ऑडियो गाइड सिस्टम को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला एवं न्यायाधीश मुनीश्वरनाथ भंडारी ने यह आदेश सोमवार को स्वप्रेरित संज्ञान एवं नीरजा खन्ना की याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिया। खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता जी.एस. बापना को निर्देश दिया कि वे इन्हें तत्काल प्रभाव से शुरू करवाएं। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी अंतिम बहस के लिए जारी रहेगी।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश से महल में संचालित की जा रही सभी व्यावसायिक गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके तहत आमेर महल में शाम को संचालित किए जाने वाले लाइट एंड साउंड शो एवं ऑडियो गाइड सिस्टम को भी बंद कर दिया था।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अभिनव शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने व्यावसायिक गतिविधियों के नाम पर महल में गैर व्यावसायिक गतिविधियों को भी बंद कर दिया है जो कि जनहित से जुड़ी हुई थीं। उन्होंेने कहा कि किले के स्वरूप को आकर्षक बनाने के लिए व पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लाइट एंड साउंड शो व ऑडियो गाइड सिस्टम संचालित किया जा रहा था, लेकिन इन गतिविधियों को व्यावसायिक मानते हुए बंद कर दिया।
खंडपीठ ने इस संबंध में महाधिवक्ता बापना से पूछा तो उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश की पालना में ही इन्हें बंद कर दिया था। इस पर खंडपीठ ने लाइट एंड साउंड शो व ऑडियो गाइड सिस्टम को शुरू करने का निर्देश दिया।

Tuesday, September 15, 2009

मेधा पाटकर पर अदालत ने किया जुर्माना

दिल्ली शहर की एक अदालत ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की उस याचिका को खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने अदालत में उपस्थित होने से छूट मांगी थी। अदालत ने उन पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।

पाटकर आपराधिक मानहानि के दो मामलों का सामना कर रही हैं। महानगरीय दंडाधिकारी मुनीश मरकान ने दोनों मामलों की सुनवाई 7 फरवरी 2010 के लिए निर्धारित कर दी है।

पाटकर ने अहमदाबाद के एक गैर सरकारी संगठन नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज (एनसीसीएल) के अध्यक्ष वी.के.सक्सेना के खिलाफ वर्ष 2000 में एक मानहानि का मामला दायर किया था। सक्सेना ने भी पाटकर के खिलाफ वर्ष 2001 में अहमदाबाद में मानहानि का एक मामला दायर किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को पाटकर की याचिका पर दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।


हिट एंड रन के शिकार पाएंगे चौगुना मुआवजा

सड़क पार कर रहे हैं और कोई गाड़ी वाला टक्कर मारकर भाग जाता है। चूंकि गाड़ी स्पीड में थी लिहाजा कोई उसका नंबर भी नहीं पढ़ सका। ऐसे 'हिट एंड रन' मामलों में बहुत मामूली रकम दुर्घटना के शिकार व्यक्ति या उसके परिजनों को मिलती है। परंतु अब ऐसा नहीं होगा। सरकार मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करने जा रही है, जिसके बाद मुआवजे की रकम चौगुनी हो जाएगी।

मौजूदा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का है। इसमें 'हिट एंड रन' मामलों में गंभीर रूप से घायल होने पर 12 हजार पांच सौ रुपये तथा मौत होने पर परिजनों को 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। आज के हालात में इस रकम को बहुत मामूली माना जा रहा है। लिहाजा मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर क्षतिपूर्ति में बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। संशोधन विधेयक में हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपये तथा मौत होने पर एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव है।

मुआवजे की रकम बीमा कंपनी द्वारा अदा की जाएगी। इसके लिए सोलैटियम फंड के नाम से एक राष्ट्रीय कोष बना हुआ है। इसका प्रबंध जनरल इंश्योरेंस कारपोरेशन द्वारा किया जाता है। इस फंड के लिए रकम मोटर बीमा पालिसियों पर सरचार्ज के जरिए जुटाई जाती है। मुआवजा राशि का भुगतान जिला मजिस्ट्रेट की ओर से किया जाता है।

इसी तरह 'नो फाल्ट प्रिंसिपल' के तहत आने वाले मामलों में भी मुआवजा राशि बढ़ाई जा रही है। ये ऐसे मामले होते हैं जिनमें दुर्घटना का शिकार व्यक्ति या परिजन यह साबित करने की स्थिति में नहीं होते कि चालक लापरवाही से गाड़ी चला रहा था। मौजूदा एक्ट में ऐसे मामलों को धारा 163 ए की द्वितीय अनुसूची के तहत परिभाषित किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा क्षतिपूर्ति 25-30 वर्ष के लोगों को अधिकतम 40 हजार रुपये की आय के आधार पर देने का प्रावधान है। स्थायी रूप से विकलांग होने पर मुआवजे की रकम 7.20 लाख रुपये तथा मृत्यु होने पर 4.80 लाख रुपये रखी गई है। संशोधन विधेयक में इन प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब 25-30 आयुवर्ग के लिए अधिकतम एक लाख रुपये की आय के मुताबिक मुआवजे को बढ़ाकर क्रमश: 12 लाख रुपये और 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। विकलांग को क्षतिपूर्ति इसलिए ज्यादा रखी जाती है क्योंकि उसकी देखभाल पर ज्यादा खर्च आता है।

इतना ही नहीं, अब ऐसे मामलों में भी क्षतिपूर्ति मिलेगी जहां दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की कोई कमाई न हो। ऐसे मामलों में घायल होने पर एक लाख और मृत्यु होने पर परिवार वालों को डेढ़ लाख रुपये की निश्चित रकम प्रदान की जाएगी।

दूसरी ओर 'फाल्ट प्रिंसिपल' वाले मामलों, यानी जहां ड्राइवर की लापरवाही साबित करना संभव हो और मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल अथवा दीवानी अदालत में क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन दिया गया हो, ऐसे मामलों में भी मुआवजे की रकम पहले से काफी ज्यादा की जा रही है। यह नया प्रावधान भी शामिल किया गया है कि यदि दुर्घटना से प्रभावित लोग किसी अन्य कानून के तहत क्षतिपूर्ति का दावा करते हैं तो उन्हें इससे रोका नहीं जाएगा।

राजस्थान में आज से नया नगरपालिका कानून लागू।

राजस्थान में नया नगरपालिका कानून मंगलवार से लागू हो जाएगा। स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। प्रदेश में अब नगरीय निकायों के चुनाव नए कानून के हिसाब से ही कराए जाएंगे। इसके लिए वार्डो और महापौर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी 20 अक्टूबर से पहले निकाली जाएगी।
स्वायत्त शासन, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधु ने बताया कि वार्डो के आरक्षण के लिए लॉटरी का प्रस्ताव भिजवाया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार के समय भी नया नगरपालिका कानून अध्यादेश से लागू किया था, लेकिन उसका विधानसभा में विधेयक नहीं लाने से उस समय यह कानून लागू नहीं हो पाया था। बाद में गहलोत सरकार ने इसे लागू किया है।
नए कानून में सभी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इससे पहले महिलाओं को वार्डो में 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान था। जबकि युवाओं को प्रत्येक पांच में से एक वार्ड में आरक्षण मिलेगा। महिलाओं को आरक्षण केवल वाडरें में ही मिलेगा। इससे पहले नवंबर में होने वाले 45 निकायों के चुनाव के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से लॉटरियां निकाल दी गई थीं। अब इन निकायों में भी नए सिरे से लॉटरियां निकाली जाएंगी।

यह नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
  1. किसी सक्षम न्यायालय से 6 माह या इससे अधिक सजा से दंडित किया गया हो।
  2. किसी न्यायालय में ऐसा मामला विचाराधीन हो, जिसमें 5 साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान हो।
  3. खाद्य अपमिश्रण कानून के तहत मिलावट का दोषी ठहराया गया हो।
  4. केन्द्र अथवा राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया हो या पद से हटा दिया हो
  5. दो से अधिक संतानें हों या उस पर दो साल की स्थानीय निकाय की बकाया राशि हो, जिसकी वसूली की कार्यवाही शुरू कर दी गई हो।
  6. नगरपालिका की संपत्ति अथवा धन के गबन का आरोप हो।

Monday, September 14, 2009

एससी व एसटी मामलों के लिए बनेंगी विशेष अदालतें


राज्य सरकारों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति अत्याचार निवारण कानून के तहत दोषियों को जल्द सजा दिलाने तथा लम्बित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालातें के गठन पर सहमति व्यक्त की है। सामाजिक आधिकारिता मंत्रालय की ओर से हाल ही में आयोजित राज्यों के कल्याण एवं सामाजिक न्याय मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन में इस विषय पर सहमति व्यक्त की गई। शनिवार को जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

Saturday, September 12, 2009

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - जेल में चिकन क्यों नहीं...


1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के छह आरोपियों ने पिछले साल से कैदियों को दिए जाने वाले खाने में नॉनवेज को प्रतिबंधित कर दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि जेल में सिर्फ वेजीटेरियन खाना दिए जाने के पीछे अपने तर्क बताएं।

पंधेर को बरी किए जाने को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी

नोएडा के निठारी में हत्या के 19 मामलों में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के परिजनों ने कहा कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी किए जाने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

दाढ़ी की वजह से स्कूल से निकालना हास्यास्पद: कोर्ट




सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम स्टूडेंट द्वारा दाढ़ी रखे जाने के अधिकार की मांग के मुद्दे पर शुक्रवार को मधय प्रदेश के एक कॉन्वेंट स्कूल को नोटिस जारी किया। जस्टिस बी. एन. अग्रवाल और जस्टिस जी. एस. सिंघवी की बेंच ने धार्मिक आधार पर दाढ़ी कटवाने से इनकार किए जाने के बाद मोहम्मद सलीम को स्कूल से निकाले जाने के फैसले को 'हास्यास्पद' करार दिया।

भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्ती के लिए कानून बने : प्रधान न्यायाधीश


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) केजी बालकृष्णन ने भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी सरकारी अफसरों की संपत्ति जब्त किए जाने का पक्ष लेते हुए इस संबंध में वैधानिक प्रावधान की वकालत की है।उन्होंने कहा कि वे वकीलों की विशेष टीम चाहते हैं ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाने की उनकी विशेषज्ञता में विकास हो। ‘फाइटिंग क्राइम्स रिलेटेड टु करप्शन’ विषय पर शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में सीजेआई ने कहा ‘यदि कोई सरकारी अफसर जनता की कीमत पर संपत्ति इकट्ठी करता है तो राज्य को उसे जब्त करने का अधिकार होना चाहिए।’

Friday, September 11, 2009

राजस्थान हाईकोर्ट के समय में पांच अक्टूबर से बढोतरी।




उच्च न्यायालय के सुनवाई के समय में आधा घंटे बढोतरी का निर्णय पांच अक्टूबर से लागू होगा। सुनवाई के समय में बढोतरी का निर्णय उच्च न्यायालय की वृहद पीठ में पिछले सप्ताह किया गया था। सूत्रों के अनुसार आधा घंटे में से 15 मिनट भोजनावकाश कम कर बढाए जाएंगे, जबकि शेष 15 मिनट के बारे में अभी मंथन चल रहा है।

कॉपीराइट आवेदन अब ऑनलाइन

कॉपीराइट के लिए अब अब ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने बुधवार को कॉपीराइट कार्यालय के पोर्टल का उद्घाटन किया। इसकी साइट http://copyright.gov.in/ पर कॉपीराइट साइट में दायर मामलों और उन पर सुनवाई की तारीख के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

Thursday, September 10, 2009

आरसीए अध्यक्ष दीक्षित को अवमानना नोटिस।

राजस्थान हाई कोर्ट ने अदालती आदेशों की अवमानना के मामले में आरसीए अध्यक्ष संजय दीक्षित व संयुक्त सचिव विवेक व्यास को अवमानना नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने इन दोनों से पूछा है कि उन्होंने अदालती आदेश की पालना क्यों नहीं की।
न्यायाधीश आरएस राठौड़ ने यह आदेश अलवर जिला क्रिकेट संघ की याचिका पर दिया। याचिका में आरसीए की उस कार्रवाई को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरसीए ने जिला क्रिकेट एसोसिएशन की संबद्धता को निलंबित करने का नोटिस जारी किया था। इस कार्रवाई पर कोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी।
हाई कोर्ट ने छह जिला क्रिकेट संघों को आरसीए की आपात बैठकों व अन्य बैठकों में भाग नहीं लेने पर जारी किए कारण बताओ नोटिस की क्रियान्विति पर भी रोक लगा दी। गौरतलब है कि आरसीए ने कोटा, नागौर, भरतपुर, धौलपुर, जालोर व बांसवाड़ा जिला क्रिकेट संघ को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न उन्हें आरसीए की बैठकों में भाग नहीं लेने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया जाए। आरसीए ने इन जिला संघों से गुरुवार तक जवाब मांगा था। इसे जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने नोटिसों की क्रियान्विति पर रोक लगाते हुए आरसीए अध्यक्ष, सचिव अशोक अहोरी एवं सहकारिता रजिस्ट्रार को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इसी तरह भीलवाड़ा क्रिकेट एसोसिएशन के मामले में न्यायाधीश ने पूर्व के यथास्थिति के आदेशों को बुधवार को भी बहाल रखा। साथ ही न्यायाधीश ने जिला क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष सीपी ओझा के उस प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया जिसमें एसोसिएशन के बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी।

फैसले नहीं, इंसाफ हो-मुख्य न्यायाधीश राजस्थान उच्च न्यायालय

राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला ने कहा कि अदालतों में सिर्फ फैसले ही नहीं, बल्कि इंसाफ होना चाहिए। वे जोधपुर में बुधवार को वकील संगठनों की ओर से उनके सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद पहली बार मुख्यपीठ में न्यायाधीशों व वकीलों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय दिलाना धर्म का कार्य है। बार और बैंच धर्म रथ हैं। समाज हमसे व आपसे त्वरित फैसलों व इंसाफ की उम्मीद करता है। इसलिए न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों में न सिर्फ फैसले होने चाहिए, बल्कि इंसाफ होना चाहिए। अदालतों में तीन दशक पुराने मामले विचाराधीन है इससे कानूनी तंत्र पर अंगुली उठना लाजिमी है। उन्होंने सबसे पुराने मामले को प्राथमिकता से निपटाने व वकीलों से सहयोग की अपील की।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेटस एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने मुख्य न्यायाधीश का परिचय देते हुए कहा कि न्यायाधीश भल्ला ने उस समय शपथ ली जब मारवाड़ हाईकोर्ट के विभाजन की मांग के मुद्दे पर जल रहा था। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उस समय जोधपुर जल नहीं रहा था बल्कि निखर रहा था। इसी का नतीजा है कि मुख्यपीठ और विखंडित होने से रह गई। उन्होंने कहा कि हमें किसी प्रदेश या क्षेत्र विशेष के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
हाईकोर्ट के विभाजन की मांग को खारिज करने पर दिए गए धन्यवाद के जवाब में भल्ला ने कहा कि आदमी आदमी को क्या देगा, जो भी देगा खुदा देगा। मुख्य न्यायाधीश स्वागत समारोह में बहुत की सहज नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि वे 23 वर्ष तक बार में रहे है और आज फिर उन्हें बार में आने का मौका मिला है। उनका कहना था कि प्यार की कोई भाषा नहीं होती, कौन कहता है मोहब्बत की कोई जुबां नहीं होती, यह हकीकत तो निगाहों से बयां होती है।



हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी, लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद पुरोहित ने भी समारोह में विचार व्यक्त किए। संचालन उपाध्यक्ष विनय जैन ने किया जबकि महासचिव नाथूसिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में हाईकोर्ट व अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीश, रजिस्ट्री अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद थे।