जयपुर, विधायकपुरी थाना इलाके में एक महिला को एक युवक ने उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी किया। इतना ही नहीं उसने कोर्ट में खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर उससे शादी तक कर ली। लेकिन उसकी हरकत यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बार उसने महिला के साथ दुष्कर्म कर जेवरात और नकदी उससे लेकर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक हथरोई निवासी 30 वर्षीय विवाहिता को एक बंगाली युवक ने फोन पर उसके गांव का रहने वाला बताया। युवक ने महिला को उसके बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर कोर्ट में ले जाकर खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर उससे शादी कर ली। पुलिस के मुताबिक कुछ समय तक दोनों वहां साथ-साथ रहे। पर एक दिन उसने मौका पाकर बंगाली युवक विश्वजीत महिला के कानों के झुमके, सोने की चेन और 12 हजार रुपये लेकर फरार हो गया। इस पर महिला ने विधायकपुरी थाना पहुंचकर मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस ने भादंसं की धारा 420, 376, के तहत मामला दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है।
Friday, May 22, 2009
अवमानना मामले में बार के सचिव को जवाब दाखिल करने का समय
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आपराधिक अवमानना मामले में बार एसोसिएशन के सचिव वीर सिंह को जारी नोटिस का जवाब 27 मई तक दाखिल करने का समय दिया है। अगली सुनवाई की तिथि 27 मई नियत की गयी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद तथा न्यायमूर्ति वाईसी गुप्ता की खंडपीठ ने दिया है। उल्लेखनीय है कि एक अधिवक्ता की मौत के मामले में जिला एवं पुलिस प्रशासन की मनमानी कार्रवाई के विरोध में एक मई को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में बार के सचिव ने बार के निर्णय की जानकारी न्याय कक्षों में देकर सहयोग मांगा था। कोर्ट बरामदे में भीड़ एकत्र होने से न्यायिक कार्रवाई में बाधा पहुंची जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से कानून के अधीन है। किसी भी दशा में कोर्ट के सम्मान व गरिमा को कम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने अधिवक्ताओं के व्यवहार को अवमानना की परिधि में माना और अवमानना अधिनियम की धारा 15 के तहत न्यायिक कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने के लिए सचिव वीर सिंह पर आपराधिक अवमानना केस दर्ज करने का आदेश दिया। इस पर यह अवमानना कार्रवाई की गयी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद तथा न्यायमूर्ति वाईसी गुप्ता की खंडपीठ ने दिया है। उल्लेखनीय है कि एक अधिवक्ता की मौत के मामले में जिला एवं पुलिस प्रशासन की मनमानी कार्रवाई के विरोध में एक मई को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया था। इसी कड़ी में बार के सचिव ने बार के निर्णय की जानकारी न्याय कक्षों में देकर सहयोग मांगा था। कोर्ट बरामदे में भीड़ एकत्र होने से न्यायिक कार्रवाई में बाधा पहुंची जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से कानून के अधीन है। किसी भी दशा में कोर्ट के सम्मान व गरिमा को कम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने अधिवक्ताओं के व्यवहार को अवमानना की परिधि में माना और अवमानना अधिनियम की धारा 15 के तहत न्यायिक कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने के लिए सचिव वीर सिंह पर आपराधिक अवमानना केस दर्ज करने का आदेश दिया। इस पर यह अवमानना कार्रवाई की गयी है।
Sunday, May 17, 2009
निलंबित न्यायिक मजिस्ट्रेट को तीन साल की सजा
चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को सात लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में निलंबित न्यायिक मजिस्ट्रेट एसएस भारद्वाज को तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने एसएस भारद्वाज पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजा मिलने के बाद निलंबित न्यायिक मजिस्ट्रेट एसएस भारद्वाज ने अदालत में 25 हजार रुपये का मुचलका भरा और अदालत से उसे जमानत मिल गई।
सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेशों में कहा है कि न्यायपालिका ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को लोगों की सेवा करने का अच्छा मौका दिया था, लेकिन रुपये के लालच में आकर उन्होंने पद का दुरुपयोग किया। दायर मामले के अनुसार सीबीआई ने 10 मई 2003 को एसएस भारद्वाज के घर से1टर-22 स्थित सरकारी निवास पर छापा मारकर उसे सात लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिर3तार में लिया था, जहां से वह बहाना बनाकर फरार हो गए।
एसएस भारद्वाज पर आरोप था कि उन्होंने करतारपुर निवासी गुरविंदर सिंह सामरा के एक आपराधिक मामले को सेशन कोर्ट में रफा-दफा करवाने के लिए 11 लाख रुपये की डील की थी। भारद्वाज के अनुसार, यह पैसे जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएम गुप्ता को दिए जाने थे, जिसके बाद सामरा को अंतरिम जमानत मिल जाती। सात लाख रुपये 10 मई को और बाकी रकम 15 मई को देनी तय हुई। डील होने के बाद सामरा ने दोनों जजों के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दे दी।
सामरा ने बातचीत की रिकाìडग भी अदालत में बतौर सबूत पेश कर दी। फरार होने के बाद एसएस भारद्वाज ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक निजी टीवी चैनल को साक्षात्कार दिया। फरारी के दौरान उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद भारद्वाज ने सीबीआई अदालत चंडीगढ़ में आत्मसमर्पण कर दिया। उधर, मामले में एक अन्य आरोपी जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अदालत को बरी कर दिया है और सामरा इन दिनों गुरदासपुर की जेल में विस्फोटक ए1ट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेशों में कहा है कि न्यायपालिका ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को लोगों की सेवा करने का अच्छा मौका दिया था, लेकिन रुपये के लालच में आकर उन्होंने पद का दुरुपयोग किया। दायर मामले के अनुसार सीबीआई ने 10 मई 2003 को एसएस भारद्वाज के घर से1टर-22 स्थित सरकारी निवास पर छापा मारकर उसे सात लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों गिर3तार में लिया था, जहां से वह बहाना बनाकर फरार हो गए।
एसएस भारद्वाज पर आरोप था कि उन्होंने करतारपुर निवासी गुरविंदर सिंह सामरा के एक आपराधिक मामले को सेशन कोर्ट में रफा-दफा करवाने के लिए 11 लाख रुपये की डील की थी। भारद्वाज के अनुसार, यह पैसे जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएम गुप्ता को दिए जाने थे, जिसके बाद सामरा को अंतरिम जमानत मिल जाती। सात लाख रुपये 10 मई को और बाकी रकम 15 मई को देनी तय हुई। डील होने के बाद सामरा ने दोनों जजों के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दे दी।
सामरा ने बातचीत की रिकाìडग भी अदालत में बतौर सबूत पेश कर दी। फरार होने के बाद एसएस भारद्वाज ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक निजी टीवी चैनल को साक्षात्कार दिया। फरारी के दौरान उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद भारद्वाज ने सीबीआई अदालत चंडीगढ़ में आत्मसमर्पण कर दिया। उधर, मामले में एक अन्य आरोपी जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अदालत को बरी कर दिया है और सामरा इन दिनों गुरदासपुर की जेल में विस्फोटक ए1ट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
Thursday, May 14, 2009
छात्रा से यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार व्याख्याता रिमाण्ड पर ।
राजसमन्द, 13 मई। चार वर्ष तक छात्रा से यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार व्याख्याता को अदालत ने तीन दिन के लिए पुलिस रिमाण्ड पर रखने के आदेश दिए है।
थानाधिकारी निरंजन प्रसाद आल्हा ने बताया कि व्याख्याता दीपक पुत्र कमल सिंह को बुधवार दिन में अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दीपक से पूछताछ एवं बरामदगी के लिए तीन दिन का रिमाण्ड स्वीकृत किया है। आल्हा ने बताया कि दीपक सिंह की निशानदेही से उदयपुर स्थित उसके मकान से छात्रा व उसके फोटोग्राफ्स, शादी की सीडी, छात्रा तथा वह जिस होटल में ठहरे थे उसका रिकार्ड और जिस नर्सिंग होम में एर्बोशन करवाया वहां से भी रिकार्ड लिया गया है। उल्लेखनीय है कि राजसमन्द शहर निवासी छात्रा ने दो दिन पहले राजनगर थाने में व्याख्याता दीपक सिंह के खिलाफ अश्लील सीडी बनाकर ब्लेकमेल करने और यौन शोषण करने का मामला दर्ज करवाया था।
थानाधिकारी निरंजन प्रसाद आल्हा ने बताया कि व्याख्याता दीपक पुत्र कमल सिंह को बुधवार दिन में अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दीपक से पूछताछ एवं बरामदगी के लिए तीन दिन का रिमाण्ड स्वीकृत किया है। आल्हा ने बताया कि दीपक सिंह की निशानदेही से उदयपुर स्थित उसके मकान से छात्रा व उसके फोटोग्राफ्स, शादी की सीडी, छात्रा तथा वह जिस होटल में ठहरे थे उसका रिकार्ड और जिस नर्सिंग होम में एर्बोशन करवाया वहां से भी रिकार्ड लिया गया है। उल्लेखनीय है कि राजसमन्द शहर निवासी छात्रा ने दो दिन पहले राजनगर थाने में व्याख्याता दीपक सिंह के खिलाफ अश्लील सीडी बनाकर ब्लेकमेल करने और यौन शोषण करने का मामला दर्ज करवाया था।
Wednesday, May 13, 2009
बलात्कारी बेटे को बचाने का आरोपी पुलिस अधिकारी बहाल
उड़ीसा सरकार ने अपने बलात्कारी बेटे को बचाने के आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बिद्या भूषण मोहंती का निलंबन वापस लेकर उसे बहाल कर दिया है।गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार रात मोहंती का निलंबन वापस ले लिया।"
वर्ष 2007 में राज्य सरकार ने होमगार्ड्स के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक मोहंती को अपने बलात्कारी बेटे बिट्टी (23) को कथित रूप से बचाने के आरोप में निलंबित किया था। बिट्टी को मार्च 2006 में राजस्थान में एक 26 वर्षीय जर्मन महिला के साथ बलात्कार के आरोप में सजा सुनाई गई थी।
बिट्टी जयपुर जेल में सात वर्ष की कैद की सजा काट रहा था लेकिन 20 नवंबर 2006 को 15 दिन के पेरोल पर रिहा होने के बाद वह वापस नहीं लौटा।
राजस्थान के एक न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उड़ीसा सरकार ने मोहंती को निलंबित कर दिया था। उन पर अपने फरार बेटे को बचाने का आरोप था।
वर्ष 2007 में राज्य सरकार ने होमगार्ड्स के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक मोहंती को अपने बलात्कारी बेटे बिट्टी (23) को कथित रूप से बचाने के आरोप में निलंबित किया था। बिट्टी को मार्च 2006 में राजस्थान में एक 26 वर्षीय जर्मन महिला के साथ बलात्कार के आरोप में सजा सुनाई गई थी।
बिट्टी जयपुर जेल में सात वर्ष की कैद की सजा काट रहा था लेकिन 20 नवंबर 2006 को 15 दिन के पेरोल पर रिहा होने के बाद वह वापस नहीं लौटा।
राजस्थान के एक न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उड़ीसा सरकार ने मोहंती को निलंबित कर दिया था। उन पर अपने फरार बेटे को बचाने का आरोप था।
वसुंधरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज।
बीकानेर की सदर थाना पुलिस ने लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी सभा में तलवार लहराने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजस्थान विधान सभा में विपक्ष की नेता वसुंधरा राजे समेत करीब बीस अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस सूत्रों ने बुधवार को यहां बताया कि सदर पुलिस ने स्थानीय अदालत के आदेश पर सोमवार 11 मई को वसुंधरा राजे समेत करीब बीस लोगों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान गत 17 अप्रैल को जूनागढ़ में आयोजित सभा में वसुंधरा राजे ने भाजपा युवा मोर्चा द्वारा भेंट की गई तलवार म्यान से निकाल कर लहराई थी।
गौरतलब है कि अधिवक्ता सुरेन्द्र पाल शर्मा ने स्थानीय एक अदालत में इस्तगासा पेश कर पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश देने की गुहार की थी। अदालत ने इस्तगासे पर सुनवाई कर सदर पुलिस को वसुंधरा राजे समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।
पुलिस सूत्रों ने बुधवार को यहां बताया कि सदर पुलिस ने स्थानीय अदालत के आदेश पर सोमवार 11 मई को वसुंधरा राजे समेत करीब बीस लोगों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान गत 17 अप्रैल को जूनागढ़ में आयोजित सभा में वसुंधरा राजे ने भाजपा युवा मोर्चा द्वारा भेंट की गई तलवार म्यान से निकाल कर लहराई थी।
गौरतलब है कि अधिवक्ता सुरेन्द्र पाल शर्मा ने स्थानीय एक अदालत में इस्तगासा पेश कर पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश देने की गुहार की थी। अदालत ने इस्तगासे पर सुनवाई कर सदर पुलिस को वसुंधरा राजे समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।
मिस्र में पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर प्रतिबंध
मिस्र में एक अदालत ने पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों को विषाक्त करार देते हुए उन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
काहिरा में प्रशासनिक अदालत ने एक इस्लामी वकील द्वारा दायर मामले पर सुनवाई के दौरान यह प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि वे बेबसाइट मिसी सामाजिक मूल्यों को नष्ट कर रही हैं। अदालत ने कहा कि इन वेबसाइट के जारी रहने से नैतिक मूल्य समाप्त हो जाएंगे। अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकारों को धर्म नैतिकता तथा देशभक्ति को बनाए रखते हुए सीमित करना चाहिए।
सरकारी मामलों को देखने वाली अदालत ने सरकारी एजेंसियों को चेतावनी दी कि वे इस बात की निगरानी करें कि इंटरनेट सेवा प्रदाता अदालत के आदेश का अनुपालन कर रहे हैं या नहीं। अदालत ने साथ ही कहा कि इस प्रकार की वेबसाइट उपलब्ध कराना असंवैधानिक होगा।
वकील निजार घोराब ने अदालत के फैसले की सराहना करते हुए इसे भ्रष्टाचार के ऊपर जीत बताया।
काहिरा में प्रशासनिक अदालत ने एक इस्लामी वकील द्वारा दायर मामले पर सुनवाई के दौरान यह प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि वे बेबसाइट मिसी सामाजिक मूल्यों को नष्ट कर रही हैं। अदालत ने कहा कि इन वेबसाइट के जारी रहने से नैतिक मूल्य समाप्त हो जाएंगे। अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकारों को धर्म नैतिकता तथा देशभक्ति को बनाए रखते हुए सीमित करना चाहिए।
सरकारी मामलों को देखने वाली अदालत ने सरकारी एजेंसियों को चेतावनी दी कि वे इस बात की निगरानी करें कि इंटरनेट सेवा प्रदाता अदालत के आदेश का अनुपालन कर रहे हैं या नहीं। अदालत ने साथ ही कहा कि इस प्रकार की वेबसाइट उपलब्ध कराना असंवैधानिक होगा।
वकील निजार घोराब ने अदालत के फैसले की सराहना करते हुए इसे भ्रष्टाचार के ऊपर जीत बताया।
न्यायाधीश दीपक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के रूप में शपथ ग्रहण की।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीश रहे दीपक वर्मा ने 11 मई को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के रूप में शपथ ग्रहण की। जबलपुर निवासी श्री वर्मा लंबे समय तक मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जस्टिस रहे। उनका ज्यादातर सेवाकाल इंदौर खंडपीठ में बीता और वे यहां प्रशासकीय न्यायाधीश भी रहे। कानूनविद् के रूप में विशेष स्थान रखने वाले श्री वर्मा राजस्थान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले जस्टिस हिदायतउल्ला, जस्टिस जे.एस. वर्मा व जस्टिस आर.सी. लाहोटी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले जस्टिस हिदायतउल्ला, जस्टिस जे.एस. वर्मा व जस्टिस आर.सी. लाहोटी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे।
Sunday, May 10, 2009
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का चुनाव 11को
दिल्ली में लोकसभा चुनाव के बाद अब उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएशन के चुनाव की बारी है. यह 11 मई को होगा. एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल ही वरिष्ठ वकील के पद से नवाजे गए रुपिंदर सिंह सूरी इस चुनाव में अध्यक्ष पद के सशक्त उम्मीदवार हैं. श्री सूरी ने कहा है कि अगर वह अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो जूनियर वकीलों को न्यायसंगत मानदेय और अप्पू घर की जमीन पर बन रहे भवन में चेंबर दिलाने का प्रयास करेंगे. अपनी जीत के प्रति आश्वस्त श्री सूरी ने कहा कि वह बार एसोसिएशन के कामकाज में पारदर्शिता लायेंगे.
मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज
जयपुर, ९ मई। जादू कमल बाबू लक्ष्मण ङ्क्षसह गहलोत मैजिक ट्रस्ट को आरक्षित दर से कम दर पर जमीन आवंटित करने के मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित पांच व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
गांधीनगर पुलिस थाने में मुख्यमंत्री गहलोत, तत्कालीन स्वायत्त शासन राज्यमंत्री तकीउद्दीन, ट्रस्टी महिपाल गुप्ता, आनंद अवस्थी तथा जयपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व आयुक्त दिनेश गोयल के खिलाफ ट्रस्ट को १२ हजार ५०० वर्ग मीटर जमीन आवंटित करने के मामले में मामला दर्ज कर जांच गुप्तचर विभाग (अपराध) को सौंपी गई है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर जयपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद गिरी ने इस प्रकरण की दुबारा सुनवाई कर गत ६ मई को पुलिस में मुकदमा दर्ज कर छह जुलाई तक जांच के निष्कर्ष अदालत को बताने के निर्देश दिये थे।
ट्रस्ट को १२५०० वर्ग मीटर जमीन प्राधिकरण द्वारा १८ मई २००३ में आवंटित की थी लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं लिया था।
गांधीनगर पुलिस थाने में मुख्यमंत्री गहलोत, तत्कालीन स्वायत्त शासन राज्यमंत्री तकीउद्दीन, ट्रस्टी महिपाल गुप्ता, आनंद अवस्थी तथा जयपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व आयुक्त दिनेश गोयल के खिलाफ ट्रस्ट को १२ हजार ५०० वर्ग मीटर जमीन आवंटित करने के मामले में मामला दर्ज कर जांच गुप्तचर विभाग (अपराध) को सौंपी गई है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर जयपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद गिरी ने इस प्रकरण की दुबारा सुनवाई कर गत ६ मई को पुलिस में मुकदमा दर्ज कर छह जुलाई तक जांच के निष्कर्ष अदालत को बताने के निर्देश दिये थे।
ट्रस्ट को १२५०० वर्ग मीटर जमीन प्राधिकरण द्वारा १८ मई २००३ में आवंटित की थी लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं लिया था।
अफसरशाही में मारा गया किसान
रायपुर. अभनपुर इलाके के ग्राम सिंगारभाठा के किसान सुरेश यादव ने आत्महत्या इसलिए की क्योंकि उसकी जमीन बंदोबस्त में निकल गई और अफसर इस त्रुटि को सुधारने के लिए तैयार नहीं थे। उनकी नहीं सुनी, इसलिए उसने आत्महत्या कर ली।
मामला 16 मार्च का है। सुरेश यादव की दो एकड़ जमीन बंदोबस्त में दूसरे के हिस्से में चली गई। सुरेश ने तहसीलदार यामिनी पांडे के पास आवदेन देकर बंदोबस्त दुरुस्त करने की गुहार लगाई। उसने कई चक्कर लगाए, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। तहसीलदार ने उसके आवेदन पर ध्यान नहीं दिया। सुरेश ने राजस्व निरीक्षक राजेंद्र चौधरी से भी कई बार आग्रह किया, लेकिन वह भी बंदोबस्त निरीक्षण के लिए नहीं गए।
इसी दौरान सुश्री पांडे का तबादला हो गया। नए तहसीलदार बी जंघेल आए, लेकिन सुरेश की समस्या यथावत रही। दफ्तर के बाबुओं ने भी सुरेश को चक्कर कटवाना शुरू कर दिया। महीनों ऐसा ही सिलसिला चलता रहा। आखिरकार 16 मार्च को उसने आत्महत्या कर ली। इन सब बातों का खुलासा जांच में हुआ है।
मामला 16 मार्च का है। सुरेश यादव की दो एकड़ जमीन बंदोबस्त में दूसरे के हिस्से में चली गई। सुरेश ने तहसीलदार यामिनी पांडे के पास आवदेन देकर बंदोबस्त दुरुस्त करने की गुहार लगाई। उसने कई चक्कर लगाए, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। तहसीलदार ने उसके आवेदन पर ध्यान नहीं दिया। सुरेश ने राजस्व निरीक्षक राजेंद्र चौधरी से भी कई बार आग्रह किया, लेकिन वह भी बंदोबस्त निरीक्षण के लिए नहीं गए।
इसी दौरान सुश्री पांडे का तबादला हो गया। नए तहसीलदार बी जंघेल आए, लेकिन सुरेश की समस्या यथावत रही। दफ्तर के बाबुओं ने भी सुरेश को चक्कर कटवाना शुरू कर दिया। महीनों ऐसा ही सिलसिला चलता रहा। आखिरकार 16 मार्च को उसने आत्महत्या कर ली। इन सब बातों का खुलासा जांच में हुआ है।
Saturday, May 9, 2009
वरुण गाँधी को राहत, रासुका खारिज
वरुण गाँधी को राहत प्रदान करते हुए उत्तरप्रदेश के एक सलाहकार बोर्ड ने कथित रूप से घृणा फैलाने वाले भाषणों के मामले में कठोर रासुका कानून के तहत भाजपा के युवा नेता की गिरफ्तारी को एक फैसले में अमान्य ठहराया है तथा इस निर्णय को मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ माना जा रहा है।
बोर्ड ने कहा कि उसे वरुण के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाए जाने का न तो कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक आधार मिला न ही वह पीलीभीत जिला मजिस्ट्रेट के सपष्टीकरण से संतुष्ट हैं।
उत्तरप्रदेश के गृह सचिव जावेद अहमद ने बताया कि वरुण गाँधी के खिलाफ रासुका लगाए जाने को बोर्ड ने अमान्य करार दिया है। उप्र सरकार ने बोर्ड की सिफारिश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय किया है।
अतिरिक्त कैबिनेट सचिव विजय शंकर पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार सलाहकार बोर्ड के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। इस बीच उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा कि आदेश राज्य सरकार पर बाध्यकारी है।
पीलीभीत से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी 29 वर्षीय वरुण जेल में करीब तीन हफ्ते गुजारने के बाद उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत फिलहाल पैरोल पर हैं। वे 16 अपैल को एटा जेल से रिहा हुए थे। उनकी पैरोल की अवधि 14 मई को समाप्त हो रही है।
वरुण को यह राहत तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड ने दी है, जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश प्रदीप कांत कर रहे थे। बोर्ड ने उप्र सरकार द्वारा रासुका के तहत वरुण की हिरासत के मामले में गौर किया था। वरुण व्यक्तिगत तौर पर बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए थे।
भाजपा ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे साफ हो गया है कि वरुण पर रासुका लगाए जाने का कदम राजनीति से प्रेरित है। राहुल के समर्थकों ने बोर्ड का आदेश आने के बाद पीलीभीत में जश्न मनाया।
वरुण सलाहकार बोर्ड के समक्ष 28 अपैल को पेश हुए और उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सीडी के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई उससे छेड़छाड़ की गई है।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बोर्ड के आदेश ने संप्रग सरकार और इसकी वोट बैंक की राजनीति को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है।
कांगेस ने इस मामले को अधिक तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि वरुण द्वारा उच्चतम न्यायालय को अच्छे व्यवहार का शपथ-पत्र देने के बाद इस मामले की प्रासंगिकता खत्म हो गई है। कांगेस नेता कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि वरुण गाँधी के खिलाफ कठोर कानून लगाने के उप्र सरकार के फैसले से केन्द्र का कोई लेना-देना नहीं है।
सरकार फैसले को चुनौती देगी : उत्तरप्रदेश सरकार ने पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार वरुण गाँधी के विरुद्ध लगाए गए रासुका को अवैध करार देने के राज्य सलाहकार बोर्ड के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है।
ऐतिहासिक फैसला : भाजपा नेता वरुण गाँधी ने कहा कि उत्तरप्रदेश सलाहकार बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ रासुका को अमान्य करार दिए जाने से केंद्र और उत्तरप्रदेश सरकार की राजनीतिक फायदे के लिए की गयी साजिश उजागर होती है। वरुण ने कहा कि मैंने न्याय व्यवस्था में पूरी तरह आस्था जताई थी, जो आज पूरी तरह प्रमाणित हुई है।
बोर्ड ने कहा कि उसे वरुण के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाए जाने का न तो कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक आधार मिला न ही वह पीलीभीत जिला मजिस्ट्रेट के सपष्टीकरण से संतुष्ट हैं।
उत्तरप्रदेश के गृह सचिव जावेद अहमद ने बताया कि वरुण गाँधी के खिलाफ रासुका लगाए जाने को बोर्ड ने अमान्य करार दिया है। उप्र सरकार ने बोर्ड की सिफारिश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय किया है।
अतिरिक्त कैबिनेट सचिव विजय शंकर पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार सलाहकार बोर्ड के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। इस बीच उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा कि आदेश राज्य सरकार पर बाध्यकारी है।
पीलीभीत से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी 29 वर्षीय वरुण जेल में करीब तीन हफ्ते गुजारने के बाद उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत फिलहाल पैरोल पर हैं। वे 16 अपैल को एटा जेल से रिहा हुए थे। उनकी पैरोल की अवधि 14 मई को समाप्त हो रही है।
वरुण को यह राहत तीन सदस्यीय सलाहकार बोर्ड ने दी है, जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश प्रदीप कांत कर रहे थे। बोर्ड ने उप्र सरकार द्वारा रासुका के तहत वरुण की हिरासत के मामले में गौर किया था। वरुण व्यक्तिगत तौर पर बोर्ड के समक्ष उपस्थित हुए थे।
भाजपा ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे साफ हो गया है कि वरुण पर रासुका लगाए जाने का कदम राजनीति से प्रेरित है। राहुल के समर्थकों ने बोर्ड का आदेश आने के बाद पीलीभीत में जश्न मनाया।
वरुण सलाहकार बोर्ड के समक्ष 28 अपैल को पेश हुए और उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सीडी के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई उससे छेड़छाड़ की गई है।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बोर्ड के आदेश ने संप्रग सरकार और इसकी वोट बैंक की राजनीति को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है।
कांगेस ने इस मामले को अधिक तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि वरुण द्वारा उच्चतम न्यायालय को अच्छे व्यवहार का शपथ-पत्र देने के बाद इस मामले की प्रासंगिकता खत्म हो गई है। कांगेस नेता कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि वरुण गाँधी के खिलाफ कठोर कानून लगाने के उप्र सरकार के फैसले से केन्द्र का कोई लेना-देना नहीं है।
सरकार फैसले को चुनौती देगी : उत्तरप्रदेश सरकार ने पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार वरुण गाँधी के विरुद्ध लगाए गए रासुका को अवैध करार देने के राज्य सलाहकार बोर्ड के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है।
ऐतिहासिक फैसला : भाजपा नेता वरुण गाँधी ने कहा कि उत्तरप्रदेश सलाहकार बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ रासुका को अमान्य करार दिए जाने से केंद्र और उत्तरप्रदेश सरकार की राजनीतिक फायदे के लिए की गयी साजिश उजागर होती है। वरुण ने कहा कि मैंने न्याय व्यवस्था में पूरी तरह आस्था जताई थी, जो आज पूरी तरह प्रमाणित हुई है।
विद्यार्थी मित्रों को नहीं हटाए
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में अनुबंध पर कार्यरत विद्यार्थी मित्रों के मामले में शुक्रवार को निर्णय देते हुए राज्य सरकार को इन्हें पद से नहीं हटाने का आदेश दिया है।
आदेश में कहा कि विद्यार्थी मित्रों को राज्य सरकार तब तक नहीं हटाए जब तक कि उनकी जगह पर आरपीएससी से चयनित शिक्षक या विभागीय पदोन्नति के जरिए या स्थानांतरित होकर आए किन्हीं अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती।
न्यायाधीश प्रेम शंकर आसोपा ने यह आदेश दांतारामगढ़ निवासी महेन्द्र कुमार व 640 अन्य याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया। न्यायाधीश ने राज्य सरकार के 24 फरवरी 09 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसके तहत 15 अप्रैल से विद्यार्थी मित्रों को हटाने के निर्देश दिए थे। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के मामले में ही प्रभावी रहेंगे।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया ने बताया कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी मित्र योजना के तहत बारह हजार से अधिक अनुबंधित विद्यार्थी मित्रों की नियुक्ति की थी। अनुबंध की शर्त थी कि जब तक आरपीएससी से शिक्षकों की भर्ती नहीं होती या अन्य शिक्षक स्थानांतरित होकर नहीं आ जाते ये काम करते रहेंगे।
इनका अनुबंध 28 फरवरी, 09 तक था, जिसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया। लेकिन बाद में शिक्षा विभाग ने 24 फरवरी को इन्हें नोटिस जारी कर कहा कि उन्हें 15 अप्रैल से हटाया जा रहा है। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि अनुबंध की शर्त के अनुसार विद्यार्थी मित्र जिन पदों पर काम कर रहे हैं उन पर अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है और ये पद खाली चल रहे हैं।
यदि उन्हें बीच सत्र में ही हटाया जाता है तो शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमत होते हुए पूर्व में 11 अप्रैल को विद्यार्थी मित्रों को हटाने पर रोक लगा दी। इसके बाद अंतिम आदेश के जरिए शुक्रवार को याचिकाओं को स्वीकार कर इनकी जगह पर तय शर्तो के तहत अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने तक इन्हें नहीं हटाने के निर्देश दिए।
आदेश में कहा कि विद्यार्थी मित्रों को राज्य सरकार तब तक नहीं हटाए जब तक कि उनकी जगह पर आरपीएससी से चयनित शिक्षक या विभागीय पदोन्नति के जरिए या स्थानांतरित होकर आए किन्हीं अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती।
न्यायाधीश प्रेम शंकर आसोपा ने यह आदेश दांतारामगढ़ निवासी महेन्द्र कुमार व 640 अन्य याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया। न्यायाधीश ने राज्य सरकार के 24 फरवरी 09 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसके तहत 15 अप्रैल से विद्यार्थी मित्रों को हटाने के निर्देश दिए थे। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के मामले में ही प्रभावी रहेंगे।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता धर्मवीर ठोलिया ने बताया कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी मित्र योजना के तहत बारह हजार से अधिक अनुबंधित विद्यार्थी मित्रों की नियुक्ति की थी। अनुबंध की शर्त थी कि जब तक आरपीएससी से शिक्षकों की भर्ती नहीं होती या अन्य शिक्षक स्थानांतरित होकर नहीं आ जाते ये काम करते रहेंगे।
इनका अनुबंध 28 फरवरी, 09 तक था, जिसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया। लेकिन बाद में शिक्षा विभाग ने 24 फरवरी को इन्हें नोटिस जारी कर कहा कि उन्हें 15 अप्रैल से हटाया जा रहा है। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि अनुबंध की शर्त के अनुसार विद्यार्थी मित्र जिन पदों पर काम कर रहे हैं उन पर अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है और ये पद खाली चल रहे हैं।
यदि उन्हें बीच सत्र में ही हटाया जाता है तो शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमत होते हुए पूर्व में 11 अप्रैल को विद्यार्थी मित्रों को हटाने पर रोक लगा दी। इसके बाद अंतिम आदेश के जरिए शुक्रवार को याचिकाओं को स्वीकार कर इनकी जगह पर तय शर्तो के तहत अन्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने तक इन्हें नहीं हटाने के निर्देश दिए।
जयपुर के वैज्ञानिक की खोज
टोकियो (जापान) विश्वविद्यालय के जयपुर निवासी प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. मनीष बियानी ने प्रयोगशाला में ऐसी ‘ब्लड चैकअप चिप’ ईजाद की है, जिसके जरिए व्यक्ति घर पर ही अपने खून की जांच कंप्यूटर से करने के बाद चिकित्सक से संपर्क कर सकता है।
इन दिनों विद्याधर नगर स्थित अपने घर आए डॉ. बियानी ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस आधुनिक तकनीक को भारत में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि जापान में मरीजों पर अध्ययन के बाद इसका उपयोग शुरू कर दिया है तथा वहां की सरकार से पेटेंट भी करा लिया गया है।
इस तरह होगी खून की जांच : 2 3 2 सेमी के आकार की कांच की बनी पेनलेस निडिल (दर्द-रहित सुई) को शरीर में चुभाकर आवश्यक खून (एक बूंद का 10वां हिस्सा यानी लगभग 6 माइक्रो लीटर) निकालते हैं।
यह खून निडिल से जुड़े माइक्रोचैनल से होता हुआ चिप के माइक्रोचेम्बर्स में प्रवेश करता है, जिनमें बायोसेंसर्स लगे रहते हैं, जो खून में उपस्थित ग्लूकोज, यूरिया, नाइट्रोजन, आयरन आदि का विश्लेषण करते हैं। इसके बाद चिप को कंप्यूटर में लगाकर ये जानकारियां देख सकते हैं और इंटरनेट के जरिए डॉक्टर को भेज सकते हैं।
चिप के फायदे
* कोई साइड इफेक्ट नहीं
* शरीर में चुभाने पर दर्द नहीं
* बार-बार डॉक्टर के चक्कर काटने की आवश्कता नहीं
* जांच रिपोर्ट सिर्फ 10 से 15 मिनट में
* लैब में जाने की जरूरत नहीं
डॉ. बियानी ने लैब में ब्लड चैकअप चिप बनाकर राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। इस चिप से होने वाले फायदों का परीक्षण करके उसका उपयोग करने का प्रयास किया जाएगा, पर इस संबंध में राज्य व केन्द्र सरकार के सहयोग की जरूरत होगी।
इन दिनों विद्याधर नगर स्थित अपने घर आए डॉ. बियानी ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस आधुनिक तकनीक को भारत में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि जापान में मरीजों पर अध्ययन के बाद इसका उपयोग शुरू कर दिया है तथा वहां की सरकार से पेटेंट भी करा लिया गया है।
इस तरह होगी खून की जांच : 2 3 2 सेमी के आकार की कांच की बनी पेनलेस निडिल (दर्द-रहित सुई) को शरीर में चुभाकर आवश्यक खून (एक बूंद का 10वां हिस्सा यानी लगभग 6 माइक्रो लीटर) निकालते हैं।
यह खून निडिल से जुड़े माइक्रोचैनल से होता हुआ चिप के माइक्रोचेम्बर्स में प्रवेश करता है, जिनमें बायोसेंसर्स लगे रहते हैं, जो खून में उपस्थित ग्लूकोज, यूरिया, नाइट्रोजन, आयरन आदि का विश्लेषण करते हैं। इसके बाद चिप को कंप्यूटर में लगाकर ये जानकारियां देख सकते हैं और इंटरनेट के जरिए डॉक्टर को भेज सकते हैं।
चिप के फायदे
* कोई साइड इफेक्ट नहीं
* शरीर में चुभाने पर दर्द नहीं
* बार-बार डॉक्टर के चक्कर काटने की आवश्कता नहीं
* जांच रिपोर्ट सिर्फ 10 से 15 मिनट में
* लैब में जाने की जरूरत नहीं
डॉ. बियानी ने लैब में ब्लड चैकअप चिप बनाकर राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। इस चिप से होने वाले फायदों का परीक्षण करके उसका उपयोग करने का प्रयास किया जाएगा, पर इस संबंध में राज्य व केन्द्र सरकार के सहयोग की जरूरत होगी।
Friday, May 8, 2009
मुकद्दमों की स्थिति संबंधित सूचना सेवा का उद्घाटन
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक वर्मा ने 6 मई को, उच्च न्यायालय की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में, मुकद्दमों की स्थिति संबंधित सूचना सेवा का उद्घाटन किया। हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश प्रकाश टाटिया के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस सेवा के उद्घाटन के मौके पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश, सभी रजिस्ट्रार, अधिवक्ता व सेवा से संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
न्यायालय सूत्रों द्वारा मीडिया को बताया गया है कि कि यह सेवा तीन टेलीफोन नंबर- 2540385, 2540386 तथा 2540397 पर उपलब्ध होगी। राजस्थान हाईकोर्ट केस स्टेटस सूचना सेवा प्रारंभ करने वाले उच्च न्यायालयों में अग्रणी है। इस सेवा के माध्यम से मुख्य पीठ में लंबित लगभग एक लाख प्रकरणों में से लंबित, निस्तारित होने वाले, उनकी पूर्व की और आगामी तिथि के बारे में सूचना प्राप्त की जा सकती है।
न्यायालय सूत्रों ने बताया कि यह सेवा सूचना के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस सेवा का उपयोग करने वाले केवल इसी पर आधारित नहीं रहें। इसके लिए उच्च न्यायालय या एनआईसी किसी प्रकार से दायित्व के अधीन नहीं होगा।
न्यायालय सूत्रों द्वारा मीडिया को बताया गया है कि कि यह सेवा तीन टेलीफोन नंबर- 2540385, 2540386 तथा 2540397 पर उपलब्ध होगी। राजस्थान हाईकोर्ट केस स्टेटस सूचना सेवा प्रारंभ करने वाले उच्च न्यायालयों में अग्रणी है। इस सेवा के माध्यम से मुख्य पीठ में लंबित लगभग एक लाख प्रकरणों में से लंबित, निस्तारित होने वाले, उनकी पूर्व की और आगामी तिथि के बारे में सूचना प्राप्त की जा सकती है।
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