पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Thursday, November 26, 2009

पैसे के लेन-देन में वकील-मुंशी भिड़े, बार एसोसिएशन भी मुंशियों के साथ


पानीपत जिला अदालत परिसर में बुधवार को पैसे के लेनदेन को लेकर वकीलों और मुंशी के बीच जमकर मारपीट हुई। इस मामले के बाद जहां पूरी अदालत के मुंशियों ने लामबंद होकर आंदोलन करने का मन बनाया है, वहीं बार एसोसिएशन के प्रधान और सचिव ने भी मुंशियों का साथ देने की बात कही है। जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर लगभग 12 बजे जिला अदालत में एसडीएम कोर्ट के सामने बैठे मामराज रावल, अनिल रावल का मुंशी ईश्वर शर्मा के साथ झगड़ा हो गया।

अन्य वकीलों तथा मुंशियों के बीच बचाव के बाद मामले को शांत कराया गया। इसके बाद जिला बार मुंशी एसोसिएशन के आह्वान पर सभी मुंशियों ने बार रूम में बैठक की। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान रामफल जौंधन ने बताया गया कि ईश्वर शर्मा को मामराज रावल और अनिल रावल से पंद्रह हजार रुपए लेने थे। ये रुपए ईश्वर ने एलएलबी के कोर्स में दाखिले के नाम पर दिए थे।

दाखिला न मिलने के बाद जब ईश्वर ने अपने पैसे मांगे तो उक्त वकीलों ने किस्तों में पैसे देने की हामी भरी थी। बुधवार को उक्त वकीलों ने ईश्वर शर्मा को फोन करके पैसे देने के बहाने से बुलाया तथा उसके साथ मारपीट की। बैठक में उपस्थित सभी मुंशियों ने प्रस्ताव पारित करते हुए मुंशी ईश्वर के साथ हुई मारपीट में कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया।

भीलवाड़ा में वकील बेमियादी धरने पर


एडवोकेट अमित यादव आत्महत्या प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बुधवार को वकील समुदाय ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। सातवें दिन जिले भर में न्यायिक कार्य का बहिष्कार जारी रहने से अदालतें सूनी रही।

संघर्ष समिति की बैठक के बाद वकीलों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया। सोमवार से पूरे राज्य के न्यायालयों में काम स्थगित रखा जाएगा। गुरुवार को भी कोर्ट के बाहर वकील धरना देंगे। बुधवार को आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए संघर्ष समिति की बैठक संयोजक अरूण व्यास के नेतृत्व में हुई।

लगभग डेढ़ घंटे चली बैठक में सर्वसम्मति से आरोपी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक अनिश्चतकालीन काम का बहिष्कार करने का फैसला किया गया। संयोजक व्यास ने बताया कि सोमवार तक गिरफ्तारी नहीं होने पर राज्यभर की बार एसोसिएशन आंदोलन में सहयोग करेगी। सभी जगह न्यायिक कार्य का बहिष्कार रहेगा। यहां गुरुवार से कोर्ट के बाहर धरना दिया जाएगा। यहां गुरुवार से कोर्ट के बाहर धरना दिया जाएगा।

सोहराबुद्दीन मुठभेड़: कोर्ट का सुनवाई से इनकार


सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस द्वारा सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और एक अन्य गवाह की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या के मुकदमे का सामना कर रहे एक आईपीएस अधिकारी द्वारा पेश जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति पी सताशिवम और न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की पीठ ने कहा कि एम एन दिनेश की याचिका पर सुनवाई करना उचित नहीं होगा क्योंकि न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी और एच एल दत्तू की एक अन्य पीठ ने इस हत्याकांड की सीबीआई-एसआईटी जांच के लिए याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

शीर्ष न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता यू यू ललित की याचिका को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इस मामले में कम से कम गुजरात सरकार को एक नोटिस ही दे दिया जाए क्योंकि इसके फैसले में कुछ समय और लगेगा।

सरकार की ओर से सहायता के नियुक्त वकील और पीड़ितों के परिजनों की ओर से पेश महाधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने इससे पहले गोधरा के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए सीबीआई या एसआईटी को मामला सौंपने की मांग की थी जिसके बाद पीठ ने इस संबंध में फैसला सुरक्षित रख लिया।

सोहराबुद्दीन, कौसर बी और उनके मित्र तुलसीराम प्रजापति को गुजरात और आंध्र प्रदेश की पुलिस ने एक संयुक्त अभियान के तहत हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रही बस से 22 नवंबर 2005 को उतार लिया था।

इस मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी आरोपी हैं जिनमें गुजरात कैडर के डी जी बंजारा [उप महानिरीक्षक], राजकुमार पांडियान [पुलिस अधीक्षक] और राजस्थान कैडर के दिनेश शामिल हैं।

शुरूआत में गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि सोहराबुद्दीन रंगदारी में लिप्त एक अपराधी था और उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में लगभग 54 मामले दर्ज थे। ऐसा दावा किया गया था गुजरात पुलिस और राजस्थान पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया था।

पत्रकारों का भी होना चाहिए प्रैक्टिस लाइसेंस:लिब्रहान


लिब्रहान आयोग ने वकीलों और डाक्टरों की तर्ज पर पत्रकारों को भी लाइसेंस देने की सिफारिश करते हुए कहा है कि प्रेस और मीडिया के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए एक न्यायाधिकरण या नियामक इकाई का गठन किया जाना चाहिए।
कार्रवाई रपट (एटीआर) में लिब्रहान आयोग की रपट के हवाले से कहा गया कि भारतीय चिकित्सा परिषद या बार काउंसिल आफ इंडिया की तर्ज पर मीडिया के लिए भी ऐसी इकाई के गठन की सख्त आवश्यकता है जो पत्रकारों या अखबारों के खिलाफ किसी शिकायत के बारे में फैसला कर सके।
सरकार ने मीडिया के बारे में लिब्रहान आयोग की सिफारिशों से सहमति जताते हुए कहा कि वह सूचना प्रसारण मंत्रालय और कानून मंत्रालय से कहेगी कि इस तरह के न्यायाधिकरण या नियामक इकाई के गठन की व्यवहारिकता और आवश्यकता के बारे में अध्ययन करे। आयोग ने कहा कि स्वतंत्र समाज में मीडिया के महत्व और श्रेष्ठता से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि जबर्दस्त विशेषाधिकार पाये इतिहास के इन रचनाकारों को उन आम आदमियों के प्रति सजग रहना होगा, जिनका उनमें विश्वास है। आयोग ने इस बात पर चिन्ता जाहिर की कि भारतीय प्रेस परिषद को शिकायतों की सुनवाई और दोषी पत्रकारों को दंडित करने का कोई अधिकार नहीं है जो पीत और शरारतपूर्ण पत्रकारिता में लिप्त हैं। लिब्रहान आयोग ने यह सिफारिश भी की है कि देश में मीडिया की निगरानी के लिए एक वैधानिक इकाई का गठन किया जाना चाहिए।
रपट में कहा गया कि इस बात की सख्त आवश्यकता है कि पत्रकारों को वकीलों और चिकित्सकों जैसे पेशेवरों की तर्ज पर लाइसेंस दिये जाएं और पेशेवर गड़बड़ी पाये जाने पर उनके खिलाफ निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके।

छेड़छाड़ करने वाले युवकों की याचिका नामंजूर


जेएनयू कैंपस में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी चार युवकों की जमानत याचिका अदालत ने नामंजूर  कर दी हैं। पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविन्द्रा सिंह की अदालत ने आरोपी नीतिन कपूर, गगन कुमार, अंकित नंदा और अमित चौहान की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामला जांच के प्रथम चरण में है और पीड़ितों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है।

ऐसे में आरोपियों को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। वहीं, अदालत ने चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों का कहना था कि छेड़छाड़ का आरोप जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए उनके मुवक्किलों को जमानत पर रिहा कर दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस पीड़ित छात्रओं के बयान दर्ज कर रही है। लिहाजा ऐसे में आरोपियों को जमानत पर छोड़े जाने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि युवकों को रविवार को शराब पीकर लड़कियों के साथ जेएनयू कैंपस में छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों द्वारा कैंपस में छेड़छाड़ करने पर छात्रों ने विरोध किया। पुलिस ने हंगामा शांत करने के लिए लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे।

Monday, November 23, 2009

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर रही विजेता


भोपाल नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) में शनिवार से चल रहे14 वें स्टेट्सन इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन का रविवार को समापन हुआ। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर ने इस प्रतियोगिता में बाजी मारी।

स्टेट्स यूनिवर्सिटी(फ्लोरिडा) में आयोजित 14 वें इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेने के लिन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और रनरअप टीम अमेटी लॉ स्कूल, नई दिल्ली की टीम फ्लोरिडा जाएगी।

भारत से नार्थ राउंड में ये दोनों टीमें फ्लोरिडा में भारत का प्रतिनिधत्व करेंगी। एनएलआईयू में शनिवार से चल रहे इस मूट कोर्ट के नार्थ राउंड में इन दो टीमों ने अन्य 14 टीमों को हराते हुए बाजी मारी।

फाइनल राउंड में पहुंची इन दोनों टीमों के स्पीकर्स ने जजों के क्रास क्वेश्चन के सही जवाब दिए। संस्थान के सभागार में शाम पांच बजे तक चले फाइनल राउंड को देखने के लिए सभी संस्थानों के प्रतिभागी मौजूद थे।

इस मौके पर मद्रास यूनिवर्सिटी से आए इंटरनेशनल लॉ विषय के प्रोफेसर डेविड एम्ब्रोस ने कहा कि प्रतिभागियों ने अच्छी प्रस्तुति दी लेकिन इंटरनेशनल लॉ में उन्हें और अधिक रिसर्च और गहन अध्ययन करने की जरूरत है।

इस मौके पर भोज विश्वविद्यालय के प्रो.एसके सिंह, डॉ. लूथर रंगरेजी सहित मप्र राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस एनके जैन, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के पूर्व अध्यक्ष जटिस्ट वीके अग्रवाल सहित संस्थान के निदेशक प्रो.एसएस सिंह उपस्थित थे।

डॉक्टर को भारी पड़ी कोर्ट की अवमानना


पानीपत ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट इन चीफ आरके वाट्स की अदालत में शनिवार को एक सरकारी डाक्टर को अदालत की अवमानना करना भारी पड़ गया। अदालत ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस थमा दिया। यही नहीं, न्यायाधीश के आदेश के बाद डाक्टर को लगभग 5 घंटे तक पुलिस कस्टडी में भी रखा गया।

जानकारी के अनुसार शनिवार को मेडिकल ऑफिसर आलोक जैन की आरके वाट्स की अदालत में गवाही थी। डा. जैन सुबह लगभग 10 बजे ही अदालत पहुंच गए। अदालत में पहुंचने के बाद डाक्टर ने नायब कोर्ट जोगेंद्र सिंह को सरकारी वकील को बुलाकर लाने के लिए कहा। इसके बाद जैसे ही न्यायाधीश आरके वाट्स ने अपनी कुर्सी संभाली, उसी समय डा. जैन ने उन्हें जल्दी काम निपटा कर फारिग करने को कहा।

इस पर न्यायाधीश ने डा. जैन को बदतमीजी से पेश न आने की चेतावनी दी। इस पर डाक्टर और न्यायाधीश के बीच बहस बढ़ती गई। इसके बाद न्यायाधीश आरके वाट्स ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस जारी करने तथा पुलिस कस्टडी में लिए जाने के आदेश दे दिए। इस कार्रवाई के तहत डा. आलोक जैन लगभग 2:30 बजे तक अदालत में पुलिस कस्टडी के बीच रहे। डाक्टर द्वारा माफी मांगने के बाद ही न्यायाधीश ने डा. आलोक जैन को जाने दिया।

अदालत मकान मालिक को नहीं दे सकती निर्देश


सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अदालत मकान मालिक को इस बात का निर्देश नहीं दे सकती है कि उसे अपने मकान के किस हिस्से का वाणिज्यिक और किस हिस्से का रिहायशी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मकान मालिक उदय शंकर उपाध्याय की अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। हालांकि न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू और न्यायाधीश आर एम लोढा की खण्डपीठ ने किराएदार को हिस्सा खाली करने के लिए सालभर की मोहलत दे दी।

कहा कि यह सुविदित है कि दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सामान्यत: भूतल पर ही संचालित की जाती हैं ताकि उपभोक्ता आसानी से वहां पहुंच सके लेकिन इसके बावजूद अदालत मकान मालिक को यह निर्देश नहीं दे सकती है कि वह अपनी व्यावसायिक गतिविधियां किस तल पर संचालित करे। यह तय करने का हक पूरी तरह मकान मालिक को है। हालांकि खण्डपीठ ने किरायेदार नवीन माहेश्वरी को विवादित कमरे/तल को खाली करने के लिए सालभर की मोहलत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट में 53221 मामले लंबित


देश के उच्चतम न्यायालय में इस समय 53221 और विभिन्न उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में 31139022 मामले लंबित हैं।

यह जानकारी केन्द्रीय कानून मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने सोमवार को राज्यसभा को दी। उन्होंने बताया कि 30 जून, 2009 को देश के उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में 31139022 मामले लंबित थे। उन्होंने टीटीवी धिनकरन, जयंती नटराजन और जनार्दन वाघमरे के सवालों के लिखित जवाब में बताया कि उच्चतम न्यायालय में 30 सितंबर 2009 की स्थिति के मुताबिक 53221 मामले लंबित थे।

मोइली ने बताया कि इस समय सरकार देश में न्यायिक सुधारों के लिए एक कार्ययोजना को लागू करने का इरादा कर रही है, जिसका उद्देश्य अन्य बातों के साथ देश में लंबित मामलों को कम करना और त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है।

अमित यादव प्रकरण पर गतिरोध खत्म


भीलव़ाडा के सुभाष नगर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस प्रत़ाडना से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले वकील अमित यादव का शव आज पांचवे दिन पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार भीलव़ाडा जिला अभिभाषण संघ के अध्यक्ष गोपाल अजमेरा और बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश श्रीमाली की राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) कन्हैया लाल बैरवा, अजमेर के संभागीय आयुक्त समेत अन्य अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद वकील अमित यादव के शव का पोस्टमार्टम करवाने का निर्णय किया गया।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने अमित यादव का शव अपने कब्जे में लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचा दिया है, जहां मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम के बाद अमित का अंतिम संस्कार होगा। श्रीमाली ने पत्रकारों से बातचीत में वन मंत्री राम लाल की भूमिका पर असंतोष जताया और कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने की घोषणा की। गौरतलब है कि भीलव़ाडा के वकील अमित यादव को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही अमित यादव का पोस्टमार्टम करवाने की मांग पर अडिग थे।

Friday, November 20, 2009

वकील द्वारा खुदकुशी के मामले में चीफ जस्टिस कोर्ट में हंगामा।


राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में शुक्रवार को वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट के बाहर जमकर हंगामा किया। इससे मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला को सुनवाई छोड़कर अपने कक्ष में जाना पड़ा। वकीलों ने पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध भीलवाड़ा के वकील अमित यादव द्वारा खुदकुशी किए जाने के विरोध में शुक्रवार को कार्य बहिष्कार का आह्वान किया था। शुक्रवार सुबह मुख्य न्यायाधीश ने जैसे ही सुनवाई शुरू की कुछ ही देर बाद उच्च न्यायालय के कुछ वकील हंगामा करते हुए वहां जयपुर/जोधपुर/अजमेर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में शुक्रवार को वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट के बाहर जमकर हंगामा किया। इससे मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला को सुनवाई छोड़कर अपने कक्ष में जाना पड़ा। वकीलों ने पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध भीलवाड़ा के वकील अमित यादव द्वारा खुदकुशी किए जाने के विरोध में शुक्रवार को कार्य बहिष्कार का आह्वान किया था। शुक्रवार सुबह मुख्य न्यायाधीश ने जैसे ही सुनवाई शुरू की कुछ ही देर बाद उच्च न्यायालय के कुछ वकील हंगामा करते हुए वहां पहंुच गए। वकीलों के उत्तेजित तेवरों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मौजूद एक वकील को बचाते हुए बाहर निकाला गया। उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने इस प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की है।

पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध भीलवाड़ा के वकील अमित यादव द्वारा खुदकुशी किए जाने के विरोध में राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जोधपुर और जयपुर पीठ से जुडे वकीलों ने आज न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। जोधपुर में वकीलों के न्यायिक कार्य के बहिष्कार से अदालतों में कामकाज ठप रहा। अजमेर में वकीलों की सभा में इस प्रकरण की भत्र्सना करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच की मांग की गई। पुलिस महानिरीक्षक द्वारा अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर कुमार को जांच सौंपे जाने को सरकारी ढोंग करार दिया गया। सभा के बाद वकीलों के समूह ने अतिरिक्त संभागीय आयुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, परिजनों को 15 लाख का मुआवजा, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने तथा न्यायिक जांच के साथ भविष्य में किसी वकील की गिरफ्तारी से पूर्व बार के अध्यक्ष से अनुमति लेने की मांग की गई है। राजस्व बार ने भी ज्ञापन सौंपा।

धरना, बाजार बंद
भीलवाडा में युवा वकील की रहस्यमय स्थिति में हुई मौत से गुस्साए वकीलों ने आज दूसरे दिन भी मृतक का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। घटना के विरोध में शहर के बाजार बंद रहे और वकीलों ने कोटा-भीलवाडा मार्ग जाम कर दिया। जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता मृतक अमित यादव एडवोकेट के घर के बाहर धरने पर बैठे हैं तथा पुलिस को उसके घर के नजदीक भी नहीं जाने दिया जा रहा। अजमेर रेंज के महानिरीक्षक रामफल सिंह भीलवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं लेकिन वकील समुदाय किसी की सुनने को तैयार नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता रवि डांगी ने बताया कि वकील पुलिस अधीक्षक पी. रामजी और उपाधीक्षक (सदर) रामकुमार कस्बां को भीलवाड़ा से हटाने तथा सीआई ओमप्रकाश वर्मा एवं चार अन्य पुलिस कर्मियों की भारतीय दंड संहिता की धारा 306 में गिरफ्तारी व मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

अजमेर के संभागीय आयुक्त अतुल शर्मा भी आज भीलवाड़ा पहुंचे हैं। वह सम्पूर्ण घटनाक्रम की जानकारी लेकर इस मामले में सरकार तथा मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे। बार एसोसिएशन ने आज अचानक जनता से बाजारों को बंद रखने की अपील की। इस आह्वान के कुछ ही देर बाद सभी बाजार बंद हो गए। वकीलों ने आज भी न्यायालय का कामकाज ठप रखा। न्यायिक अधिकारी भी बार एसोसिएशन के आह्वान पर अदालतों में नहीं बैठे। गए। वकीलों के उत्तेजित तेवरों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मौजूद एक वकील को बचाते हुए बाहर निकाला गया। उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने इस प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की है।

राज्य की अदालतों में बहिष्कार
पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध भीलवाड़ा के वकील अमित यादव द्वारा खुदकुशी किए जाने के विरोध में राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जोधपुर और जयपुर पीठ से जुडे वकीलों ने आज न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। जोधपुर में वकीलों के न्यायिक कार्य के बहिष्कार से अदालतों में कामकाज ठप रहा। अजमेर में वकीलों की सभा में इस प्रकरण की भत्र्सना करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच की मांग की गई। पुलिस महानिरीक्षक द्वारा अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर कुमार को जांच सौंपे जाने को सरकारी ढोंग करार दिया गया। सभा के बाद वकीलों के समूह ने अतिरिक्त संभागीय आयुक्त को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, परिजनों को 15 लाख का मुआवजा, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी देने तथा न्यायिक जांच के साथ भविष्य में किसी वकील की गिरफ्तारी से पूर्व बार के अध्यक्ष से अनुमति लेने की मांग की गई है। राजस्व बार ने भी ज्ञापन सौंपा।

भीलवाडा में धरना, बाजार बंद
भीलवाडा में युवा वकील की रहस्यमय स्थिति में हुई मौत से गुस्साए वकीलों ने आज दूसरे दिन भी मृतक का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। घटना के विरोध में शहर के बाजार बंद रहे और वकीलों ने कोटा-भीलवाडा मार्ग जाम कर दिया। जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता मृतक अमित यादव एडवोकेट के घर के बाहर धरने पर बैठे हैं तथा पुलिस को उसके घर के नजदीक भी नहीं जाने दिया जा रहा। अजमेर रेंज के महानिरीक्षक रामफल सिंह भीलवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं लेकिन वकील समुदाय किसी की सुनने को तैयार नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता रवि डांगी ने बताया कि वकील पुलिस अधीक्षक पी. रामजी और उपाधीक्षक (सदर) रामकुमार कस्बां को भीलवाड़ा से हटाने तथा सीआई ओमप्रकाश वर्मा एवं चार अन्य पुलिस कर्मियों की भारतीय दंड संहिता की धारा 306 में गिरफ्तारी व मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

अजमेर के संभागीय आयुक्त अतुल शर्मा भी आज भीलवाड़ा पहुंचे हैं। वह सम्पूर्ण घटनाक्रम की जानकारी लेकर इस मामले में सरकार तथा मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे। बार एसोसिएशन ने आज अचानक जनता से बाजारों को बंद रखने की अपील की। इस आह्वान के कुछ ही देर बाद सभी बाजार बंद हो गए। वकीलों ने आज भी न्यायालय का कामकाज ठप रखा। न्यायिक अधिकारी भी बार एसोसिएशन के आह्वान पर अदालतों में नहीं बैठे।

‘दूसरी पत्नी’ भी अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर सकती है।।


उच्चतम न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद यदि उसकी पहली पत्नी को कोई आपत्ति नहीं है तो उसकी दूसरी पत्नी को भी सरकारी नौकरी में अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक व्यक्ति एक शादी को निभाते हुए केवल एक ही पत्नी रख सकता है और दूसरी शादी आईपीसी की धारा 494 और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 17 के तहत अपराध होगी, जिसमें सात साल तक के कड़े कारावास की सजा दी जा सकती है।

न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू और न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की पीठ ने कर्नाटक सरकार की एक अपील को खारिज करते हुए कहा कि जब दोनों पत्नी राजी हो गई हैं तो आप आपत्ति करने वाले कौन होते हैं। यदि एक पत्नी अनुकंपना नियुक्ति चाहती है और दूसरी मुआवजे संबंधी लाभ चाहती है तो आपको क्या परेशानी है।

पीठ ने राज्य सरकार द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक निर्देश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई याचिका पर आदेश जारी किया। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि आर्म्ड रिजर्व फोर्स में हैड कांस्टेबल जी. हनुमंत गोड़ा की दूसरी पत्नी लक्ष्मी की नियुक्ति पर विचार किया जाए।

दूसरी पत्नी लक्ष्मी की तरफ से वकील एम. कमरुद्दीन अदालत में आए। शीर्ष न्यायालय ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक शादी के दौरान किसी शख्स की दो पत्नियाँ नहीं हो सकतीं, इसलिए तथाकथित दूसरी पत्नी केवल पहली पत्नी के साथ सुलह करके नियुक्ति के अधिकार पर दावा नहीं कर सकती।

लंबित मुकदमों में 65 फीसदी से ज्यादा मामले सरकार के खिलाफ।


अगर आप यह सोच रहे हैं कि राजस्थान हाई कोर्ट में सबसे ज्यादा मामले अपराधियों पर चल रहे हैं, तो खुद को अपडेट कर लें। हाई कोर्ट में दाखिल एक लाख 60 हजार मामलों में से लगभग साठ फीसदी यानी 97 हजार मामले सरकार के खिलाफ हैं। कई मामलों में तो वादी-प्रतिवादी राज्य सरकार ही है। यह हाल सिर्फ राजस्थान में ही नहीं, बल्कि कर्नाटक हाई कोर्ट में तो 65 फीसदी से ज्यादा मामले सरकार के खिलाफ हैं।

हाई कोर्ट में राज्य सरकार से जुड़े सबसे ज्यादा मामले कर विभाग, गृह, वित्त, उद्योग, खान-पेट्रोलियम, वन, पीएचईडी, शिक्षा, पंचायतीराज, परिवहन और राजस्व विभाग सहित 19 विभागों के हैं। राजस्थान हाई कोर्ट में सरकार के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले टैक्स से जुड़े हैं। हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील और रिटायर्ड जज अजय कुमार जैन की मानें तो हाई कोर्ट में अधिकांश सरकारी मामले अनुपयुक्त और अपारदर्शी कानून के कारण दायर होते हैं।

सरकार के खिलाफ बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य के महाधिवक्ता ने सबसे ज्यादा केस वाले 19 विभागों की पहचान की है। विभागों के आपसी मामलों में अधिकांश मामले पेंशन नहीं मिलने, गलत ट्रांसफर करने, नियुक्ति में गड़बड़ी वाले होते हैं। राजस्थान हाई कोर्ट में वर्ष 1991 से 2002 के बीच लंबित मामलों में लगभग 30% की वृद्धि हुई है।
वर्ष 1994 मे विधि मंत्रियों और विधि सचिवों की बैठक में इस बात का फैसला किया गया था कि सरकार व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच के विवाद और एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के साथ होने वाले विवाद को न्यायालय या अधिकरणों में नहीं निपटाया जाएगा। इनका निपटारा दोनों पक्षों के बीच समझौता कराकर किया जाएगा। हकीकत यह है कि सरकार ऐसा नहीं कर पाई।

देश की विभिन्न अदालतों में राज्य सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी नाराज है। पिछले सप्ताह ही राजस्थान सरकार की एक याचिका पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लताड़ लगाई है। कोर्ट का कहना है कि राज्य सरकारें बेमतलब याचिका दायर करने से बाज आएं। ये बात सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरवी रवींद्रन और जस्टिस जीएस सिंघवी की बैंच ने गुरुवार को नगर विकास न्यास, बीकानेर की याचिका रद्द करते हुए कही।

नाबालिग के विवाह करने पर उसे परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।


16 साल की उम्र में शादी करने वाले एक छात्र को हाईकोर्ट ने पीएससी की मुख्य परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस आरके गुप्ता की युगलपीठ ने छात्र की याचिका पर पीएससी के अध्यक्ष और उप नियंत्रक (परीक्षा) को नोटिस जारी करते हुए उसकी परीक्षा के परिणाम को इस मामले पर होने वाले फैसले के अधीन रखा है।

सिंगरौली के बैढ़न थानान्तर्गत ग्राम गुढ़ीताल में रहने वाले रामगोपाल शाह की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि 16 साल की उम्र में उसकी शादी 22 मई 1990 को हुई थी। उसने पीएससी की परीक्षा दी, जिसकी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसे मुख्य परीक्षा में शामिल होना था।

विगत 26 अक्टूबर को उप नियंत्रक ने एक आदेश जारी करके आवेदक की उम्मीदवारी को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उसने नाबालिग उम्र में शादी की है।

आवेदक का कहना है कि जिस नियम के तहत उसकी उम्मीदवारी को निरस्त किया जा रहा, वह मार्च 2000 में अमल में आया, जबकि उसकी शादी वर्ष 1990 में हुई थी। ऐसे में उक्त प्रावधान को भूतलक्षी प्रभाव से नहीं माना जा सकता।


याचिका पर आज हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से अधिवक्ता राजेश दुबे द्वारा अपना पक्ष रखा गया। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 नवम्बर को निर्धारित की है।

पुलिस ज्यादती से तंग अधिवक्ता के फांसी मामले में हाईकोर्ट में आज कार्य बहिष्कार


राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भीलवाड़ा में पुलिस प्रताड़ना के कारण वकील के आत्महत्या करने के मामले को लेकर शुक्रवार को कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। एसोसिएशन के अनुसार कार्य बहिष्कार के कारण शुक्रवार को उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में वकील अदालतों में पैरवी करने नहीं जाएंगे। गिरफ्तारी की मांग: राजस्थान बार कौंसिल ने भीलवाड़ा के सम्बन्धित पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी की मांग की है। कौंसिल ने कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री से भी दखल का आग्रह किया है।

कल भीलवाड़ा के सांगानेरी गेट इलाके में पुलिस ज्यादती से परेशान अधिवक्ता गुरूवार को उसके ही मकान में पंखे पर शव लटका मिला। इससे गुस्साए वकीलों ने सुभाष नगर थानाप्रभारी सहित कुछ पुलिस कर्मियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए कोटा रोड जाम कर दिया। आरोपियों की गिरफ्तारी व पुलिस अधीक्षक को हटाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की पर उतर आए। उन्होंने अजमेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आर.पी. सिंह और जिला कलक्टर मंजू राजपाल को मृतक के घर से बाहर नहीं निकलने दिया।

इस सम्बन्ध में आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर थानाप्रभारी ओमप्रकाश वर्मा, उप निरीक्षक किशनसिंह, सिपाही मोती, भूपेन्द्र सिंह और राजेश को निलम्बित किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी, मुआवजा तथा मृतक की पत्नी को नौकरी दिलाने की मांग पर वकील अड़े हुए हैं। देर रात तक वकीलों ने शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल नहीं ले जाने दिया। उधर, घटना के विरोध में जोधपुर के वकीलों ने शुक्रवार को हड़ताल पर रहने की घोषणा की है। सांगानेरी गेट निवासी वकील अमित यादव (29) का शव सुबह नौ बजे कमरे में पंखे से लटका मिला।

इससे गुस्साए वकीलों ने कोटा मार्ग पर जाम लगा दिया। करीब आठ घण्टे हंगामे के बाद शाम पांच बजे कमरा खोला गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराने से वकीलों ने इनकार कर दिया, जिसके चलते देर रात तक शव घर में ही रखा था।