पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Sunday, November 29, 2009

हाईटेक होगा दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट हाईटेक होने वाला है। 8 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट देश का पहला ऐसा कोर्ट बन जाएगा, जहां कागज रहित [पेपरलेस] काम होता दिखेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जस्टिस रविंद्र भट्ट की अदालत देश की पहली ई-कोर्ट का रुतबा हासिल करेगी।

तीन चरणों में हाईकोर्ट के जज और वकील समेत बाबू-सहायक भी हाईटेक हो जाएंगे। ई-कोर्ट के साथ ई-फाइलिंग प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यहां तक कि आने वाले दिनों में देश-दुनिया में कहीं से भी कोर्ट की कार्यवाही को घर बैठे देख पाना भी मुमकिन हो जाएगा।

गुरुवार को हाईकोर्ट कंप्यूटर कमेटी के अगुवा जस्टिस बदर दुरेज अहमद ने खुलासा किया कि दिसंबर से पेपरलेस ई-कोर्ट की कार्यवाही शुरू होगी। यह पहला चरण होगा, जज के सामने मेज पर बड़े कंप्यूटर मानीटर पर सूचनाओं को टच-स्क्रीन के जरिए देखा सुना जाएगा। केस नंबर या नाम को स्क्रीन पर छूते ही पूरी फाइल खुल जाएगी। ऐसे में कागज की मोटी फाइल के पन्नों को बार-बार पलटने से छुटकारा मिलेगा। कोर्टरूम में बैठे लोगों को बड़े स्क्रीन पर सब दिखेगा। वकील अपने लैपटाप के जरिए केस पर लिखित दलील के साथ बहस कर सकेंगे। हालांकि कंप्यूटर का प्रयोग वकीलों की मर्जी पर निर्भर करेगा।

न्यायमूर्ति अहमद ने बताया कि दूसरे चरण में ई-फाइलिंग प्रक्रिया होगी। कोई भी कहीं से बैठकर ई-मेल के जरिए केस फाइल कर सकेगा। जरूरी यह होगा कि शिकायतकर्ता केस फाइल में दर्ज दस्तावेजों को स्वयं सत्यापित करे या ओथ कमिश्नर के सामने सत्यापित कराए। जस्टिस अहमद ने बताया कि ई-फाइलिंग के लिए शपथपत्र, वकालतनामा और कागजी दस्तावेजों पर स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षर करने की जरूरत पड़ेगी। कोर्ट फीस या प्रोसेस फीस के लिए आन लाइन भुगतान करना होगा। इसके लिए दिल्ली सरकार को ई-स्टैंप, आन लाइन स्क्रूटनी और सत्यापन का प्रावधान करना होगा, जिससे ई-केस फाइल हो सके। इसमें एक-दो साल लगेगा। तब तक कागजी प्रक्रिया के साथ ई-फाइलिंग में सीडी, डीवीडी या पीडीएफ में फाइलिंग संभव हुआ करेगी।

जस्टिस बदर दुरेज अहमद ने बताया है कि हाईकोर्ट परिसर में विभिन्न जगहों पर दिखने वाला फाइलों का अंबार ठिकाने लगाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में केस फाइलों से जुड़े पांच करोड़ 56 लाख पन्नों को कंप्यूटर की मदद से डिजिटलाइज किया जा चुका है। एक लाख पन्ना प्रतिदिन डिजिटल हो रहे हैं। अगले दो वर्षो में लगभग सारे काम कंप्यूटर पर हुआ करेंगे और कागज के रिकार्ड को सहेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।

नाबालिग की शादी अमान्य करार


पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में 18 वर्ष से कम उम्र की एक लड़की की शादी को ‘अमान्य' करार दिया और लड़के को सुरक्षा देने से इंकार कर उसे ‘भगोड़ा' कहा।
न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन ने शुक्रवार को दिए अपने फैसले में उन लोगों के खिलाफ कानूनन ‘उपयुक्त कार्रवाई' करने को कहा जो ‘इस मामले में बाल विवाह कराने के जिम्मेदार हैं।' अदालत ने विवाह कराने वाले पुरोहित के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया।
पंजाब के पटियाला जिले के पातरां शहर की 16 वर्षीय लड़की और एक बालिग लड़के ने इस वर्ष 21 अक्तूबर को मोहाली के गुरु नानक गुरुद्वारे में शादी की थी। शादी के लिए लड़की के परिजन राजी नहीं थे और यह अंतरजातीय विवाह था।
लड़की के पिता ने 21 अक्तूबर को पातरां पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पड़ोस का एक लड़का ‘उनकी लड़की को शादी की नीयत से बहला फुसला कर ले गया है। इसमें लड़के की मां जसबीर कौर और पिता लक्खा सिंह की भी मिलीभगत है।' युगल ने शादी के छह दिन बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दी और लड़की के अभिभावकों की ओर से कथित तौर पर मिल रही धमकी के कारण सुरक्षा की मांग की।
न्यायमूर्ति जैन ने दोनों की शादी को बाल विवाह निरोधक अधिनियम 2006 के तहत ‘अमान्य' करार दिया।

गैर लाइसेंसी सूदखोर मामला दर्ज नहीं करा सकते : बम्बई हाईकोर्ट


बम्बई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि गैर लाइसेंसधारी सूदखोर कर्जदार से कर्ज की अदायगी के तौर पर मिला चेक बाउंस होने की स्थिति में फौजदारी अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। बम्बई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ में पिछले सप्ताह न्यायमूर्ति पी आर बोरकार ने कहा बिना लाइसेंस के सूद पर पैसा देने से संबंधी कारोबार करने वाला कोई व्यक्ति कर्ज वसूली के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता ।
अहमदाबाद स्थित अनिल कटारिया ने परकाम्य लिखित अधिनियम :नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट: के तहत चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। कटारिया के अनुसार उन्होंने अक्तूबर 2004 में पुरूषोत्तम कावने को चार लाख रूपये का कर्ज दिया था। इसी के भुगतान के लिए कावरे ने मार्च 2005 में उन्हें :कटारिया को: चेक दिया लेकिन यह बाउंस कर गया।
कटारिया ने इस मामले में परकाम्य लिखित अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया लेकिन कावरे के वकील ने दलील दी कि कटारिया बिना लाइसेंस के यह कारोबार कर रहे हैं और दस अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज करा चुके हैं।

धोखाधडी मामला : महिला सरपंच को जेल


राजस्थान में अलवर जिले के ब्यावरा के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कपिल सोनी ने धोखाधडी के आरोप में ग्राम पंचायत परसुलिया की महिला सरपंच को न्यायिक हिरायत में कल जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार ग्राम पंचायत परसुलिया की सरपंच गीताबाई दांगी ने ग्राम के किसानों की ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों के बदले में शासन से मिलने वाले मुआवजा राशि के 21 हजार रूपए के चार चेक फर्जी व्यक्तियों को दे दिए थे। इस मामलें में शिकायत व्यावरा के तत्कालीन तहसीलदार आर के श्रीवास्तव ने थाने में दर्ज कराई थी।

ग्राम पंचायत परसुलिया की महिला सरपंच को पुलिस ने धोखाधडी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भोपाल जेल दिया गया।

बोरवेलों पर ढक्कन लगाकर बच्चों को बचाओः सुप्रीम कोर्ट


हाल के वर्षों में बच्चों के लिए जानलेवा बन चुके बोरवेलों की हालत पर चिंतित उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों से उन पर ढक्कन लगाना सुनिश्चित करने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश के जी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति बीएस चौहान और केएस राधाकृष्णन की पीठ ने इन घटनाओं को रोकने के लिए राज्यों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों के बारे में भी जवाब दाखिल करने को कहा है। इस सिलसिले में 13 फरवरी को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने के कारण वरीष्ठ अधिवक्ता और न्यायालय मित्र परमजीत सिंह पटवालिया द्वारा अदालत को इसकी जानकारी देने पर पीठ ने आज यह निर्देश जारी किया गया।

न्यायालय ने केंद्र, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों से इस बारे में जवाब मांगा है। हाल के बरसों में इन्हीं राज्यों में यूं ही छोड़ दिए बोरवेलों में बच्चों के गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं और यहां तक कि बचाव कार्य में सेना तक की मदद लेनी पड़ी। हरियाणा के कुरूक्षेत्र में वर्ष 2006 में ऐसे ही एक बोरवेल में गिरने वाले प्रिंस को बचाने में सेना को दो दिन लग गए थे।

गुजरात हाईकोर्ट में टीवी पर दिखेगी कार्यवाही


गुजरात हाईकोर्ट सूचना क्रांति से कदम मिलाते हुए शीघ्र ही अपनी सभी 33 अदालतों की आंशिक कार्यवाही एलसीडी टीवी पर लाइव करने जा रहा है। मतलब अब अधिवक्ताओं व मुवक्किलों को यह पता लगाने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा कि उनका केस किस अदालत में चल रहा है अथवा चलेगा।

उच्च न्यायालय के कंप्यूटर विभाग सूत्रों के अनुसार के यह सब एलसीडी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके तहत अदालत परिसर में 32 इंच की एलसीडी लगाईं जानी हैं ताकि इसकी स्क्रीन पर डिस्प्ले होने वाली सूचना सभी आवश्यक लोग पढ़ सकें। एलसीडी के संभावित स्थानों में एडवोकेट-रूम, बार रूम, कैंटीन, लाइब्रेरी, सभी लॉबी एवं लेडीज रूम सहित 60 स्थानों को चिह्नित किया गया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट का ट्रायल हो चुका है जो सफल रहा है। सब कुछ योजनानुसार चला तो शीघ्र ही एलसीडी परियोजना साकार हो जाएगी।

विभाग सूत्रों के अनुसार एलसीडी पर विभिन्न अदालतों में बोर्ड पर चल रहे मामले, इनके वकील, बोर्ड पर आने वाले अगले केस का नंबर/ ब्योरा, इनके अधिवक्ता एवं कौन से न्यायाधीश किस मामले पर संज्ञान लेंगे आदि जानकारी बड़े-बड़े और रंगीन टेक्स्ट में प्रदर्शित की जाएगी ताकि आसानी से लोगों का ध्यान आकर्षित हो।

एलसीडी प्रोजेक्ट से उच्च न्यायालय में सेवारत छह हजार एडवोकेट, इनके सहायक स्टाफ के अलावा एक लाख से अधिक वादी-प्रतिवादी तथा इनके गवाह आदि को सहूलियत होगी। इतना ही नहीं बोर्ड पर चल रहे मामले में यदि कोई अधिवक्ता पेश नहीं हो सका है तो उसका नाम लाल रंग मे एलसीडी पर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि सूचना पाकर चिह्नित मामले का अधिवक्ता यथाशीघ्र अदालत में पहुंच सके।

बीमे की रकम के लिए कटवाया हाथ


इंश्योरेंस की रकम पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ताइवान में एक व्यक्ति ने इंश्योरेंस के 7,30,000 डॉलर हासिल करने के लिए अपना हाथ कटवा लिया। 38 साल के चियांग ची वी ने दो किराए के आदमियों से अपना हाथ कटवाया। इस व्यक्ति को शनिवार को अदालत में पेश किया गया।

38 वर्षीय चियांग ची वी ने आठ नवंबर को पुलिस को बताया था कि ताइपे के चुंघी में दो आदमियों ने उस पर हमला कर उसका बायां हाथ काट दिया था। पुलिस को चियांग द्वारा कही गई बात पर शक था क्योंकि चियांग के बाजू के घाव को देखकर ऐसा नहीं लगता था कि उस पर हमला हुआ है और जिस स्थान पर हमले की बात कही गई थी वहां एक ही जगह पर खून इकट्ठा था।

जांच के बाद पता चला कि चियांग कर्ज में डूबा हुआ था, जिसे चुकाने के लिए वह बीमा पॉलिसियों के तहत एक दर्जन कंपनियों से 2.4 लाख ताइवानी डॉलर की राशि प्राप्त करना चाहता था।  पिछले सप्ताह पुलिस ने दो आदमियों को गिरफ्तार किया था। इन दोनों का दावा था कि चियांग ने उन्हें पैसा देकर यह काम कराया था। चियांग ने कहा था कि पहले वह उसे अचेत कर दें और फिर उसका बायां हाथ काट दें। चियांग ने शुक्रवार को खुद ही पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसे शनिवार को अदालत में पेश किया गया।  सुनवाई के दौरान चियांग ने कहा कि उसकी कंपनी कर्ज से डूब रही थी, इसलिए उसने किराए के दो आदमियों से अपना हाथ काटने के लिए कहा, ताकि वह अपनी बीमा पॉलिसियों का पैसा प्राप्त करके कर्ज चुका सके।

Thursday, November 26, 2009

देश के पहले पंचायत केंद्र का दिल्ली में उद्धाटन


सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन ने बुधवार को देश के पहले पंचायत केंद्र का दिल्ली में उद्धाटन किया। इस केंद्र के जरिए मामलों को जल्द निपटाने में मदद मिलेगी।
केंद्र का उद्धाटन करने के बाद बालाकृष्णन ने कहा, ''पंचायत केंद्र की स्थापना के साथ ही मुकदमों पर आने वाली लागत बहुत कम हो जाएगी और इससे मामलों को तेजी के साथ निपटाने में मदद मिलेगी।''
पंचायत ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी विवाद पर बाध्यकारी निर्णय के लिए उसे एक या एक से अधिक पंच के यहां सौंपा जाता है।
अनुमान के अनुसार भारत में मध्यस्थता संबंधी 1500 मामले लंबित हैं।

पैसे के लेन-देन में वकील-मुंशी भिड़े, बार एसोसिएशन भी मुंशियों के साथ


पानीपत जिला अदालत परिसर में बुधवार को पैसे के लेनदेन को लेकर वकीलों और मुंशी के बीच जमकर मारपीट हुई। इस मामले के बाद जहां पूरी अदालत के मुंशियों ने लामबंद होकर आंदोलन करने का मन बनाया है, वहीं बार एसोसिएशन के प्रधान और सचिव ने भी मुंशियों का साथ देने की बात कही है। जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर लगभग 12 बजे जिला अदालत में एसडीएम कोर्ट के सामने बैठे मामराज रावल, अनिल रावल का मुंशी ईश्वर शर्मा के साथ झगड़ा हो गया।

अन्य वकीलों तथा मुंशियों के बीच बचाव के बाद मामले को शांत कराया गया। इसके बाद जिला बार मुंशी एसोसिएशन के आह्वान पर सभी मुंशियों ने बार रूम में बैठक की। बैठक में एसोसिएशन के प्रधान रामफल जौंधन ने बताया गया कि ईश्वर शर्मा को मामराज रावल और अनिल रावल से पंद्रह हजार रुपए लेने थे। ये रुपए ईश्वर ने एलएलबी के कोर्स में दाखिले के नाम पर दिए थे।

दाखिला न मिलने के बाद जब ईश्वर ने अपने पैसे मांगे तो उक्त वकीलों ने किस्तों में पैसे देने की हामी भरी थी। बुधवार को उक्त वकीलों ने ईश्वर शर्मा को फोन करके पैसे देने के बहाने से बुलाया तथा उसके साथ मारपीट की। बैठक में उपस्थित सभी मुंशियों ने प्रस्ताव पारित करते हुए मुंशी ईश्वर के साथ हुई मारपीट में कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया।

भीलवाड़ा में वकील बेमियादी धरने पर


एडवोकेट अमित यादव आत्महत्या प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बुधवार को वकील समुदाय ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। सातवें दिन जिले भर में न्यायिक कार्य का बहिष्कार जारी रहने से अदालतें सूनी रही।

संघर्ष समिति की बैठक के बाद वकीलों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया। सोमवार से पूरे राज्य के न्यायालयों में काम स्थगित रखा जाएगा। गुरुवार को भी कोर्ट के बाहर वकील धरना देंगे। बुधवार को आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए संघर्ष समिति की बैठक संयोजक अरूण व्यास के नेतृत्व में हुई।

लगभग डेढ़ घंटे चली बैठक में सर्वसम्मति से आरोपी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक अनिश्चतकालीन काम का बहिष्कार करने का फैसला किया गया। संयोजक व्यास ने बताया कि सोमवार तक गिरफ्तारी नहीं होने पर राज्यभर की बार एसोसिएशन आंदोलन में सहयोग करेगी। सभी जगह न्यायिक कार्य का बहिष्कार रहेगा। यहां गुरुवार से कोर्ट के बाहर धरना दिया जाएगा। यहां गुरुवार से कोर्ट के बाहर धरना दिया जाएगा।

सोहराबुद्दीन मुठभेड़: कोर्ट का सुनवाई से इनकार


सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस द्वारा सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और एक अन्य गवाह की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या के मुकदमे का सामना कर रहे एक आईपीएस अधिकारी द्वारा पेश जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति पी सताशिवम और न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की पीठ ने कहा कि एम एन दिनेश की याचिका पर सुनवाई करना उचित नहीं होगा क्योंकि न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी और एच एल दत्तू की एक अन्य पीठ ने इस हत्याकांड की सीबीआई-एसआईटी जांच के लिए याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

शीर्ष न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता यू यू ललित की याचिका को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इस मामले में कम से कम गुजरात सरकार को एक नोटिस ही दे दिया जाए क्योंकि इसके फैसले में कुछ समय और लगेगा।

सरकार की ओर से सहायता के नियुक्त वकील और पीड़ितों के परिजनों की ओर से पेश महाधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने इससे पहले गोधरा के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए सीबीआई या एसआईटी को मामला सौंपने की मांग की थी जिसके बाद पीठ ने इस संबंध में फैसला सुरक्षित रख लिया।

सोहराबुद्दीन, कौसर बी और उनके मित्र तुलसीराम प्रजापति को गुजरात और आंध्र प्रदेश की पुलिस ने एक संयुक्त अभियान के तहत हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रही बस से 22 नवंबर 2005 को उतार लिया था।

इस मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी आरोपी हैं जिनमें गुजरात कैडर के डी जी बंजारा [उप महानिरीक्षक], राजकुमार पांडियान [पुलिस अधीक्षक] और राजस्थान कैडर के दिनेश शामिल हैं।

शुरूआत में गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि सोहराबुद्दीन रंगदारी में लिप्त एक अपराधी था और उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में लगभग 54 मामले दर्ज थे। ऐसा दावा किया गया था गुजरात पुलिस और राजस्थान पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया था।

पत्रकारों का भी होना चाहिए प्रैक्टिस लाइसेंस:लिब्रहान


लिब्रहान आयोग ने वकीलों और डाक्टरों की तर्ज पर पत्रकारों को भी लाइसेंस देने की सिफारिश करते हुए कहा है कि प्रेस और मीडिया के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए एक न्यायाधिकरण या नियामक इकाई का गठन किया जाना चाहिए।
कार्रवाई रपट (एटीआर) में लिब्रहान आयोग की रपट के हवाले से कहा गया कि भारतीय चिकित्सा परिषद या बार काउंसिल आफ इंडिया की तर्ज पर मीडिया के लिए भी ऐसी इकाई के गठन की सख्त आवश्यकता है जो पत्रकारों या अखबारों के खिलाफ किसी शिकायत के बारे में फैसला कर सके।
सरकार ने मीडिया के बारे में लिब्रहान आयोग की सिफारिशों से सहमति जताते हुए कहा कि वह सूचना प्रसारण मंत्रालय और कानून मंत्रालय से कहेगी कि इस तरह के न्यायाधिकरण या नियामक इकाई के गठन की व्यवहारिकता और आवश्यकता के बारे में अध्ययन करे। आयोग ने कहा कि स्वतंत्र समाज में मीडिया के महत्व और श्रेष्ठता से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि जबर्दस्त विशेषाधिकार पाये इतिहास के इन रचनाकारों को उन आम आदमियों के प्रति सजग रहना होगा, जिनका उनमें विश्वास है। आयोग ने इस बात पर चिन्ता जाहिर की कि भारतीय प्रेस परिषद को शिकायतों की सुनवाई और दोषी पत्रकारों को दंडित करने का कोई अधिकार नहीं है जो पीत और शरारतपूर्ण पत्रकारिता में लिप्त हैं। लिब्रहान आयोग ने यह सिफारिश भी की है कि देश में मीडिया की निगरानी के लिए एक वैधानिक इकाई का गठन किया जाना चाहिए।
रपट में कहा गया कि इस बात की सख्त आवश्यकता है कि पत्रकारों को वकीलों और चिकित्सकों जैसे पेशेवरों की तर्ज पर लाइसेंस दिये जाएं और पेशेवर गड़बड़ी पाये जाने पर उनके खिलाफ निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके।

छेड़छाड़ करने वाले युवकों की याचिका नामंजूर


जेएनयू कैंपस में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी चार युवकों की जमानत याचिका अदालत ने नामंजूर  कर दी हैं। पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविन्द्रा सिंह की अदालत ने आरोपी नीतिन कपूर, गगन कुमार, अंकित नंदा और अमित चौहान की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामला जांच के प्रथम चरण में है और पीड़ितों के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है।

ऐसे में आरोपियों को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। वहीं, अदालत ने चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों का कहना था कि छेड़छाड़ का आरोप जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए उनके मुवक्किलों को जमानत पर रिहा कर दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस पीड़ित छात्रओं के बयान दर्ज कर रही है। लिहाजा ऐसे में आरोपियों को जमानत पर छोड़े जाने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि युवकों को रविवार को शराब पीकर लड़कियों के साथ जेएनयू कैंपस में छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों द्वारा कैंपस में छेड़छाड़ करने पर छात्रों ने विरोध किया। पुलिस ने हंगामा शांत करने के लिए लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे।

Monday, November 23, 2009

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर रही विजेता


भोपाल नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) में शनिवार से चल रहे14 वें स्टेट्सन इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन का रविवार को समापन हुआ। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर ने इस प्रतियोगिता में बाजी मारी।

स्टेट्स यूनिवर्सिटी(फ्लोरिडा) में आयोजित 14 वें इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेने के लिन नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और रनरअप टीम अमेटी लॉ स्कूल, नई दिल्ली की टीम फ्लोरिडा जाएगी।

भारत से नार्थ राउंड में ये दोनों टीमें फ्लोरिडा में भारत का प्रतिनिधत्व करेंगी। एनएलआईयू में शनिवार से चल रहे इस मूट कोर्ट के नार्थ राउंड में इन दो टीमों ने अन्य 14 टीमों को हराते हुए बाजी मारी।

फाइनल राउंड में पहुंची इन दोनों टीमों के स्पीकर्स ने जजों के क्रास क्वेश्चन के सही जवाब दिए। संस्थान के सभागार में शाम पांच बजे तक चले फाइनल राउंड को देखने के लिए सभी संस्थानों के प्रतिभागी मौजूद थे।

इस मौके पर मद्रास यूनिवर्सिटी से आए इंटरनेशनल लॉ विषय के प्रोफेसर डेविड एम्ब्रोस ने कहा कि प्रतिभागियों ने अच्छी प्रस्तुति दी लेकिन इंटरनेशनल लॉ में उन्हें और अधिक रिसर्च और गहन अध्ययन करने की जरूरत है।

इस मौके पर भोज विश्वविद्यालय के प्रो.एसके सिंह, डॉ. लूथर रंगरेजी सहित मप्र राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस एनके जैन, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के पूर्व अध्यक्ष जटिस्ट वीके अग्रवाल सहित संस्थान के निदेशक प्रो.एसएस सिंह उपस्थित थे।

डॉक्टर को भारी पड़ी कोर्ट की अवमानना


पानीपत ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट इन चीफ आरके वाट्स की अदालत में शनिवार को एक सरकारी डाक्टर को अदालत की अवमानना करना भारी पड़ गया। अदालत ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस थमा दिया। यही नहीं, न्यायाधीश के आदेश के बाद डाक्टर को लगभग 5 घंटे तक पुलिस कस्टडी में भी रखा गया।

जानकारी के अनुसार शनिवार को मेडिकल ऑफिसर आलोक जैन की आरके वाट्स की अदालत में गवाही थी। डा. जैन सुबह लगभग 10 बजे ही अदालत पहुंच गए। अदालत में पहुंचने के बाद डाक्टर ने नायब कोर्ट जोगेंद्र सिंह को सरकारी वकील को बुलाकर लाने के लिए कहा। इसके बाद जैसे ही न्यायाधीश आरके वाट्स ने अपनी कुर्सी संभाली, उसी समय डा. जैन ने उन्हें जल्दी काम निपटा कर फारिग करने को कहा।

इस पर न्यायाधीश ने डा. जैन को बदतमीजी से पेश न आने की चेतावनी दी। इस पर डाक्टर और न्यायाधीश के बीच बहस बढ़ती गई। इसके बाद न्यायाधीश आरके वाट्स ने डाक्टर को भारतीय दंड संहिता की धारा 228 के तहत नोटिस जारी करने तथा पुलिस कस्टडी में लिए जाने के आदेश दे दिए। इस कार्रवाई के तहत डा. आलोक जैन लगभग 2:30 बजे तक अदालत में पुलिस कस्टडी के बीच रहे। डाक्टर द्वारा माफी मांगने के बाद ही न्यायाधीश ने डा. आलोक जैन को जाने दिया।