पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Saturday, October 10, 2009

संसद के शीत सत्र में आयेगा न्यायाधीश जांच विधेयक:मोइली



कानून मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि सरकार उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ कदाचार के मामलों में कार्रवाई के उद्देश्य से न्यायाधीश जांच विधेयक संसद के शीत सत्र में लाने की योजना बना रही है।
मोइली ने कहा, ‘‘ वर्ष 1968 के न्यायाधीश जांच कानून में संशोधन की बजाय हम एक व्यापक विधेयक लाने के बारे में विचार कर रहे हैं. दस्तावेज तैयार किये जा रहे हैं और हम इसे संसद के अगले सत्र में पेश करने की योजना बना रहे हैं। ’’ कानून मंत्री इससे पूर्व पीटीआई से कह चुके हैं कि नये कानून में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ कदाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए प्रक्रिया निर्धारित की जा सकती है।
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Friday, October 9, 2009

कार का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था, धोनी पर जुर्माना


टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर अपने नए हमर एच2 लग्जरी स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीइकल (एसयूवी) के पंजीकरण में देरी पर जुर्माना लगाया गया है। राज्य परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, कार के पंजीकरण में विलंब पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया गया। कार खरीदने के एक हफ्ते के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है। अधिकारी ने कहा कि धोनी ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्होंने जो फॉर्म जमा कराया, वह अपूर्ण था।

अधिकारी ने कहा कि शुरुआती जुर्माने के बाद अगर कोई कार मालिक बिना पंजीकरण के कार चलाते हुए पाया जाता है तो उस पर मोटर वीइकल कानून के तहत 4,500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। धोनी जब 30 जुलाई को अपनी एक करोड़(आयात शुल्क सहित) की हमर एच2 को लेकर लखनऊ से रांची गए थे तो तेज गेंदबाज आरपी सिंह भी उनके साथ थे। क्रिकेटरों में केवल धोनी और स्पिनर हरभजन सिंह के पास ही हमर एच2 कार है। भारतीय कप्तान फिलहाल चैलेंजर कप में खेलने गए हुए हैं।

समान नागरिक संहिता अत्यधिक संवेदनशील मुद्दा: मुख्य न्यायाधीश


मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन ने कहा कि जिस देश में विभिन्न नस्लों जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं वहां समान नागरिक संहिता अत्यधिक ‘संवेदनशील ’ मुद्दा है ।

बालकृष्णन ने एम के नाम्बियार स्मृति व्याख्यान में कहा समान नागरिक संहिता का सवाल बेहद संवेदनशील मुद्दा है। भारत वह देश है जहां कई नस्ल जाति और समुदाय के लोग रहते हैं। कोई कानून बनाने और उसे लागू करते वक्त भारत जैसे देश में अत्यधिक संवेदनशीलता एवं सावधानी बरते जाने की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां तक कि ब्रिटिशकाल में भारतीय दंड संहिता को लागू करने में 30 साल लग गये। पूर्व एटर्नी जनरल सोली जे सोराबजी ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर अकादामिक चर्चा हमेशा स्वागत योग्य है लेकिन इस चुनौती से विधायिका को निपटना होगा। उन्होंने कहा समान नागरिक संहिता को एकतरफा ढंग से नहीं थोपा जा सकता।

राजस्थान बार कौंसिल के चुनाव आज।



राजस्थान बार कौंसिल के चुनाव 9 अक्टूबर शुक्रवार को होंगे। इस चुनाव में उदयपुर संभाग के चार प्रत्याशी मैदान में है। बार के महासचिव हेमन्त जोशी ने बताया कि उदयपुर न्यायालय परिसर में राजस्थान बार कौंसिल चुनाव वर्ष 2009 के लिए मतदान सुबह साढे नौ बजे से शुरू होगा जो शाम साढे पांच बजे तक चलेगा।

चुनाव द्वारा पूरे राजस्थान से सदस्य चुने जाते है। इन सभी सदस्यों से मलिकर बार कौँसिल ऑफ राजस्थान का गठन होता है। इसके बाद यह सदस्य आपस में मिलकर अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करते है।
बार कौंसिल ऑफ राजस्थान राज्य में वकीलों की सर्वोच्च संस्था है जो पूरे राज्य में प्रभावी होती है।
इस वर्ष होने वाले चुनाव में उदयपुर से चार अधिवक्ता कन्हैयालाल चोरडिया, रतन सिंह राव, प्रवीण खण्डेलवाल व दीपक मेनारिया प्रत्याशी है। इसके अतिरिक्त भीलवाडा से सुरेश श्रीमाली, डूंगरपुर से सार्दुल सिंह, भीलवाडा से राजेन्द्र कचोलिया व राजसमंद से संदीप सरूपरिया भी चुनाव मैदान में है। मतदान में प्रत्येक अधिवक्ता को 1 से 25 तक वरियता के आधार पर मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। मतदान अधिकारी बी.एल. गुप्ता व सहायक मतदान अधिकारी कपिल टोडावत रहेंगे।

Thursday, October 8, 2009

अजमेर महापौर को जेल, फिर रिहाई।


अजमेर के क्रिश्चियन गंज थाना इलाके में पिछले साल ट्रैफिक पुलिस के सिपाही से मारपीट व राजकार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने बुधवार को महापौर धर्मेंद्र गहलोत को गिरफ्तार कर लिया।  निचली अदालत ने गहलोत की ओर से दायर जमानत याचिका नामंजूर करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। बाद में सेशन कोर्ट से जमानत मिलने पर शाम तकरीबन चार बजे गहलोत को रिहा कर दिया गया। गहलोत के खिलाफ 5 जनवरी 08 को क्रिश्चियन गंज थाना में ट्रैफिक पुलिस के एक सिपाही से मारपीट करने व राजकार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

गहलोत के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का विरोध करने 7 जनवरी 08 को कलेक्ट्रेट पहुंचे लोगों पर पुलिस ने जबर्दस्त लाठीचार्ज किया था जिसमें खुद गहलोत सहित दर्जनों वकील, भाजपा कार्यकर्ता, पार्षद, निगमकर्मी आदि घायल हुए थे। इस मामले में सिविल लाइंस थाने में अलग से मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी सीआईडी सीबी जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक कांस्टेबल के साथ हुई मारपीट के मामले में गहलोत की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बुधवार सुबह उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 3 अजय गोदारा के समक्ष पेश किया गया। मजिस्ट्रेट के समक्ष गहलोत की ओर से उनके वकीलों ने जमानत की अर्जी पेश की, जिसे खारिज कर उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए गए।  आदेश मिलते ही पुलिस गहलोत को तत्काल केन्द्रीय कारागृह छोड़ आई। बाद में इस मामले में कार्यवाहक सेशन जज केके बागड़ी के समक्ष जमानत अर्जी पेश हुई। सेशन कोर्ट ने पांच पांच —हजार की दो जमानत दस हजार रुपए के मुचलके पर गहलोत को रिहा करने के आदेश जारी कर दिए।

आरजेएस भर्ती के साक्षात्कार पर रोक।


राजस्थान हाईकोर्ट ने स्केलिंग के विवाद को लेकर राज. न्यायिक सेवा भर्ती के लिए साक्षात्कार पर रोक लगा दी है। साथ ही, राज्य सरकार व राजस्थान लोक सेवा आयोग से जवाब देने को कहा है। न्यायाधीश आर.सी. गांधी व एम.एन. भण्डारी की खण्डपीठ ने भीलवाड़ा की कुसुम सूत्रकार व कोटा की दीप्ति की याचिकाओं पर बुधवार को यह आदेश दिया। प्रार्थीपक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र सोनी व शैलेश प्रकाश शर्मा ने न्यायालय को बताया कि दोनों मामलों में स्केलिंग के बाद अंक आश्चर्यजनक तरीके से कम हो गए। उनसे कम अंक वालों को साक्षात्कार के लिए बुलाया है। उच्चतम न्यायालय के आरजेएस भर्ती में स्केलिंग पद्धति लागू नहीं करने को कह रखा है। स्केलिंग के बारे में आरपीएससी ने कोई अधिसूचना भी जारी नहीं की है।

न्यायालय ने कहा कि इस भर्ती से काफी तादाद में अभ्यर्थी जुड़े हुए हैं। इसी परीक्षा से सम्बन्धित एक विवाद पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। ऎसे में स्केलिंग वाले अंकों के आधार पर साक्षात्कार हो जाएं और पूववर्ती मामले में उच्च न्यायालय की विशेष पीठ स्केलिंग को वैध नहीं माने, तो आरपीएससी की मेहनत बेकार चली जाएगी, इस स्थिति को देखते हुए अदालत का निर्णय होने तक आरजेएस भर्ती के लिए साक्षात्कार नहीं हों।  आरजेएस के 87 पदों के लिए 26 अक्टूबर से 20 नवम्बर तक साक्षात्कार होने थे। इसके लिए 257 अथ्यर्थियों को बुलाया गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट की अपील स्वीकारी,फौरी राहत से इंकार।


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के पद को सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका बुधवार को मंजूर कर ली। हालांकि याचिका पर सुनवाई कर रही दो सदस्यीय पीठ ने एकल पीठ के फैसले पर अन्तरिम स्थगन नहीं लगाया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 12 और 13 नवम्बर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के सवालों पर लाचार नजर आया। वह जजों की संपत्ति की घोषणा के लिए शीर्ष न्यायपालिका के बाध्यकारी नहीं होने संबंधी विधेयक पर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पाया। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एपी शाह और न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर की पीठ ने शीर्ष अदालत से सवाल किया कि यदि संपत्ति घोषणा संबंधी विधेयक बाध्यकारी नहीं है तो अदालती कार्रवाई के दौरान न्यायिक मूल्य बनाए रखने के लिए पारित विधेयक भी बाध्यकारी नहीं हो सकता। खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में जिस जज के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की जाएगी, वह भी इसका विरोध कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की दलील का विरोध करते हुए आरटीआई आवेदक की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस तरह की अपील व्यवस्था की साख को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अटार्नी जनरल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि हम अपने तंत्र की देखभाल करने में सक्षम हैं और इस मामले में दायर अपील के परिणामों से भी भली-भांति वाकिफ हैं। शीर्ष अदालत ने यह आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट से संपर्क किया था कि एकल पीठ का फैसला कानूनी रूप से बुरा और दरकिनार कर दिए जाने योग्य है।

Wednesday, October 7, 2009

राजस्थान में 45 ग्राम न्यायालयों को मंजूरी


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में 45 ग्राम न्यायालयों की स्थापना को मंजूरी दे दी है। विधि मंत्री शांति धारीवाल के अनुसार पहले चरण में हर जिले में कम से कम एक ग्राम न्यायालय स्थापित होगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में खुलने वाले इन 45 न्यायालयों सहित प्रदेश में कुल 248 ग्राम न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इन्हें उन पंचायत समितियों में खोला जाएगा, जहां पर 1700 से 2000 सिविल या क्रिमिनल मामले लम्बित हैं। ये न्यायालय ग्राम न्यायालय अधिनियम के तहत सम्बन्धित पंचायत समिति के क्षेत्राधिकार के मामलों की सुनवाई करेंगे। ये चल न्यायालय के रूप में कार्य करेंगे, इन्हें एक गाड़ी भी मुहैया करवाई जाएगी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की पासा अधिसूचना।


राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 2006 (पासा) में निरुद्घ करने (रोककर रखने) संबंधी नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया है। साथ ही अदालत ने राज्य के विभिन्न जिलों में पासा में निरुद्घ व्यक्तियों को मुक्त करने का आदेश दिया है।
अदालत ने इस आदेश में सरकार के कामकाज में ढिलाई बरतने पर टिप्पणी की है। न्यायाधीश अजय रस्तौगी और न्यायाधीश आर.एस. राठौड़ की खंडपीठ ने इस नोटिफिकेशन के तहत 9 अभियुक्तों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने उन्हें यह मानते हुए छोड़ा कि जिला मजिस्ट्रेट को पासा कानून की धारा 3 (2) में निरुद्घ करने का जो अधिकार दिया हुआ है वह विधि सम्मत नहीं है, क्योंकि उन्हें यह अधिकार एक ही नोटिफिकेशन के तहत दिया हुआ है।

खंडपीठ ने जयपुर, झुंझुनूं, कोटा, अलवर, सवाई माधोपुर में 18 अगस्त 08 को जारी नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया है। इस मामले में अनिल नायक व 8 अन्य की ओर से बहस करते हुए एडवोकेट जयराज टाटियां, आर.आर. बैंसला का कहना था कि पासा में एक ही अधिसूचना से राज्य के जिला मजिस्ट्रेटों को निरुद्घ करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अभियुक्तों ने उन्हें निरुद्घ करने के आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि पूर्व में दिए गए फैसलों में यह कहा जा चुका है कि निरुद्घ करने संबंधी मामलों के लिए एक अलग से एक विभाग बनाया जाए जो यह देखे कि अदालत द्वारा समय समय पर दिए गए फैसलों की पालना हो रही है या नहीं। इस मामले में ढिलाई बरती गई है।

अदालत ने उम्मीद जताई है कि इस फैसले की पालना में गंभीरता बरतेगी जिससे भविष्य में इस तरह की गलतियां नहीं हो। अदालत ने इस फैसले की प्रति मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह विभाग को भिजवाने का आदेश दिया है।

पासा कानून की धारा 3(2) के तहत नोटिफिकेशन में जिला मजिस्ट्रेटों को यह अधिकार दिया गया है कि वे इसके तहत अपनी शक्तियों को उपयोग में ले सकते हैं। इस कानून के तहत असामाजिक तत्वों को अधिकतम एक साल के लिए निरुद्घ किया जा सकता है। कानून में इसकी अपील का प्रावधान नहीं है।  जिला मजिस्ट्रेट संबंधित व्यक्ति को पासा में निरुद्घ करने का आदेश जारी कर राज्य सरकार के पास भिजवाता है। सरकार उसे अपनी सिफारिश के साथ हाईकोर्ट के तीन जजों के सलाहकार मंडल के पास भिजवाती है। सलाहकार मंडल की स्वीकृति के बाद संबंधित व्यक्ति को पासा में निरुद्घ किया जाता है।

इस आदेश के तहत राज्य में अब तक निरुद्घ किए गए 70 जनों को रिहा करना होगा। यह आदेश फिलहाल 9 याचिकाकर्ताओं के लिए हैं। इसके लिए उन्हें अदालत में याचिका दायर कर अलग से आदेश लेना होगा।

राजस्थान में अब तबादला कानून!


सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण की नीतियां कारगर नहीं होने पर अब राजस्थान में सरकार ने तबादलों पर कानूनी लगाम लगाने की तैयारी शुरू की है। इसके लिए महाराष्ट्र की तर्ज पर प्रदेश में भी तबादला कानून बनाने की कवायद हो रही है। जानकार सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने गृहमंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डलीय उप समिति गठित की है, जो तबादला नीति के साथ तबादला कानून पर मशक्कत करेगी। यदि महाराष्ट्र की तरह प्रदेश में तबादला कानून लागू हो गया तो सामान्य तौर पर साल में सिर्फ दो महीने और निश्चित अवधि पर ही आईएएस अफसरों से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों तक के तबादले हो सकेंगे।

प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले होते हैं। इनमें डिजायर से लेकर भ्रष्टाचार तथा राजनीतिक प्रताड़ना जैसे मामले सामने आते हैं। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल सत्ताधारी पार्टी पर तबादलों में भ्रष्टाचार करने व तबादलों को उद्योग बनाने के आरोप लगाती रही है। इसके बावजूद सत्ता में आने वाली पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों के तुष्टीकरण के नाम पर तबादलों की मजबूरी में फंस जाती है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस मजबूरी को दूर करने व कोई तंत्र विकसित करने के लिए ही सरकार ने यह मशक्कत शुरू की है।

तबादलों पर लगाम लगाने के लिए तत्कालीन शेखावत सरकार से लेकर पिछली भाजपा सरकार तक कई बार सामान्य व अलग-अलग विभागों की तबादला नीतियां बनीं, लेकिन वे कागजों तक ही सीमित रहीं। विभाग या तो इन्हें लागू करने का साहस ही नहीं जुटा पाए या थोड़ा बहुत अमल भी हुआ तो मंत्रियों-अफसरों ने अपनी मर्जी चलाई।

ऎसे में अब मंत्रिमण्डलीय उप समिति को तबादला नीति बनाने के साथ महाराष्ट्र के तबादला कानून का अध्ययन कर यहां भी ऎसा कानून बनाने का काम सौंपा गया है। समिति में शिक्षामंत्री भंवरलाल मेघवाल व चिकित्सा मंत्री एमादुद्दीन अहमद खान अन्य सदस्य हैं।

Tuesday, October 6, 2009

राजस्थान राज्य सरकार ने विधिक सहायता के लिए आय सीमा बढ़ाई।


राजस्थान राज्य सरकार ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर विधिक सहायता के लिए पात्र व्यक्ति की आय सीमा को बढ़ा दिया है। अधिसूचना के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श पर वार्षिक आय सीमा पच्चीस हजार से बढ़ाकर पचास हजार रूपए वार्षिक कर दी गई है। इस संबंध में राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण की नियमावली में आवश्यक संशोधन किया है।

जारी रहेगा पति, पत्‍‌नी और वो।


एनडीटीवी इमेजिन के रियलिटी शो पति, पत्‍‌नी और वो का प्रसारण रोकने संबंधी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के आदेश पर मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी। जिससे इसका प्रसारण जारी रखा जा सकेगा।
न्यायालय में एनडीटीवी इमेजिन का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील राजीव नैय्यर ने कहा, उच्च न्यायालय ने एनसीपीसीआर के आदेश पर रोक लगा दी है। अब इस शो के प्रसारण में कोई अड़चन नहीं है।
उन्होंने कहा, अदालत ने हालांकि एनसीपीसीआर से कहा है कि वह चाहे तो इस शो के बारे में समय-समय पर जांच पड़ताल कर सकती है। नैय्यर ने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसम्बर को होगी। अंतर्राष्ट्रीय रियलिटी शो बेबी बोरोवर्स के तर्ज पर बना पति, पत्‍‌नी और वो नामक यह रियलिटी शो शिशुओं के लालन-पालन पर आधारित है। इसमें भाग लेने वालों को आठ-नौ महीने की गर्भवती महिला का जीवन जीना पड़ता है।
इस शो का प्रसारण गत 28 दिसम्बर को आरंभ हुआ था। इसके तत्काल बाद ही एनसीपीसीआर ने चैनल पर बच्चों के शोषण का आरोप लगाते हुए इसका प्रसारण रोकने के लिए नोटिस भेजा था।

राठौ़ड संभालेगे आरसीए अध्यक्ष का पद।


न्यायिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) के कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौड आज अपना कार्यभार संभालेगे। राठौड ने बताया कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीय न्यालालय संख्या, तीन के आदेशों के बाद वह अपना पद भार संभालेंगे। उन्होंने बताया कि गत 20 सितंबर के बाद आरसीए का कार्य रूका पडा है। कार्यालय में ताले लगे हुए है एवं क्रिकेट गतिविधियों को लेकर खिलाडियों एवं जिला संघों में गहरे संशय की स्थिति है। उन्होने कहा कि हम सभी जिला संघों से बात करेंगे। उन्हें विश्वास में लेगे तथा खोए हुए आपसी सौहार्द को पुन: स्थपित करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि इस महीने में आयोजित होने वाली सभी क्रिकेट गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं के लिए सभी योजनाएं तथा व्यवस्था कल तक तैयार कर ली जाएगी।

उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस।


सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश और चेतावनी के बावजूद लखनऊ में स्मारकों का निर्माण जारी रखने को अदालत के आदेश की अवहेलना मानते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मायावती सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करे। कोर्ट ने यह फटकार तब लगाई थी जब मायावती सरकार ने अदालत को बताया था कि वह कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही है।
मंगलवार को जस्टिस बीएन अग्रवाल और जस्टिस आफताब आलम की खंडपीठ ने कहा कि आदेश के बावजूद स्मारकों में निर्माण कार्य जारी रखना कोर्ट की अवमानना है। खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव अतुल को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न अदालत की अवमानना के लिए उन्हें दंडित किया जाए। याचिकाकर्ता गोमती नगर जनकल्याण महासमिति के वकील अमित भंडारी ने कहा, कोर्ट इस बात से नाराज है कि 11 सितंबर के उसके आदेश का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उसके आदेश के बाद भी निर्माण कार्य बंद नहीं किया और इससे नाराज होकर राज्य के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने उन्हें चार नवंबर को अदालत में उपस्थित रहने को कहा है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबित याचिकाओं के दायरे में आने वाले निर्माण कार्यो पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में मीडिया में ऎसी खबरें आईं कि कोर्ट के आदेश के बावजूद भी कहीं-कहीं निर्माण कार्य चल रहा है।

अदालत के साथ राजनीति नहीं करे मायावती सरकार।


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश में निर्माणाधीन आंबेडकर पार्को पर हो रही फिजूलखर्ची के मामले में सोमवार को मायावती सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वह कानून से न खेले और न ही कोर्ट से सियासत करे। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी होगी, इसलिए राज्य सरकार पूरा ब्योरा स्पष्ट करे।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उप्र में दलित नेताओं के स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण पर सरकारी खजाने से 2000 करोड़ रूपए से अधिक खर्च करने के मायावती सरकार के फैसले की वैधता की जांच-पड़ताल का काम शुरू कर दिया। न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति आफताब आलम की खंडपीठ मंगलवार को भी इस मामले की सुनवाई जारी रखेगी।
इससे पहले याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए लखनऊ में 24 स्थानों पर निर्माण कार्य जारी रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार को सभी स्मारक स्थलों पर निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने जान-बूझकर आदेश की अवहेलना की। कोर्ट ने इससे पहले राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर यह पूछा था कि इसके लिए क्यों नहीं राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना का मामला चलाए जाए।