पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Saturday, July 3, 2010

धार्मिक आधार पर आरक्षण असंवैधानिक: अदालत

कोलकाता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार्मिक आधार पर आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है। हाईकोर्ट ने कोलकाता मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से धार्मिक आधार पर आरक्षण के तहत आवंटित किए गए फ्लैट्स के फैसले को अवैध करार दिया। न्यायाधीश जे एन पटेल और बी भट्टाचार्य ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में धार्मिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर आरक्षण का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है।

उल्लेखनीय है कि कोलकाता मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 300 फ्लैट को बेचने के संबंध में 10 मार्च को विज्ञापन जारी किया था। ये फ्लैट शहर के दक्षिणी इलाके में स्थित हैं। फ्लैट के आवंटन में धार्मिक अल्पसंख्यकों मुस्लिमों, सिखों, और इसाईयों के लिए 26 फीसदी आरक्षण रखा था। जैसा की याचिकाकर्ता के वकील कौशिक चंदा ने बताया। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए चंदा ने कहा कि धर्म के आधार पर संविधान में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। अगर धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जाता है तो इससे सरकार के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को गहरी चोट लगेगी। केएमडीए की ओर से हाईकोर्ट में पेश हुए वकील सौमित्र बासु ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले से बंधे हुए हैं।

1 टिप्पणियाँ:

सुनील दत्त said...

मेरे भाई धर्मनिर्पेक्षता का अर्थ ही हिनदूविरोध और देशविरोध है।
आन्ध्रप्रदेश में जब कांग्रेस ने मुसलमानों को आरक्षण दिया तब भी माननीय नयायालय ने व सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंबैधानिक करार दिया था।
पर सेकुलर गद्दार संविधान को मानते कहां है इन्हें तो अरब देशों व इसाई देशों द्वारा डाले गए टुकड़े के बदले में हिन्दूओं को किसी न किसी तरह से क्षति पंहुचानि है।