• बेझिझक करें भ्रष्ट अफसरों की शिकायत -पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जज

    पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज सूर्यकांत का कहना है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और इसे मिटाने के लिए लोगों को व्यक्तिगत स्वार्थ छोड़ने होंगे। विकासशील देशों में भ्रष्टाचार ज्यादा तेजी से पनप रहा है, इसका सीधा असर विकास पर भी पड़ता है।

    इसे रोकने के लिए हर व्यक्ति को जागरूक होना होगा। संवैधानिक अधिकारों की तरह संवैधानिक दायित्व भी इमानदारी से निभाने होंगे। सेक्टर-30 में सीबीआई चंडीगढ़ जोन की ओर से भ्रष्टाचार विषय पर आयोजित परिचर्चा में जस्टिस सूर्यकांत बतौर मुख्य महमान शरीक हुए।

    उन्होंने कहा कि अफसर यह ठान लें कि वे किसी के दबाव में काम नहीं करेंगे तो भ्रष्टाचार खुद ब खुद खत्म हो जाएगा। सीबीआई के जोनल हेड महेश अग्रवाल ने कहा कि आम कर्मचारियों की तो शिकायतें मिलती हैं, पर बड़े अफसरों के बारे में बहुत कम लोग सामने आते हैं। लोग भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के लिए बेझिझक आगे आएं। उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

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  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चार जजों को बर्खास्त किया।


    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अलग-अलग जिलों के चार सिविल जजों को राज्य शासन के विधि विभाग ने बर्खास्त कर दिया है। परिवीक्षा अवधि में कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने शासन से इन जजों की बर्खास्तगी की अनुशंसा की थी। हाईकोर्ट के इंचार्ज रस्ट्रि।र जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार कोरबा जिले के करतला में सिविल जज वर्ग-2 के पद पर पदस्थ सत्येन्द्र कुमार मिश्रा, बीजापुर जिला दक्षिण बस्तर में पदस्थ सिविल जज वर्ग-2 श्रीमती श्रद्धा आकाश श्रीवास्तव, जिला दुर्ग के नवागढ़ में पदस्थ सिविल जज वर्ग-2 यशपाल सिंह टंडन व जिला दुर्ग में पदस्थ सप्तम व्यवहार न्यायधीश वर्ग-2 कु. द्वारिका तिड़के को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

    परिवीक्षा अवधि में इनका कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाने पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन से इनके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इन सभी का चयन पीएससी द्वारा आयोजित सिविल जज की परीक्षा के माध्यम से हुआ था। प्रदेश में जजों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। कार्रवाई की जानकारी हाईकोर्ट की वेबसाइट में भी प्रदर्शित कर दी गई है।

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  • दिनाकरन के खिलाफ वकीलों ने किया अदालतों का बहिष्कार।

    कर्नाटक के लगभग 60,000 वकीलों ने सोमवार को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने तथा अवैध तरीके से जमीनों पर कब्जा जमाए रखने के कथित आरोपों का सामना कर रहे कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. डी. दिनाकरन के विरोध में अदालती कार्रवाई का बहिष्कार किया।
    एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बेंगलुरू' (एएबी) के महासचिव आर. राजन्ना ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ''निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों का बहिष्कार करने का कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा। कुछ अदालतों में हालांकि काम हुआ लेकिन 60,000 वकील कार्यवाही से दूर रहे।''
    एएबी के बैनर तले सैकड़ों वकीलों के दिनाकरन के कक्ष के बाहर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। दिनाकरन उस वक्त एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान गुस्साए वकीलों के एक समूह ने एक पत्रकार की पिटाई भी कर दी।
    उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति दिनाकरन के खिलाफ जमीन पर अवैध कब्जे और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगे हैं। इन गंभीर आरोपों के बावजूद उनके पद पर बने रहने का वकील विरोध कर रहे हैं।
    जब वकीलों ने अपना विरोध प्रदर्शन रोकने से इंकार किया तो न्यायमूर्ति दिनाकरन ने एएबी के प्रतिनिधियों को अपने कक्ष के भीतर बुलाया और उनसे कहा कि वे उन्हें उनके संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने दें।
    न्यायमूर्ति दिनाकरन ने कहा, ''मैंने क्या अपराध किया है? आप लोग मेरे खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? अदालत इस तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर सकती।''
    वकीलों ने उनकी बात को अनसुना करते हुए अपना प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने अदालत की कार्यवाही को भी रोक दिया। उल्लेखनीय है कि शनिवार को उच्च न्यायालय ने वकीलों द्वारा न्यायमूर्ति दिनाकरन के बहिष्कार करने पर रोक लगा दी थी।
    उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के मुताबिक वकीलों ने न्यायमूर्ति गोपाल गौड़ा और न्यायमूर्ति नागरत्ना को भी मामलों की सुनवाई नहीं करने दी।
    इस बीच कुछ वकीलों ने एक वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार और एक कैमरामैन की इसलिए पिटाई कर दी क्योंकि वह प्रदर्शन की शूटिंग नहीं कर रहा था। उल्लेखनीय है कि अदालत की कार्यवाही को कैमरे में कैद करने की इजाजत नहीं है।

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  • शादी के झांसे में नहीं आएं महिलाएं-दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं को चेताया है कि वे महज शादी के वादे पर किसी से शारीरिक संबंध न बनाएं। कोर्ट ने महिलाओं से कहा कि शुद्धता, शुचिता और गुण को बनाए रखना पूरी तरह उन पर ही निर्भर करता है।

    न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर की पीठ ने कहा, '..अंतत: ये महिलाएं ही हैं जो अपने शरीर को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार हैं। शादी का वादा हकीकत बन भी सकता है और नहीं भी बन सकता है। रिश्ते में शामिल किसी महिला के सम्मान, गरिमा और शील के रक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी अंतत: उसी की बनती है।'

    न्यायालय की यह सलाह एक व्यक्ति द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आई है जिस पर अपने पड़ोसी से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप है। अभियुक्त को जमानत दे देने वाली पीठ ने कहा कि एक महिला को किसी मर्द के आगे महज क्षणिक सुख के लिए समर्पण नहीं करना चाहिए। किसी महिला के सम्मान, गरिमा और शील के रक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी अंतत: उसी की बनती है।

    हालांकि, न्यायालय ने सरकारी वकील की उस दलील को खारिज कर दिया कि अभियुक्त को इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि उसे शारीरिक संबंध बनाए जाने में पीड़िता की सहमति प्राप्त थी।

    जमानत देते वक्त पीठ ने कथित तौर पर लिखे गए उन प्रेम पत्रों को भी ध्यान में रखा, जिसमें पीड़िता ने अभियुक्त से यह इच्छा जाहिर की थी कि वह उसके बच्चे की मां बनना चाहती है।

    न्यायालय ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पीड़िता ने अभियुक्त को शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति दी थी क्योंकि उसने वादा किया था कि वह पीड़िता से शादी करेगा। लेकिन न्यायालय ने यह भी कहा कि महज शादी का वादा शारीरिक संबंध बनाए जाने का कारण नहीं होना चाहिए था।
    पीठ ने इस बात पर भी गौर किया, जिसमें कहा गया था कि पीड़िता अपने परिजनों की चाय में नींद की गोली मिला देती थी, जिससे वह अभियुक्त के साथ अपने घर में ही शारीरिक संबंध बना सके।  हालांकि, सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मर्दों को भी नसीहत दी कि निश्चित तौर पर यह मर्दों का भी नैतिक कर्तव्य है कि वे झूठे वादे करके किसी महिला का शोषण नहीं करें।

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  • जम्मू-कश्मीर में प्री-पेड पर बैन को चुनौती

    जम्मू-कश्मीर में केंद्र द्वारा प्री-पेड मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 17 नवंबर को सुनवाई होगी। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष प्रो. भीम सिंह द्वारा दायर इस याचिका में यह प्रतिबंध हटाने की मांग की गई है।

    सिंह के मुताबिक, केंद्र ने यह प्रतिबंध लगाकर संकटग्रस्त राज्य के लोगों के संचार तथा अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को छीन लिया है। मामले को सूचीबद्ध करते समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन, जस्टिस सुदर्शन रेड्डी तथा पी सतशिवम की बेंच ने इस पर फौरन सुनवाई से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि वह 17 नवंबर को इसकी सुनवाई करेगी।

    याचिकाकर्ता ने पूछा है कि यदि राज्य निवासी पोस्ट-पेड कनेक्शंस का इस्तेमाल कर सकते हैं तो प्री-पेड मोबाइल का क्यों नहीं? इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रत्येक आतंकी के पास एक से ज्यादा प्री-पेड कनेक्शन हैं।याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह सरकार तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह संदिग्ध डीलरों द्वारा सिम काडरें की बिक्री रोके। प्री-पेड पर प्रतिबंध लगाना समस्या का हल नहीं है।

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  • राजे को राहत, माथुर आयोग पर हाई कोर्ट का स्टे

    राजस्थान हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में किए गए कार्यो की जांच के लिए गठित माथुर आयोग के कामकाज पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एनएन माथुर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया था जिसे वसुंधरा राजे के कामकाजों की जांच करनी थी।

    हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जगदीश भल्ला ने आज इस मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। एक जनहित याचिका में माथुर आयोग की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जांच आयोग पर अंतरिम रोक लगा दी है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इस साल जनवरी में वसुंधरा के वर्ष 2004 से 2008 तक के कार्यकाल में हुए सभी महत्वपूर्ण निर्णयों को भ्रष्टाचार बताते हुए इनकी जांच के लिए माथुर आयोग का गठन किया था।

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  • जस्टिस रवींद्रन अंबानी गैस मामले की सुनवाई से हटे।

    मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच गैस आपूर्ति और कीमत को लेकर विवाद की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय खंडपीठ से सर्वोच्च न्यायालय के एक और न्यायाधीश ने खुद को अलग कर लिया है।न्यायाधीश रविंद्रन की बेटी बेंगलुरू स्थिति एक कंपनी एबीजे पार्टनर्स में काम करती है। एबीजे पार्टनर्स मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को वैश्विक स्तर पर अधिग्रहण के मामलों में कानूनी सलाह देती है। इस तथ्य के खुलासे के बाद रविंद्रन ने बुधवार को स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया।

    इससे पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने इस आधार पर खुद को सुनवाई से अलग किया कि उनकी पत्नी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

    मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल के बीच 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से 17 वर्षो तक गैस की आपूर्ति के मुद्दे पर विवाद चल रहा है।

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  • धार्मिक स्थल के नाम पर बने अवरोधक हटाएं।

    राजस्थान हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जिला प्रशासन को आदेश दिए हैं कि शहर के सार्वजनिक मार्गो पर यातायात में बाधक बन रहे धार्मिक स्थल हटाए जाएं। हाईकोर्ट ने 48 घंटे में इन अवरोधकों को चिह्न्ति कर उनसे जुड़े लोगों को नोटिस देकर हटाने को कहा है। न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी ने मंगलवार को यह आदेश दिए। हाईकोर्ट में दिनेश कुमार व शंकर ने बीमा क्लेम संबंधी मामले में अपील प्रस्तुत की थी।

    न्यायाधीश कोठारी ने इसकी सुनवाई करते हुए तब स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का संदर्भ देते हुए गत सात अक्टूबर को सिटी एसपी, जेडीए सचिव व नगर निगम सीईओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर यातायात में अवरोधक बन रहे धार्मिक स्थलों के संबंध में प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
    इस मामले में मंगलवार को रखी सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कोठारी ने कमेटी को शुरुआत में पांच ऐसे अवरोधक चिह्न्ति कर उन्हें 48 घंटे के नोटिस पर हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आदेश में कहा कि नोटिस के बावजूद ऐसे अवरोधक स्वेच्छा से नहीं हटाए जाते हैं तो उसे बलपूर्वक हटाया जाए। न्यायालय ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि उसके द्वारा तय समय सीमा को राज्य सरकार की कोई भी अथॉरिटी बढ़ा नहीं सके गी।

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  • ब्लैकबेरी फोन चुराने के आरोप में उद्योगपति गिरफ्तार।

    इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरों ने चोरी के एक मामले में एक हाई प्रोफाइल व्यक्ति को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई। इन कैमरों की मदद से सोमवार रात को एयरपोर्ट पर हुई चोरी की एक घटना सुलझ सकी और हाथ आया वो हाई प्रोफाइल शख्स, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि वह चोरी करेगा।

    यह शख्स हिन्दुस्तान नेशनल ग्लास एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कामैनेजिंग डायरेक्टर संजय सोमानी है। वहीं कंपनी के उपमहाप्रबंधक आलोक टपारिया का कहना है कि यह सब एक गलतफहमी के चलते हुआ और संजय सोमानी ने मोबाइल चोरी नहीं की थी।

    एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक संजय सोमानी सोमवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या आईसी-439 से चेन्नई जाने के लिए इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल वन-ए पर पहुंचे थे। चेक-इन कराने के बाद वह सिक्युरिटी होल्ड एरिया में सुरक्षा जांच कराने के लिए पहुंचे। यहां एक्स-रे जांच के लिए संजय सोमानी ने अपना पर्स, मोबाइल व अन्य सामान एक्स-रे मशीन पर रखा।

    इसी समय इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट नंबर आईसी-688 से मुंबई जा रहे एनके पुरी ने भी अपना सामान एक्स-रे जांच के लिए रखा। जांच के बाद पुरी को अपना ब्लैकबेरी मोबाइल एक्स-रे ट्रॉली से गायब मिला। उन्होंने इसकी सूचना सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात केन्द्रीय ओद्योगिक सुरक्षा बल के अधिकारी को दी। पुरी की शिकायत के बाद हवाई अड्डे पर हड़कंप मच गया।

    जांच में जुटे सीआईएसएफ के अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज देखी तो पाया कि एक नीले रंग की हैंगरी पहने हुए शख्स ने पुरी का मोबाइल उठाया है। वह शख्स इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या आईसी-429 से चेन्नई के लिए रवाना हुआ है। हुलिए के आधार पर विमान के चालक दल के सदस्यों एवं विमान में सवार अन्य सदस्यों से फोन पर पूछताछ की गई, तो दल के सदस्यों एवं विमान में सफर करने वाले यात्रियों ने सीआईएसएफ के द्वारा बताए गए कपड़ों एवं हुलिए के व्यक्ति की विमान के अंदर मौजूदगी की पुष्टि की। सीट नंबर के आधार पर इस शख्स की पहचान संजय सोमानी के रूप में हुई।

    सीआईएसएफ को सूचना मिली कि यही शख्स इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट से शाम को दिल्ली वापस आ रहा है। सूचना के मुताबिक आईजीआई एयरपोर्ट पर घेराबंदी कर ली गई। विमान के लैंड होते ही संजय सोमानी को हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान पहले संजय सोमानी ने मोबाइल चोरी में हाथ होने से इंकार कर दिया। लेकिन, सीआईएसएफ द्वारा सीसीटीवी की फुटेज दिखाने पर संजय सोमानी ने मोबाइल चोरी की बात कबूल कर ली। संजय सोमानी ने सीआईएसएफ के अधिकारियों को बताया कि उसने मोबाइल को विमान के टॉयलेट में छुपा दिया है।

    संजय सोमानी की निशानदेही पर सीआईएसएफ एवं एयरलाइंस के अधिकारियों ने विमान के टायलेट से मोबाइल बरामद कर लिया। इसके बाद संजय सोमानी को पालम पुलिस के हवाले कर दिया गया जहां उनके खिलाफ धारा 380 एवं 422 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार सुबह पालम पुलिस ने संजय सोमानी को एडिशनल चीफ मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट राजेश कुमार की अदालत में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें तीस हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।

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  • छत्तीसगढ़ के तीन वकील सस्पेंड।

    छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल ने व्यावसायिक कदाचरण के आरोप सिद्ध होने पर राज्य के तीन वकीलों को निलंबित कर दिया है। इसमें एक वकील बिलासपुर के भी हैं। स्टेट बार कौंसिल अनुशासन समिति की रविवार को हुई बैठक में वकीलों के व्यावसायिक कदाचरण संबंधी मामले प्रस्तुत किए गए। इसमें समिति के अध्यक्ष पद्म कुमार अग्रवाल, सदस्य कोषराम साहू और सह सदस्य रजनीश निषाद की पीठ ने मामलों की सुनवाई की।

    सुनवाई के बाद तीन वकील बिलासपुर के विजयशंकर तिवारी, दुर्ग के वकील नवजीत कुमार रमन और राजनांदगांव के वकील शफीर अहमद को व्यावसायिक कदाचरण का दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया गया। इनमें से वकील श्री तिवारी पर अधिवक्ता कल्याण निधि के टिकट के मुद्दे पर वकीलों को गुमराह और भयभीत करने वाले बयान प्रकाशित कराने और बार कौंसिल की छवि धूमिल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया।

    कौंसिल ने इसे प्रथम दृष्टया व्यावसायिक कदाचरण मानते हुए स्वप्रेरणा से संज्ञान लेकर अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत मामले को अनुशासन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति ने मामले की छानबीन के बाद श्री तिवारी को व्यावसायिक कदाचरण का दोषी पाते हुए एक नवंबर से पांच साल की अवधि के लिए निलंबित कर दिया।

    दूसरे मामले में राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव निवासी वकील शफीर अहमद के खिलाफ एक अन्य वकील सुरेंद्र कुमार दुबे ने शिकायत की थी कि श्री अहमद ने डोंगरगांव तहसील में नोटरी की नियुक्ति के लिए फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। वकील होते हुए भी उन्होंने अपना लाइसेंस निरस्त कराए बिना वर्ष 2001-02 में नगर पंचायत डोंगरगांव के माध्यम से तालाबों का ठेका ले लिया।

    इस मामले की सुनवाई के बाद कदाचरण समिति ने आरोपों को सही पाते हुए वकील श्री अहमद का सात साल के लिए वकील के तौर पर प्रेक्टिस करने पर प्रतिबंध लगा दिया। तीसरा मामला दुर्ग जिले के वकील नवजीत कुमार रमन का है। दुर्ग निवासी भुवनेश्वर लाल वर्मा व अन्य ने वकील के खिलाफ शिकायत की थी कि वे लोक निर्माण विभाग के बेमेतरा संभाग में श्रमिक के तौर पर कार्यरत हैं।

    आवेदक और उसके 35 साथियों ने परिवर्तनशील महंगाई भत्ते के दावे के लिए श्रम न्यायालय दुर्ग में वर्ष 2001 में याचिका प्रस्तुत की। इसमें उन्होंने वकील सत्येंद्रनाथ साधू को वकील नियुक्त किया।

    वकील नवजीत श्री साधु के सहायक बतौर काम करते थे। उनकी मौत के बाद नवजीत ने खुद को श्री साधु का पुत्र बताया। जिस आधार पर आवेदकों ने उन्हें नए सिरे से अपना वकील नियुक्त किया। इसके बाद से नवजीत कुमार मामले का जल्दी फैसला कराने सहित विभिन्न बहाने से काफी रकम एेंठ ली। इसकी शिकायत बार कौंसिल से की गई। कौंसिल ने सुनवाई के बाद आरोप सही पाने के बाद वकील को तीन साल के लिए प्रेक्टिस करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।

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  • दिनकरन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में जज नहीं।

    भूमि पर कब्जा करने के आरोपों का सामना कर रहे कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरन की पदोन्नति के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावी रोक लगा दी है जबकि पदोन्नति के लिए केंद्र के पास चार अन्य न्यायाधीशों के नाम को हरी झंडी दे दी गई है।

    प्रधान न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने अखिल भारतीय केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने कहा कि हमने सिर्फ इतना कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए चार अन्य न्यायाधीशों के नाम पर विचार किया जाए।
        
    न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि पदोन्नति के लिए न्यायमूर्ति दिनाकरन का नाम हटाने पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। इस समय पदोन्नति के लिए चार अन्य न्यायाधीश के साथ सिर्फ उनके नाम को अलग कर दिया गया है। दिनाकरन के नाम को हटा दिए जाने के संबंध में मीडिया में आई खबरों के बारे में पूछे जाने पर सीजेआई ने पहले सिर्फ इतना कहा, नहीं, नहीं। बाद में उन्होंने कहा कि हमने अब तक कोई फैसला नहीं किया है।

    मीडिया से बातचीत के अनिच्छुक दिखे न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि सरकार से चार अन्य न्यायाधीशों के नाम पर विचार करने को कहे जाने के फैसले का अर्थ है कि दिनाकरन के नाम को फिलहाल इस चरण में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति से अलग कर दिया गया है। सीजेआई की अध्यक्षता वाले पांच न्यायाधीशों वाले कालेजियम ने पहले दिनाकरन, एके पटनायक, टीएस ठाकुर, एसएस निज्जर और केएस राधाकृष्णन के नाम को हरी झंडी दी थी। ये न्यायाधीश क्रमश: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं।
       

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  • जयपुर नगर निगम वार्ड आरक्षण निर्धारण की लॉटरी दुबारा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को जयपुर नगर निगम के 7 वार्डो में 14 अक्टूबर के आदेश के जरिए किए गए आरक्षण निर्धारण को वैध करार देते हुए इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश आर एस राठौड़ ने गीता मिश्र एवं वेद प्रकाश शर्मा की याचिका पर यह फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया है कि वार्डो में आरक्षण निर्धारण के लिए दुबारा लॉटरी निकालने की जरूरत नहीं है।

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  • हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आयोग सुप्रीम कोर्ट जाएगा

    आरजेएस परीक्षा 2005 में स्कैलिंग व्यवस्था को अवैध ठहराने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्थान लोकसेवा आयोग सुप्रीम कोर्ट जाएगा। आरपीएससी संपूर्ण आयोग की 3 नवंबर को प्रस्तावित बैठक में इस पर आधिकारिक मुहर लगाई जाएगी। आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया गया है।

    आयोग फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। तीन नवंबर की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई जाएगी। आरजेएस भर्ती परीक्षा में स्कैलिंग व्यवस्था वर्ष 2000 से लागू है इसलिए यह कहना गलत है कि 2005 की परीक्षा से स्कैलिंग व्यवस्था लागू की गई है। वैसे भी आयोग ने संघ लोकसेवा आयोग की व्यवस्था का अनुसरण ही किया है। यूपीएससी में पहले से ही न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा में स्कैलिंग व्यवस्था लागू है। आरएएस भर्ती परीक्षा में स्कैलिंग व्यवस्था आरपीएससी 1992 में ही लागू कर चुकी है, जो निरंतर है।

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  • गवाही के लिए अदालत में हाजिर न होने वाले एसपी तीन घंटे न्यायिक हिरासत में।

    गिरफ्तारी वारन्ट एवं वेतन रोकने का आदेश होने के बावजूद गवाही के लिए अदालत में हाजिर न होने वाले बनारस के पुलिस अधीक्षक नगर विजय भूषण को गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश राहुल कुमार ने तीन घंटे तक न्यायिक हिरासत में रखा। बाद में क्षमा याचना करने पर उन्हे अभिरक्षा से छोड़ा गया।

    एसपी विजय भूषण जब एसटीएफ लखनऊ में थे तो उन्होंने 10 अगस्त 2005 की रात्रि में वेव सिनेमा के पास मुठभेड में मुन्ना उर्फ फिरोज तथा डा. अजय सक्सेना उर्फ अजय त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में वादी स्वयं विजय भूषण है। अदालत के समक्ष उन्होंने 27 जनवरी 2007 को गवाही दी थी परन्तु बचाव पक्ष ने जिरह नहीं की। 30 मई 2009 को पुन: बचाव पक्ष की अर्जी को मंजूर कर जिरह के लिए विजय भूषण को अदालत ने तलब किया।

    30 मई के बाद से करीब एक दर्जन बार अदालत ने सख्त से सख्त आदेश पारित किए। नोटिस, गिरफ्तारी वारन्ट व वेतन रोकने के आदेश हुए जिनका पालन करने के लिए अदालत ने बनारस के पुलिस उपमहानिरीक्षक को भी कई पत्र लिखे। लेकिन हर बार पुलिस महानिरीक्षक ने अदालत को सूचित किया कि कानून व्यवस्था कायम रखने की जरूरतों के चलते अगली तिथि पर विजय भूषण को गवाही के लिए जरूर भेजा जाएगा।

    अदालत ने अपने अन्तिम पत्र में डीआईजी बनारस को लिखा कि विजय भूषण के अदालत में न आने से मुकदमे की कार्यवाही नहीं हो पा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि विजय भूषण वाराणसी की पूरी कानून व्यवस्था संभाले हुए हैं। यह स्थिति न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने वाली है, जो उचित नहीं है। अदालत ने काफी समय विजय भूषण को न्यायिक अभिरक्षा में रखने के बाद उनके द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर वारन्ट निरस्त करने का आदेश पारित किया। इस आदेश के बाद मुकदमें की गवाही प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।

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  • वकील ने किया कोर्ट को गुमराह।

    जेल में बंद अभियुक्त की जमानत के लिए पेश अर्जी में तथ्य छुपा कर अदालत को गुमराह करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सेशन अदालत ने गुरुवार को एक वकील को नोटिस जारी किया है। मामला सेशन अदालत में वकील गणोश जोशी की ओर से अभियुक्त श्रीगंगानगर पुरानी आबादी निवासी हीरालाल पुत्र पन्नालाल की जमानत के लिए पेश की गई अर्जी से जुड़ा है। जोशी ने अर्जी में यह जानकारी नहीं अंकित की कि अभियुक्त की जमानत के लिए पहले सेशन और बाद में हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई गई थी, जो कि खारिज हो गईं। अदालत की कार्रवाई के दौरान ही हाईकोर्ट में पूर्व में अभियुक्त की खारिज की गई जमानत अर्जी के आदेश भी आ गए।

    कार्यवाहक सेशन जज सुशीलकुमार बागड़ी ने आदेश में उल्लेख किया है कि पूर्व में लगाई गई जमानत अर्जी का हवाला नहीं देना व्यावसायिक दुराचरण के साथ अदालत को गुमराह करने की श्रेणी में आता है, क्यों नहीं इस मामले में बार कौंसिल को कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी जाए। मालूम हो कि अभियुक्त हीरालाल एक मामले में 13 साल से फरार चल रहा था। उसे पुलिस ने इसी महीने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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