पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Tuesday, April 19, 2011

संवैधानिक अधिकार है संपत्ति का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि संपत्ति का अधिकार संवैधानिक अधिकार है और सरकार मनमाने तरीके से किसी व्यक्ति को उसकी भूमि से वंचित नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की पीठ ने अपने एक फैसले में कहा कि जरूरत के नाम पर निजी संस्थानों के लिए भूमि अधिग्रहण करने में सरकार के काम को अदालतों को 'संदेह' की नजर से देखना चाहिए।

पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति सिंघवी ने कहा, ''अदालतों को सतही नजरिया नहीं अपनाना चाहिए, जैसा कि मौजूदा मामले में हुआ। सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर मामले में फैसला करना चाहिए। संपत्ति का अधिकार यद्यपि मौलिक अधिकार नहीं है लेकिन यह अब भी महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है और संविधान के अचुच्छेद 300 ए के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से कानून के प्राधिकार के अलावा किसी भी तरह से वंचित नहीं किया जा सकता।' उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए किसानों की 205 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को रद करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। जमीन के मालिकों राधेश्याम और अन्य अदालत में याचिका दायर कर मार्च 2008 में किए अधिग्रहण को चुनौती दी थी।

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