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Monday, January 17, 2011

धोखाधड़ी में फंसे आरएएस अधिकारी

चित्तौड़गढ़ की कोतवाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन अतिरिक्त कलक्टर बी.एस. गर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। गर्ग पर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण तैयार कर नौकरी पाने का आरोप है। गर्ग वर्तमान में उदयपुर में खनिज विभाग में अतिरिक्त निदेशक प्रशासन के पद पर कार्यरत हैं।

चित्तौड़गढ़ निवासी गंगाधर पुत्र मांगीलाल सोलंकी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष इस्तगासा दायर कर बताया कि सेंती निवासी भैरूशंकर पुत्र कन्हैयालाल गर्ग जन्म से सवर्ण जाति के होकर उच्च शिक्षा के बाद राजकीय सेवा में आए। इनके माता-पिता भी सवर्ण जाति के हैं।

गर्ग ने तहसीलदार माण्डलगढ़ से 24 अप्रेल 1982 को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इसमें प्रमाण पत्र जारी होने का क्रमांक अंकित नहीं है। गलत एवं मिथ्या सूचना देकर प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है। इस्तगासे में बताया गया है कि गर्ग व गुरू ब्राह्मण अनुसूचित जाति की परिभाषा में नहीं आते। गर्ग ने राजस्थान लोक सेवा आयोग में अनुसूचित जाति का सदस्य बता नाजायज लाभ उठाने के उद्देश्य से अपराध किया है। इस्तगासे में कहा गया है कि पूर्व में भी इस संबंध में उच्चाधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

24 जून 2010 को भी आईजी रेंज उदयपुर व अन्य अधिकारियों को शिकायत की गई थी। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर धारा 420, 467, 468, 471, 34-197 के अन्तर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहले भी की थी शिकायत- गर्ग
आरएएस अधिकारी बी.एस. गर्ग का कहना है कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2007 में भी ऎसी ही शिकायत की थी, जो बाद में झूठी पाए जाने पर फाइल कर दी गई। हमारी जाति राजस्थान अनुसूचित जाति की सूची में दर्ज है। उच्च न्यायालय ने भी इसे अनुसूचित जाति माना है।

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