पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट
संपत्ति का खुलासा नहीं कर सकता: बालाकृष्णन
6 Comments - 19 Apr 2011
पूर्व प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने संपत्ति से संबंधित सूचनाओं के गलत उपयोग बताते हुए आयकर अधिकारियों से कहा कि वह अपनी संपत्ति का खुलासा नहीं कर सकते। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता पी बालाचंद्रन की ओर से आयरकर विभाग से बालाकृष्णन की संपत्ति की सूचना मांगने पर आयकर अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने हलफाना दाखिल किया है कि वह अपनी सम्पत्ति को ...

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संवैधानिक अधिकार है संपत्ति का अधिकार
4 Comments - 19 Apr 2011
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि संपत्ति का अधिकार संवैधानिक अधिकार है और सरकार मनमाने तरीके से किसी व्यक्ति को उसकी भूमि से वंचित नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति ए के गांगुली की पीठ ने अपने एक फैसले में कहा कि जरूरत के नाम पर निजी संस्थानों के लिए भूमि अधिग्रहण करने में सरकार के काम को अदालतों को 'संदेह' की नजर से देखना चाहिए। पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति ...

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Monday, January 17, 2011

यूपीएससी को वर्ष 2010 की प्रारंभिक परीक्षा के अंक घोषित करने के आदेश


दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका के आधार पर केंद्रीय संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी को वर्ष 2010 की प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण सभी अभ्यर्थियों के अंकों की घोषणा करने का आदेश दिया है.

यह आदेश उस याचिका पर आया है जिसमें यूपीएससी को हर विषय के लिए सामान्य, अन्य पिछडा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति जैसी विभिन्न श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए कट आफ़ अंक घोषित करने तथा संबद्ध दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2010 की लोक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के रोल नंबर तथा उनको मिले अंकों का खुलासा करने की मांग भी की थी. उच्च न्यायालय ने बहरहाल, आयोग को उन याचिकाकर्ताओं के परिणामों का खुलासा न करने के लिए कहा है जो वर्ष 2010 की प्रारंभिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे थे.


न्यायमूर्ति एस मुरलीधर ने अपने हालिया आदेश में कहा ‘‘अगर उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के पूरे अंक उनके रोल नंबर के साथ बताए जाते हैं तो यूपीएससी या उत्तीर्ण अभ्यर्थी के साथ कोई पक्षपात नहीं होगा, बल्कि ऐसा करना जनहित में होगा.’’


अदालत ने यूपीएससी के वकील की यह दलील खारिज कर दी कि आयोग सूचनाओं का खुलासा नहीं करेगा क्योंकि अभ्यर्थियों ने अपना आवेदन केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी सीपीआईओ को देने के बजाय सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिल किया है.

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