पाकिस्तान की सिंध हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को कोर्ट में पेश नहीं होने के कारण मंगलवार को भगोड़ा घोषित कर दिया। इससे मुशर्रफ की पाकिस्तान की राजनीति में लौटने की योजना को झटका लगा है।
चीफ जस्टिस सरमाद जलाल उसमानी के नेतृत्व वाली डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित किया। अवामी हिमाकत तहरीक के मौलवी इकबाल हैदर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुशर्रफ पर संविधान के साथ छेड़छाड़ करने और राजद्रोह के आरोप में कार्रवाई करने की मांग की थी।
हैदर ने मुशर्रफ के सहयोगियों के खिलाफ भी इन्हीं आरोपों के तहत कार्रवाई करने की मांग की थी। इन सहयोगियों में वकील शरीफुद्दीन परीजादा और पूर्व अटार्नी जनरल मलिक अब्दुल कय्यूम शामिल हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुशर्रफ को कई बार नोटिस भेजे। लेकिन वे कोर्ट में पेश नहीं हुए।
मुशर्रफ के खिलाफ इसके अलावा और भी कई मामले पाकिस्तान में लंबित हैं। संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की रिपोर्ट में उनकी सरकार को दिसंबर 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के लिए जिम्मेदार भी ठहराया गया था।
मुशर्रफ अप्रैल 2009 में देश छोड़कर चले गए थे। इससे नौ महीने पहले उन्हें राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया गया था। हालांकि मुशर्रफ पाकिस्तान की राजनीति में लौटना चाहते हैं। लंदन में रह रहे मुशर्रफ का दावा है कि वे निर्वासन में नहीं हैं और जल्द पाकिस्तान लौटेंगे।
चीफ जस्टिस सरमाद जलाल उसमानी के नेतृत्व वाली डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित किया। अवामी हिमाकत तहरीक के मौलवी इकबाल हैदर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुशर्रफ पर संविधान के साथ छेड़छाड़ करने और राजद्रोह के आरोप में कार्रवाई करने की मांग की थी।
हैदर ने मुशर्रफ के सहयोगियों के खिलाफ भी इन्हीं आरोपों के तहत कार्रवाई करने की मांग की थी। इन सहयोगियों में वकील शरीफुद्दीन परीजादा और पूर्व अटार्नी जनरल मलिक अब्दुल कय्यूम शामिल हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुशर्रफ को कई बार नोटिस भेजे। लेकिन वे कोर्ट में पेश नहीं हुए।
मुशर्रफ के खिलाफ इसके अलावा और भी कई मामले पाकिस्तान में लंबित हैं। संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की रिपोर्ट में उनकी सरकार को दिसंबर 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के लिए जिम्मेदार भी ठहराया गया था।
मुशर्रफ अप्रैल 2009 में देश छोड़कर चले गए थे। इससे नौ महीने पहले उन्हें राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया गया था। हालांकि मुशर्रफ पाकिस्तान की राजनीति में लौटना चाहते हैं। लंदन में रह रहे मुशर्रफ का दावा है कि वे निर्वासन में नहीं हैं और जल्द पाकिस्तान लौटेंगे।
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