पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Thursday, June 11, 2009

जूता बनाने वाले का बेटा बना टॉपर.

पाई-पाई की मोहताज मेहनतकश माता-पिता की होनहार संतान कमलेश कुमार ने 12वीं कला वर्ग में राजस्थान टॉप कर यह दिखा दिया है कि प्रतिभा अभावों के आगे नहीं झुकती। कमलेश के घर की हालत बेहद नाजुक हैं और उसके पिता जूते बनाकर जैसे-तैसे परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। स्थिति यह थी कि इस होनहार छात्र के पास आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए पैसे और संसाधन तक नहीं थे। ऐसे में उसकी मदद विद्यालय के निदेशक अमर सिंह ने की और इसे नि:शुल्क प्रवेश देने के साथ पुस्तकें भी मुहैया करवाई। अमर सिंह ने बताया कि कमलेश कुमार पुत्र बाबू लाल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से इसे पिछले साल 4 जुलाई को उन्होंने नि:शुल्क एडमीशन दिया। हॉस्टल में भी नि:शुल्क रखा। यहां तक कि एक साल में जब कमलेश विद्यालय घर जाने का किराया भी दिया। कमलेश के पिता चमड़े की जूती बनाने और उसकी मां उन पर कशीदा काढ़ने का काम कर परिवार का पेट पालते हैं। घर की बिगड़ी आर्थिक स्थिति के चलते कमलेश के बड़े भाई की 11वीं के बाद पढ़ाई छूट गई। स्कूल प्रशासन के अनुसार छात्र काफी प्रतिभाशाली है, लेकिन घर की आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई में बाधा बन सकती है। कमलेश को आर्थिक मदद की जरूरत है।

Wednesday, June 10, 2009

सर्वोच्च न्यायालय ने विवाहित महिला के प्रेमियों को सावधान किया

सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले में एक विवाहित महिला के प्रेमी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए ऐसे प्रेमियों को सावधान किया है। अदालत ने प्रेमी को विवाहित महिला के पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी ठहराया है। 
न्यायमूर्ति मुकुंदम शर्मा और न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान की अवकाशकालीन खंडपीठ ने आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गुंटूर निवासी दामू श्रीनू को सुनाई गई तीन साल के कारावास की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है।
28 मई को सुनाए गए और मंगलावार को जारी किए गए फैसले के अनुसार श्रीनू का अपने पड़ोसी बित्रा नागार्जुन राव की पत्नी के साथ प्रेम संबंध था। इसके कारण राव ने 8 जून 1996 को आत्महत्या कर ली थी। 
राव को अपनी पत्नी पर श्रीनू के साथ संबंध होने का शक हुआ तो उसने अपनी पत्नी से इस बारे में सवाल किया। इसे लेकर दोनों के बीच लड़ाई हुई। 
राव ने अपने ससुर को बुलाकर पत्नी को ले जाने के लिए कहा ताकि उसका मन बदल जाए। लेकिन श्रीनू 1 जनवरी 1996 को राव के घर आया और उसने राव की पत्नी के साथ अपने संबंधों की बात स्वीकार कर ली। उसने यह भी कहा कि जब तक वह महिला उसे नहीं छोड़ देती तब तक वह उसके साथ संबंध बनाए रखेगा। 
राव की आत्महत्या के बाद मामला पुलिस के पास पहुंचा तो उसने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया। एक दंडाधिकारी की अदालत ने दोनों को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। बाद में सत्र अदालत ने दोनों की सजा को घटा कर तीन-तीन साल कर दिया। 
उसके बाद आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने महिला की सजा को घटा कर एक साल कर दी लेकिन श्रीनू के तीन साल के कारावास की सजा को बरकरार रखा। 
अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी है।

शीतल मफतलाल को जमानत

अघोषित ५१ लाख के सोने और हीरो के आभूषणों के साथ यात्रा करने के आरोप में गिरफ्तार सोशलाईट और उद्योगपति अतुल्य मफतलाल की पत्नी शीतल मफतलाल को मुंबई की एक अदालत ने आज पांच लाख रूपये की जमानत दे दी।
३७वीं महानगरीय अदालत ने जमानत देते हुए शीतल को एक महीने तक हर सोमवार और गुरूवार को जांच एजेंसी के समक्ष पेशी देने और अदालत की अनुमति के बगैर देश न छोडऩे का आदेश दिया।
शीतल को रविवार को मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग ने गिरफ्तार किया था।
उनकी जमानत अर्जी पर कल सुनवाई नहीं हो सकी थी क्योंकि अभियोजन पक्ष ने अदालत से अर्जी पर अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। इसके बाद अदालत ने शीतल को न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था।

गवाहों को सुरक्षा देना बेहद जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा है कि आपराधिक न्याय प्रशासन को सच बनाने के लिए देश मे गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की अति आवश्यकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ अंबिकापुर में गवर्नमेंट ग‌र्ल्स कालेज की छात्रा को कैम्पस में जीप से कुचल कर मार डालने के मामले में घटना की चश्मदीद गवाह साथी छात्राओं के अदालत में बयान से मुकर जाने पर गवाहों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पीठ ने रिकार्ड पर आए चश्मदीद गवाहों के बयानों में झलकते भय का जिक्र किया है। एक छात्रा ने तो गवाही के बाद रोते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उसे दोबारा गवाही के लिए न बुलाया जाए क्योंकि वह पूरे साल परेशान रही है। कोर्ट ने कहा कि छात्रा का दर्द समझा जा सकता है। उसके बयानों को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि सच न बोलने के लिए उस पर कितना दबाव था। कोर्ट ने कहा कि अगर आपराधिक न्याय प्रशासन को सच्चाई बनाना है तो देश में गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की बहुत जरूरत है। पीठ ने कहा कि यह मामला गवाहों को अभियुक्त की धमकियों से सुरक्षित नहीं कर पाने के आपराधिक न्याय प्रशासन की खामी का एक बड़ा उदाहरण है। दुर्भाग्य की बात है जिन मामलें में प्रभावी लोग शामिल होते हैं उनमें सामान्यत: भय और दबाव के कारण गवाह सामने नहीं आते। 

कोर्ट ने इस मामले में जीप चालक समरविजय सिंह की सजा पर मुहर लगा दी है। लेकिन जीप में बैठे बाकी के तीन अन्य साथी अभियुक्तों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि यह सिद्ध नहीं होता है कि इन तीनों का समर विजय सिंह के साथ अपराध में शामिल होने का सामान्य आशय था। 

मामला वर्ष 1998 का है। बीए की छात्रा कुमारी प्रीती अपनी सहेलियों के साथ कैम्पस में बैठी थी। तभी एक जीप कैम्पस में घुसी जिसने प्रीती के बैग व टिफिन बाक्स को कुचल दिया। प्रीती ने बैग और टिफिन के टूटने पर जीप के सामने खडे़ होकर अभियुक्तों से नुकसान की भरपाई की मांग की। अभियुक्तों ने कहा कि अगर वह रास्ते से नहीं हटी तो वह उस पर जीप चढ़ा देंगे। प्रीती नहीं हटी, जिस पर समरविजय ने प्रीती पर जीप चढ़ाई और वह गिर गई। बाद में समर ने जीप को पीछे किया और फिर तेजी से आगे लाकर प्रीती के सिर पर से जीप गुजार दी। इसके बाद सभी अभियुक्त फरार हो गये। सत्र अदालत व हाईकोर्ट ने जीप पर सवार सभी अभियुक्तों को हत्या के जुर्म में दोषी ठहरा कर सजा सुनाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समरविजय को छोड़ कर बाकी को बरी कर दिया है।

लोकल चेक की राशि एक दिन में मिले

जोधपुर. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बार फिर देश की सभी कॉमर्शियल बैंकों को स्पीड क्लियरिंग के माध्यम से लोकल चेक एक ही दिन में क्लियर कर राशि खाते में जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि बैंक अधिकारियों को इसका सीधा और सरल तरीका समझ में नहीं आ रहा। 

वर्तमान में तीन से चार दिन बाद चेक क्लियरिंग हो पाते हैं। उधर, बैंकों की चिंता इस बात को लेकर है कि एक दिन में चेक की राशि ग्राहकों के खाते में डाल दे तो चेक रिटर्न होने की स्थिति में उनके सामने संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि तमाम कानूनी प्रावधानों के बावजूद आज भी बड़ी संख्या में चेक बाउंस होते हैं। इसके बावजूद अधिकारी कोई रास्ता निकालने में जुटे हैं ताकि रिजर्व बैंक के निर्देशों की पालना भी हो जाए।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के समक्ष वर्ष 2006 में आए मामले में सुनवाई के बाद कमीशन ने 27 अगस्त, 2008 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को लोकल व बाहरी चेकों के तुरंत भुगतान से संबंधित निर्देश जारी किए थे। निर्देशों के बावजूद बड़े शहरों में लोकल क्लियरिंग की जमा में 4 से लेकर 10 दिन तक का समय लगता रहा है। जोधपुर में तीसरे दिन क्लियरिंग जमा हो पाती है। 

बैंकों में स्थानीय व बाहरी चेक दोपहर 3 बजे तक निकाल कर उनकी लिस्टिंग की जाती है। दूसरे दिन सुबह उन्हें स्टेट बैंक स्थित क्लियरिंग हाउस भेज दिया जाता है। जिन बैंकों की एक से अधिक शाखाएं हैं उनकी क्लियरिंग मुख्य शाखा अथवा सेवा शाखा के माध्यम से भेजी जाती है।

आठवीं बोर्ड में 11 शिक्षकों को जीरो

भीलवाड़ा. आठवीं बोर्ड में जिले के 11 शिक्षकों का परिणाम शून्य रहा है। इसमें छह प्रधानाध्यापक भी शामिल हैं। 33 शिक्षकों का परिणाम 21 से 30 प्रतिशत के बीच रहा है। स्कूलों में संविदा पर कार्यरत विद्यार्थी मित्र व कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को रिजल्ट कम रहने पर होने वाली कार्रवाई के दायरे से बाहर रखा गया है। शिक्षा विभाग तीस प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर उपनिदेशक को भेजेगा। 

16 द्वितीय श्रेणी के अध्यापकों का परिणाम तीस प्रतिशत से कम रहा है। इन शिक्षकों के खिलाफ उपनिदेशक कार्यालय अजमेर द्वारा कार्रवाई की जाएगी। कम परिणाम देने वालों का तबादला, चार्जशीट, सर्विस बुक में एंट्री, नोटिस सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

शिक्षा विभाग प्रारंभिक के अनुसार सहाड़ा के मालीखेड़ा स्कूल में कार्यरत प्रधानाध्यापक अर्चना सोनगर, भैरूखेड़ा कोटड़ी के सीताराम कुम्हार, भभाणा मांडल के भगवतसिंह चुंडावत, बागजड़ा मांडल के रामप्रसाद, कायमपुरा शाहपुरा के जयदीपसिंह बड़गुर्जर व मंडोल रायपुर यूपीएस की सरोज यादव का परिणाम शून्य रहा है। भैरूखेड़ा कोटड़ी में कार्यरत कृष्णमुरारी वैष्णव, भभाणा मांडल के शिवदयाल ओझा, बागजड़ा के ओमप्रकाश, कायमपुरा शाहपुरा के रामसिंह मीणा व मंडोल रायपुर की विद्या टांक का परिणाम शून्य रहा है।

पन्नाधाय योजना पर स्टे

उदयपुर. शहर में चर्चा का विषय रही नगर विकास प्रन्यास की पन्नाधाय नगर आवासीय योजना में 800 भूखंडों के आबंटन पर अदालत ने मंगलवार को अस्थायी निषेधाज्ञा के आदेश जारी किए। सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ खंड शहर दक्षिण (ग्रीष्मकालीन विशेष न्यायालय) ने प्रन्यास प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 15 जुलाई को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखें। पत्रकार कोटे के आवेदक का प्लॉट निरस्त न करें। अदालत ने 800 भूखण्डों की आवासीय योजना पर यथास्थिति के आदेश दिए।

विवाद का कारण

यूआईटी की बलीचा में प्रस्तावित दक्षिण विस्तार योजना में पत्रकार वर्ग से भारत भूषण ओझा ने आवेदन किया था। प्रन्यास ने 12-13 जनवरी 2009 को निकाली गई लॉटरी में पत्रकार कोटे में 17 आवेदकों को चुना। उक्त स्कीम में 1000 वर्गफीट प्लॉट योजना में 11 पत्रकार, 1800 वर्गफीट प्लॉट में 4 पत्रकार तथा 2400 वर्गफीट प्लॉट में 2 पत्रकारों का चयन किया गया। 

परिवादी को प्लॉट नंबर आबंटित कर दिए गए। उसी दौरान कुछ लोगों ने प्रन्यास सचिव को आपत्ति दर्ज कराई की पत्रकार कोटे के प्लॉट अधिस्वीकृत पत्रकारों को ही दिए जाने चाहिए। प्रन्यास सचिव ने स्थानीय निकाय निदेशालय पत्र लिखकर इस संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा था। निदेशालय ने सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत पत्रकारों को ही प्लॉट आबंटन का पात्र माना। निदेशालय से मिले निर्देश की पालना में प्रन्यास कार्यालय ने 22 जून को पत्रकार कोटे में सभी भूखण्ड आबंटियों को नोटिस देकर अधिस्वीकरण प्रमाणपत्र पेश करने के आदेश दिए।

उक्त नोटिस को लेकर कथित पत्रकार ओझा ने नगर विकास प्रन्यास प्रशासन के खिलाफ 5 जून को अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थनापत्र पेश किया। प्रार्थनापत्र में बताया गया कि प्रन्यास ने भूखंड आबंटन के लिए जो फार्म बेचे थे उनमें अधिस्वीकृत पत्रकार की शर्त नहीं थी। परिवादी ने अतिरिक्त निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के 21 जून 2007 को जारी पत्र भी अदालत में पेश किया जिसमें पत्रकारों को आवास आबंटन के लिए अधिस्वीकृत होना जरूरी नहीं माना गया है।

Friday, June 5, 2009

राजस्थान उच्च न्यायालय में 28 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश

राजस्थान उच्च न्यायालय में एक जून से 28 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। इस अवधि के लिए जोधपुर एवं जयपुर पीठ के लिए अवकाशकालीन न्यायाधीशों का मनोनयन किया गया है। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (प्रशासन) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मुख्य पीठ जोधपुर में एक से 10 जून तक न्यायमूर्ति सी.एम. तोतला, 11 से 20 जून तक न्यायमूर्ति एस.आर. लोढ़ा तथा 21 से अवकाश समाप्ति तक न्यायमूर्ति डी.एन. थानवी अवकाशकालीन न्यायाधीश का कार्य देखेंगे। इसी प्रकार जयपुर पीठ में एक से 10 जून तक न्यायमूर्ति एम.सी. भगवती, 11 से 20 जून तक न्यायमूर्ति के.एस. चौधरी तथा 21 जून से अवकाश समाप्ति तक न्यायमूर्ति एम.एन.भण्डारी अवकाशकालीन न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे।

Monday, June 1, 2009

राजस्थान बार कौंसिल द्वारा हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव

राजस्थान बार कौंसिल ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर वरिष्ठतम न्यायाधीश को नियुक्त करने तथा उनकी नियुक्ति कम से कम एक वर्ष रखने का प्रस्ताव 31 मई को कौंसिल की साधारण सभा में पारित किया है। इस बारे में एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर प्रतिवेदन सौंपेगा। इस बारे में राष्ट्रपति को भी प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कौंसिल को इस बारे में पूर्व में सूचित किया जाए। इस साधारण सभा में बार कौंसिल ऑफ इंडिया के कार्यवाहक अध्यक्ष जयराम बेनीवाल तथा राजस्थान बार के उपाध्यक्ष मनीष सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लिया।

सभा में कौंसिल के इस वर्ष होने वाले चुनाव में धरोहर राशि 8 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने, अधीनस्थ न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए मुख्य न्यायाधीश से निवेदन करने का निर्णय भी हुआ। बैठक में इसके अलावा भी कई मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ।

राजस्थान अधिवक्ता कल्याण कोष की न्यासी समिति एवं बार कौंसिल ऑफ इंडिया एडवोकेट्स वेलफेयर फंड की बैठक भी 31 मई को हुई। इसमें अधिवक्ताओं के मृत्यु, बीमारी आदि दावों का निस्तारण कर करीब 4 लाख रुपए के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई। नासिर अली नकवी की अध्यक्षता में संपन्न सभा में बार एसोसिएशन किशनगढ़ (अजमेर) के अधिवक्ताओं द्वारा अधिवक्ता कल्याण कोष के टिकट लगाए बिना वकालतनामे पेश करने को गंभीरता से लेते हुए आगे से ऐसा न करने को कहा गया। किशनगढ़ से आए बार के प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन माजवी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में इसका ख्याल रखा जाएगा।

Friday, May 22, 2009

अंतरिम जमानत पर उच्चतम न्यायालय ने दी व्यवस्था

किसी व्यक्ति को पर्याप्त कारण के बिना जेल में रखे जाने से उसकी प्रतिष्ठा को पहुंचने वाली अपूर्णीय क्षति की ओर ध्यान दिलाते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि नियमित जमानत के अनुरोध पर विचार करने के दौरान आरोपी को अंतरिम जमानत प्रदान की जानी चाहिए। 
शीर्ष न्यायालय ने कहा जब कोई व्यक्ति नियमित जमानत के लिए आवेदन करता है तो संबद्ध अदालत आम तौर पर अर्जी को सुनवाई के लिए कुछ दिन बाद सूचीबद्ध कर देती है ताकि वह केस डायरी पर विचार कर सके जिसें पुलिस अधिकारियों से हासिल करना होता है और इस बीच अर्जी देने वाले को जेल जाना पड़ता है।
न्यायमूर्ति मार्कन्डेय काटजू और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा ने एक आदेश में कहा भले ही अर्जी देने वाला इसके बाद जमानत पर छूट जाये तो भी समाज में उसकी प्रतिष्ठा को अपूर्णीय क्षति पहुंचती है। किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी मूल्यवान संपत्ति होती है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके अधिकार का एक पहलू है। 
शीर्ष न्यायालय ने यह आदेश सुखवंत सिंह द्वारा दायर की गयी अपील पर सुनाया। सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दिये जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

13 साल की मासूम बेटी पिता की हवस का शिकार

जयपुर शहर एक पिता द्वारा अपनी ही 13 साल की मासूम बेटी के साथ बलात्कार किए जाने की खबर सुनकर सन्न है। लोग विश्वास नहीं कर पा रहे है कि एक पिता अपनी ही बेटी को किस तरह बलात्कार कर सकता है? लेकिन राजेंद्र प्रसाद नगर के श्याम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज रिपोर्ट चीख चीख कर बता रही है कि एक पिता ने अपनी ही बेटी के साथ रेप और यौन उत्पीड़न का शिकर बनाकर रिस्तों को तार तार कर दिया है। थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार 13 साल की लड़की का यौन शोषण उसका अपना ही पिता पिछले1 माह से कर रहा था। रिस्तों को तार तार कर देने वाला यह सनसनीखेज मामला एक स्थानिय एनजीओ द्वारा श्यामनगर में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के बाद सामने आया है। एनजीओ के कार्यकताओं के साथ13 साल की मासूम लड़की ने श्यामनगर थाने पहुंचकर इस बात की रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपने ही पिता द्वारा पिछले 1 माह से यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहीं है।

श्याम नगर पुलिस ने आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है। उसे आईपीसी 376 के तहत हिरासत में ले लिया गया है। आरोपी माली का करता है और शराबी प्रवत्ति का बताया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपी जीवन सिंह शराब का सेवन करने के बाद अपनी बेटी का शारीरिक शोषण करता था। लड़की की मां जब दूसरे घरों में काम पर जाती थी तो घर में लड़की को अकेली पाकर आरोपी इस जघन्य अपराध को अंजाम देता था।

राजस्थान में एडवोकेट ऑन रिकार्ड का नवीन पद सृजित

राजस्थान सरकार ने एक आदेश जारी कर उच्चतम न्यायालय के समक्ष उदभूत राजस्थान राज्य के सभी प्रकरणों की पैरवी करने के लिए एडवोकेट ऑन रिकार्ड का नवीन पद सृजित किया है।इसी प्रकार एक अन्य आदेश के तहत इस पद पर मिलिन्द कुमार को कार्यभार सम्भालने की तिथि से अस्थाई तौर पर नियुक्त किया गया है। 
इसके अतिरिक्त एक और आदेश के तहत अमित पूनिया को अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं अपर लोक अभियोजक राजस्थान उच्च न्यायालय बेंच जयपुर के पद पर अग्रिम आदेश तक नियुक्त किया गया है।

अदालत ने ठुकराया काजमी का आग्रह

मुंबई हमलों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी के इस आग्रह को गुरुवार को ठुकरा दिया कि उन्हें 26 नवंबर के हमलों के स्थलों और समुद्री नौका एमवी कुबेर का जायजा लेने का मौका दिया जाए। इसका कथित तौर पर उपयोग लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने मुंबई तट पर पहुँचने के लिए किया था।

काजमी मुंबई हमलों में एकमात्र जीवित गिरफ्तार एवं मुख्य आरोपी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब का बचाव कर रहे हैं।

न्यायाधीश एमएल ताहिलियानी ने कहा कि भारतीय दंड संहिता में वकीलों को अपराध के स्थल का जायजा लेने की इजाजत देने का कोई प्रावधान नहीं है और इस संबंध में अदालत से इजाजत की जरूरत नहीं होती है।

न्यायाधीश ने कहा कि एमवी कुबेर के मामले में अदालत इजाजत नहीं दे सकती, क्योंकि मुचलका जमा करने के बाद नौका को उसके स्वामी को सौंप दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि इस बिंदू पर कुबेर का जायजा लेना जरूरी नहीं है, लेकिन बाद में अगर अदालत महसूस करती है कि यह जरूरी है तो वह वकीलों को इसक इजाजत देगी।

सिपाही भर्ती: यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में

सिपाहियों की बहाली के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। गुरुवार को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य के अधिकारियों के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है। अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट 25 मई को सुनवाई करेगा। 

गत 20 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को 27 मई तक सिपाहियों की बहाली के आदेश पर अमल करने को कहा था। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि 27 मई तक आदेश पर अमल न हुआ तो डीजीपी व गृह विभाग के प्रमुख सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाएगी। राज्य सरकार ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 

गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से पेश एडीशनल एडवोकेट जनरल शैल कुमार द्विवेदी ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने न्यायमूर्ति मार्कडेय काटजू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही सिपाहियों की बहाली तथा गलत भर्तियों को चिन्हित करने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है जिस पर नोटिस भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने 27 मई तक सिपाहियों की बहाली का आदेश दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कोई आदेश पारित करने से इन्कार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक अर्जी दाखिल नहीं की है और राहत मांग रही है। पहले अर्जी दाखिल हो फिर सुनवाई की जाएगी। हालांकि कोर्ट ने 25 मई को सुनवाई की अनुमति दे दी है। 

राज्य सरकार की अर्जी में कहा गया है कि हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लंबित रहने के दौरान अवमानना याचिका पर सुनवाई टाल देनी चाहिए थी लेकिन हाईकोर्ट ने सिर्फ यह कहते हुए सुनवाई स्थगित करने से मना कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है। राज्य सरकार ने कहा कि अगर सिपाहियों की बहाली आदेश पर अमल किया जाएगा तो सुप्रीम कोर्ट में लंबित राज्य सरकार की याचिका महत्वहीन हो जाएगी।

रिश्वतखोरी में साक्षरता समन्वयक को सजा

गंगानगर जिले के सूरतगढ़ ब्लाक साक्षरता समन्वयक, रामलाल को न्यायालय द्वारा रिश्वत लेने के जुर्म में दो वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक ने बताया कि गंगानगर निवासी राजकुमार ने 25 मार्च, 2004 को ब्यूरो में शिकायत की कि साक्षरता के लिए प्रेरक लगाने के एवज में ब्लाक समन्वयक ने पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इस प्रकरण में ब्यूरो द्वारा ट्रैप डालकर रामलाल को दो हजार रुपये की रिश्वत लेने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था। महानिदेशक ने बताया कि ब्यूरो ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश की तथा रामलाल के विरुद्ध जुलाई, 2005 में न्यायालय, विशिष्ट न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बीकानेर में चालान पेश किया था। न्यायाधीश ने ट्रायल के बाद रामलाल को दो वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।