पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Monday, September 6, 2010

वकीलों को बार काउंसिल और अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति का समर्थन

प्रदेश में एडीजे की सीधी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में आंदोलनकर रहे वकीलों के समर्थन में रविवार बार काउंसिल ऑफ राजस्थान भी उतर गई। जोधपुर में हुई बैठक में निर्णय किया गया कि काउंसिल का प्रतिनिधि मंडल जल्द ही राज्यपाल एवं भारत के प्रधान न्यायाधीश से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करेगा। इस बीच, रविवार को अदालत परिसर में वकीलों का धरना जारी रहा। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव करणसिंह राजपुरोहित ने बताया कि वकीलों का प्रतिनिधि मंडल रविवार को महासचिव अनूप शर्मा की अगुवाई में जोधपुर पहुंचा। काउंसिल के अध्यक्ष संदीप मेहता के कक्ष में साधारण सभा की बैठक हुई।

इसमें तय हुआ कि जिन मांगों को लेकर प्रदेश के अधिवक्ता आंदोलन कर रहे हैं उसको बार काउंसिल का समर्थन है। भर्ती परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की जाएगी। काउंसिल सदस्य रणजीत जोशी ने काउंसिल सदस्यों को प्रदेश के समस्त अधिवक्ताओं की भावनाओं के अनुरूप कार्य करने का मामला उठाया। एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मिलापचंद भूत एवं लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद पुरोहित की ओर से गठित संघर्ष समिति को आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने का जिम्मा दिया गया है।

समझौता नहीं होने की स्थिति में वकीलों का आंदोलन सोमवार को भी जारी रहेगा। गौरतलब है कि भर्ती प्रक्रिया को रद्द करवाने की मांग नहीं माने जाने तक वकीलों ने न्यायिक कार्यो के बहिष्कार की घोषणा कर रखी है। हालांकि, वकीलों के आंदोलन को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने सोमवार से होने वाले इंटरव्यू अनिश्चित काल तक पहले ही स्थगित कर दिए थे। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सचिव राजेन्द्र पाल ने बताया कि बार काउंसिल की साधारण सभा ने एक अन्य प्रस्ताव में निर्णय किया कि राजस्थान हाईकोर्ट को एक पत्र लिखकर बीते दस साल में हुई नियुक्तियों के बारे में जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही, यह मांग की जाएगी कि वकील कोटे से नई नियुक्तियां की जाएं।

उधर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति ने राज्य के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर न्यायिक सेवा परीक्षा निरस्त कर राजस्थान के प्रतियोगियों के साथ न्याय करने की मांग की है। समिति का आरोप है कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद हेतु आयोजित परीक्षा में राजस्थान न्यायिक सेवा नियम का उल्लंघन किए जाने से राज्य के प्रतियोगियों के साथ घोर अन्याय हुआ है। ज्ञापन में लिखा गया है कि राजस्थान न्यायिक सेवा 2010, नियम 33, उपनियम 4 के अन्तर्गत स्पष्ट उल्लेख है कि देवनागरी लिपि में लिखित हिन्दी का एवं राजस्थानी बोलियों और राजस्थान की सामाजिक रूढिय़ों का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। वर्तमान न्यायिक सेवा परीक्षा में इस प्रावधान का उल्लंघन किए जाने से राजस्थान के प्रतियोगियों की अपने ही प्रांत में उपेक्षा हुई है और बेरोजगारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। समिति ने उक्त परीक्षा को निरस्त कर प्रावधान के अनुसार ही परीक्षा आयोजित करवाने की मांग की है। समिति का मानना है कि प्रावधान का उल्लंघन होने से बड़ी तादाद में राजस्थान की भाषा-संस्कृति से अनभिज्ञ लोग इस सेवा में स्थान पा जाते हैं जिनकी सेवा राजस्थानियों के लिए कारगर साबित नहीं हो सकती। साथ ही समिति ने मांग की है कि राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षाओं में राजस्थान की भाषा, संस्कृति, बोलियों और सामाजिक रूढिय़ों से सम्बन्धित 100 अंक का अनिवार्य प्रश्न पत्र शुरू किया जाए जिससे राजस्थान के प्रतियोगियों को जनतंत्रीय न्याय मिल सके एवं प्रदेश में प्रदेश की संस्कृतिविद् प्रतिभाओं को अन्याय एवं उपेक्षा से बचाया जा सके।


1 टिप्पणियाँ:

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

प्रदेश में एडीजे की सीधी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में आंदोलन कर रहे वकीलों के समर्थन में बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति का समर्थन करके बहुत अच्छा किया है.

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