पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Tuesday, September 7, 2010

करें कोई, भरे कोई

एक आपराधिक मामले में न्यायालय ने किसी और आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, लेकिन विवेचक सब इंस्पेक्टर ने किसी और को कोर्ट में पेश कर दिया। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब जेल जा चुके बेगुनाह युवक के परिवार ने अदालत में शिकायत की।

इस मामले में एडीजे श्री केसरवानी ने सोमवार को चरगवां थाने के एसआई कमलेश चौरिया को जमकर फटकार लगाई और उसे 5 हजार का क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिये।

चरगवां थाना क्षेत्र में घटित एक आपराधिक मामले में पुलिस ने पूरी छानबीन करने के बाद एडीजे श्री केसरवानी की अदालत में चालान पेश किया। न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान ही कोर्ट ने इस मामले में आरोपी देवेन्द्र पिता समरजीत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

वारंट थामकर आरोपी के खोजबीन में निकले सब इंस्पेक्टर कमलेश चौरिया ने 27 अगस्त 09 को देवेन्द्र की जगह चरगवां में ही रहने वाले एक अन्य युवक रवि सिंह को गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। यहां से रवि सिंह को जेल भेज दिया गया था।

परिजनों ने लगाई अर्जी

गिरफ्तारी के पश्चात अपने बेटे के अपराध के विषय में खोज करने के बाद जब परिजनों को वास्तविकता का पता चला तो उन्होंने न्यायालय के समक्ष अर्जी लगाई। जैसे ही आवेदन आया तो कोर्ट ने उसे गंभीरता से लिया और फिर मामले का खुलासा होने में देर न लगी।

बाद में कोर्ट ने जब सब इंस्पेक्टर से जवाब मांगा तो सफाई में वो ज्यादा कुछ बोल नहीं पाये। दूध का दूध और पानी का पानी होने पर न्यायालय ने एसआई को निर्देशित किया कि वे इसके लिये 5 हजार की क्षतिपूर्ति अदा करें।

1 टिप्पणियाँ:

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

मेरे विचार से एडीजे श्री केसरवानी ने कुछ भी नहीं किया बल्कि एसआई कमलेश चौरिया से रवि सिंह को 50 हजार रूपये दिलवाने चाहिए थे और उतने ही दिनों की सजा काटने का,निलंबित करने का और प्रिंट मीडिया को एसआई कमलेश चौरिया की फोटो सहित समाचार प्रकाशित करने का आदेश देना चाहिए था. मुझे अफ़सोस है हमारे देश की न्याय व्यवस्था पर बेकसूर आदमी की इज्जत की कीमत मात्र 5 हजार लगाई.

आम आदमियों की परेशानियों को लेकर क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (2 ) पढ़ें. उच्चतम व दिल्ली उच्च न्यायालय को भेजें बहुमूल्य सुझाव पर अपने विचार प्रकट करने हेतु मेरा ब्लॉग http://rksirfiraa.blogspot.com & http://sirfiraa.blogspot.com देखें. अच्छी या बुरी टिप्पणियाँ आप करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे.अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें.

# निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन: 09868262751, 09910350461 email: sirfiraa@gmail.com, महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.