पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Thursday, September 2, 2010

अमेठी को नया जिला बनाने को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी

सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की एक जुलाई की अधिसूचना पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ के स्थगन आदेश को खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने छत्रपति शाहूजी महाराज नामक एक नए जिले के गठन की अधिसूचना जारी की थी।

मायावती सरकार ने सुल्तानपुर और रायबरेली जिलों में फैले अमेठी संसदीय क्षेत्र के हिस्सों को लेकर राज्य के 71वें जिले केगठन का फैसला किया था।

उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए न्यायाधीश आर.वी. रविंद्रन और एच.एल.गोखले की खण्डपीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को 'न्यायिक अनौचित्य' का कार्य बताया।

सर्वोच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय की एक अन्य खण्डपीठ ने 11 अगस्त को मामले की सुनवाई की थी और छत्रपति शाहूजी महाराज नगर जिले के गठन की राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को राज्य सरकार की कानूनी विजय के तौर पर देख रहे हैं।

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्र ने लखनऊ में कहा, "मुख्यमंत्री की यह एक बहुत बड़ी जीत है, जिनका इरादा केवल स्थानीय जनता को मांग को देखकर अमेठी का दर्जा बढ़ाने का था।"

उन्होंने कहा, "हम अमेठी को वह देने जा रहे हैं जो गांधी परिवार दशकों में देने में विफल रहा।"

1 टिप्पणियाँ:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

इस तरह की मुख्यमंत्री से कुछ और उम्मीद ही क्या की जा सकती है... जनता की भलाई के अलावा इसके पास हर दूसरे काम के लिए समय ही समय है. शायद राज्य की जनता यही deserve भी करती है क्योंकि उसने ही इसे चुना है.