पढ़ाई और जीवन में क्या अंतर है? स्कूल में आप को पाठ सिखाते हैं और फिर परीक्षा लेते हैं. जीवन में पहले परीक्षा होती है और फिर सबक सिखने को मिलता है. - टॉम बोडेट

Thursday, September 9, 2010

शाइनी ने नहीं किया दुष्कर्म-नौकरानी

बॉलीवुड अभिनेता शाइनी आहूजा के खिलाफ बलात्कार के सनसनीखेज मामले में एक नया मो़ड आ गया है। उनकी नौकरानी इन आरोपों से मुकर गई है कि अभिनेता शाइनी ने पिछले साल मुंबई स्थित अपने घर में उसके साथ बलात्कार किया था।
उसने कहा कि उसके साथ इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। बीस वर्षीय यह युवती तीन सितंबर को अदालत में पेश हुई और कहा कि शाइनी ने उसके साथ कभी बलात्कार नहीं किया। उसने शाइनी के खिलाफ शिकायत उस महिला के कहने पर दर्ज कराई थी, जिसने उसे शाइनी के घर नौकरानी का काम दिलाया था।
हालांकि शाइनी की बीस साला नौकरानी ने उन्हें क्लिन चिट दे दी है, लेकिन उनके खिलाफ मामले में अभी सुनवाई जारी रहेगी।  इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।

शाइनी पर 14 जून, 2009 को अंधेरी वेस्ट स्थित उनके घर में उनकी घरेलू नौकरानी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था।

उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया थाऔर बंबई उच्च न्यायालय से 50,000 रुपये की जमानत राशि पर जमानत मिलने से पहले उन्हें पुलिस व न्यायिक हिरासत में विभिन्न जेलों में 110 दिन बिताने पड़े थे।

संयोग से जांच और पूछताछ के दौरान शाइनी ने स्वीकार किया था कि उन्होंने नौकरानी की सहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाए थे। उन्होंने कथित तौर पर नौकरानी से दुष्कर्म की बात भी स्वीकार की थी। शाइनी और प्रताड़ित महिला की चिकित्सा जांच और डीएनए जांच से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी।
इस घटना पर देशभर में व्यापक हंगामा होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इसमें हस्तक्षेप कर प्रताड़ित महिला को जल्द न्याय दिलवाने के लिए मामले को त्वरित अदालत में ले जाने का निर्देश दिया था।

1 टिप्पणियाँ:

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

मेरी राय:नौकरानी का यह कहना कि-उसके साथ इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। क्या पहले की गई जांचें झूठी थी? या अब मामला ले-देकर निपटा दिया है. अब राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशैली पर एक प्रश्न चिन्ह है? क्या राष्ट्रीय महिला आयोग जेल में बिताये 110 दिनों का कोई हिसाब देगा? इसका राष्ट्रीय महिला आयोग और सरकार मुआवजा देंगी? या यह कहे कि-कोई भी महिला किसी व्यक्ति को झूठे आरोप लगाकर जेल करवा दें उसका कोई माई का लाल जज कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. अब मेरी कानून व्यवस्था को यह चुनौती हैकि-अब क्यों नहीं कोई अदालत इस घटना पर संज्ञान लेती हैं?

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