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Thursday, October 1, 2009

जमकर नौकरिया बांटी थी लालू ने।


राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान जमकर नौकरिया बांटी। उनके पांच साल के कार्यकाल में कुल 32 हजार 838 युवकों को चतुर्थ श्रेणी पदों पर सीधी नौकरी पाने का सुअवसर मिला। सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगे गये विवरण के आधार पर रेलवे बोर्ड के मुख्य जनसंपर्क व सूचना अधिकारी आर डी चौधरी ने यह जानकारी दी है। हालांकि राज्य स्तर पर इस तथ्य का सटीक आंकड़ा रेल मंत्रालय के पास भी उपलब्ध नहीं है कि विभिन्न प्रदेशों में कितने लोगों ने लालू की इस विशेष कृपा का लाभ उठाया।

स्थानीय भाजपा नेता व पिछले लोकसभा चुनाव में मेदिनीपुर से प्रत्याशी रहे प्रदीप कुमार पटनायक ने सूचना के अधिकार के तहत रेल मंत्रालय से यह जानना चाहा था कि पहली जुलाई, 2004 से पहली जुलाई, 2009 तक वर्गीय आधार पर कुल कितने लोगों की नियुक्ति की गई। उस दौरान राज्यों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रीय रेलवे में कितने अभ्यर्थी नियुक्ति पाने में सफल रहे। चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए किन-किन अधिकारियों को अधिकृत किया गया था तथा चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति की योग्यता का आधार क्या था।

गौरतलब है कि मांगी गई सूचना पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल से संबंधित थी। इसके जवाब में मुख्य जनसंपर्क व सूचना अधिकारी चौधरी ने पटनायक को गत 11 सितंबर को लिखित जवाब में बताया कि पिछले पांच साल के कार्यकाल के दौरान कुल 32 हजार 838 लोगों को चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति दी गई। महकमे ने यह भी माना कि इस संबंध में राज्य स्तर पर हुई नियुक्ति का ब्यौरा मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है।

आरआरबी के तहत पिछले पांच साल के दौरान तृतीय श्रेणी में हुई नियुक्ति की संख्या 96 हजार 739 बतायी गई है। इस संबंध में भी राज्य स्तर पर हुई नियुक्ति का विवरण देने में असमर्थता जताई गई है। नियुक्ति के पैनल के संबंध में बताया गया कि रिक्रूटमेंट विभाग के उप मुख्य कार्मिक अधिकारी क्षेत्रीय स्तर पर यह पैनल तैयार करते हैं। सूचना के अधिकार के तहत रेलवे बोर्ड से यह विवरण मांगने वाले पटनायक के अनुसार, वह जानना चाहते थे कि ऊंचे पदों पर आसीन लोग किस तरह अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर चतुर्थ श्रेणी पदों पर मनचाहे लोगों की नियुक्ति करवाते है। महकमे द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना की सत्यता पर संदेह व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति का चलन बंद होना चाहिए तथा यह तय मानदंडों के आधार पर ही होना चाहिए, जिससे असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो सके।

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